नई दिल्ली,19 जनवरी 2026 । मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) डॉ. वी. अनंत नागेश्वरन ने गुरुवार को कहा कि हाल के वर्षों में भारत की आर्थिक वृद्धि को और अधिक गति एवं मजबूती मिली है। आर्थिक सर्वेक्षण के आंकड़ों के अनुसार कोविड-पूर्व अवधि में औसतन 6.4 प्रतिशत रही वास्तविक जीडीपी वृद्धि वित्त वर्ष 2025 में 6.5 प्रतिशत तक पहुंची और वित्त वर्ष 2026 में इसके 7.4 प्रतिशत तक जाने का अनुमान है। उन्होंने बताया कि यह वृद्धि मजबूत घरेलू मांग, निवेश में तेजी और अनुकूल आर्थिक वातावरण का परिणाम है। संसद में आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 पेश होने के बाद राष्ट्रीय मीडिया केंद्र में आयोजित पत्रकार वार्ता में डॉ. नागेश्वरन ने जोर देकर कहा कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत के लिए कृषि, विनिर्माण और सेवा तीन आर्थिक इंजन एक साथ सक्रिय रहना आवश्यक है। विनिर्माण और निर्यात को भविष्य की वृद्धि का आधार बताते हुए उन्होंने कहा कि खंडित और तनावपूर्ण वैश्विक माहौल में यही क्षेत्र भारत की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को मजबूत करेंगे। नागेश्वरन ने कहा, ‘वैश्विक अनिश्चितताओं और आर्थिक उथल-पुथल के बीच भारत मैक्रो-स्थिरता का एक ‘ओएसिस’ बना हुआ है।’ उन्होंन कहा कि जब वैश्विक व्यापार पारस्परिक न रह जाए और बाजार तटस्थ न हों, तब ‘स्वदेशी’ एक वैध नीतिगत साधन बन जाता है, जिसे राष्ट्रीय हित में अपनाया जा सकता है। मुख्य आर्थिक सलाहकार के अनुसार वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.8 से 7.2 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान है।
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