हाईकोर्ट बोला…इससे कामकाज और प्रशासनिक अनुशासन पर पड़ेगा असर
बिलासपुर,29 जनवरी 2026। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने कहा है कि, अदालतों में कार्यरत कोई भी कर्मचारी सेवा में रहते हुए नियमित छात्र की तरह शैक्षणिक डिग्री हासिल नहीं कर सकता। नियमित छात्र के तौर पर पढ़ाई करने से कार्यालय के कामकाज और प्रशासनिक अनुशासन पर सीधा असर पड़ता है। डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के आदेश को रद्द कर दिया है। बता दें कि सिंगल बेंच ने एक कर्मचारी को नियमित छात्र के तौर पर एलएलबी फाइनल ईयर की पढ़ाई करने की अनुमति दे दी थी।
क्या है पूरा मामला : रायपुर जिला कोर्ट में असिस्टेंट ग्रेड-3 के पद पर कार्यरत अजीत चौबेलाल गोहर ने अपनी परिवीक्षा अवधि के दौरान एलएलबी की पढ़ाई शुरू की थी। उसे प्रथम और द्वितीय वर्ष की अनुमति दी गई थी। लेकिन, सत्र 2025-26) में विभाग ने तीसरे वर्ष की पढ़ाई करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया। विभाग का कहना था कि नए नियमों के तहत नियमित छात्र के तौर पर पढ़ाई की अनुमति नहीं दी जा सकती।
विभाग के अनुमति नहीं देने पर लगाई थी याचिका : कर्मचारी ने विभाग से अनुमति नहीं देने पर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। जिस पर सिंगल बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा था कि चूंकि उसने दो साल की पढ़ाई पूरी कर ली है, इसलिए तीसरे वर्ष की अनुमति मिलनी चाहिए। जिसके बाद हाईकोर्ट प्रशासन ने रजिस्ट्रार जनरल के माध्यम से इस फैसले के खिलाफ डिवीजन बेंच में अपील की थी। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने नए नियमों का हवाला देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ जिला न्यायपालिका स्थापना नियम 2023 के नियम 11 के तहत कोई भी कर्मचारी नियमित उम्मीदवार के रूप में परीक्षा में शामिल नहीं हो सकता।
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