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नई दिल्ली@देशभर में यूजीसी के नए नियमों का विरोध…

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दिल्ली हेडक्वार्टर की सुरक्षा बढ़ी,यूपी में सवर्ण सांसदों को चूडि़यां भेजीं
नई दिल्ली,27 जनवरी 2026। देशभर में जनरल कैटेगरी के स्टूडेंट्स और सवर्ण जाति के लोगों का यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (यूजीसी) के नए नियमों को लेकर विरोध तेज हो गया है। नई दिल्ली में यूजीसी हेडक्वार्टर के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। प्रदर्शनकारियों को कैंपस के अंदर घुसने से रोकने के लिए बड़ी संख्या में बैरिकेड्स लगाए गए हैं। उत्तर प्रदेश के लखनऊ,रायबरेली,वाराणसी,मेरठ,प्रयाग राज और सीतापुर में छात्रों, युवाओं और विभिन्न संगठनों ने जगह-जगह प्रदर्शनों में हिस्सा लिया। रायबरेली में भाजपा किसान नेता रमेश बहादुर सिंह और गौरक्षा दल के अध्यक्ष महेंद्र पांडेय ने सवर्ण सांसदों को चूडि़यां भेजी हैं। यूपी में बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने नए नियमों के विरोध में इस्तीफा दे दिया है। यूजीसी के नए नियमों को लेकर कुमार विश्वास ने तंज कसा। सोशल मीडिया पर लिखा,‘चाहे तिल लो या ताड़ लो राजा, राई लो या पहाड़ लो राजा, मैं अभागा ‘सवर्ण’ हूं…मेरा रोंया-रोंया उखाड़ लो राजा।’
संभल में काली पट्टी बांधकर यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ विरोध
यूपी के संभल में केमिस्ट ड्रगिस्ट एसोसिएशन ने नए यूजीसी नियमों के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने काली पट्टी बांधकर बाइक रैली भी निकाली। एसोसिएशन ने इसे रद्द करने की मांग करते हुए प्रधानमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा है।
यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका
यूजीसी के नए को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक नई याचिका दायर की गई है। एडवोकेट विनीत जिंदल की तरफ से दायर याचिका में कहा गया है कि ये नियम जनरल कैटेगरी के साथ भेदभाव करते हैं और उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करते हैं। याचिका में रेगुलेशन 3(सी) के कार्यान्वयन पर रोक लगाने की मांग की गई है और कोर्ट से आग्रह किया गया है कि वह यह सुनिश्चित करे कि 2026 के नियमों के तहत निर्मित ढांचा सभी जातियों के व्यक्तियों पर समान रूप से लागू हो।
यूजीसी के नए नियमों का विरोध क्यों?
यूजीसी ने 13 जनवरी को अपने नए नियमों को नोटिफाई किया था। इसका नाम है- ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन्स,2026।’ इसके तहत, कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में जाति आधारित भेदभाव को रोकने के के लिए विशेष समितियां,हेल्पलाइन और मॉनिटरिंग टीमें बनाने के निर्देश दिए हैं। ये टीमें खासतौर पर एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों की शिकायतों को देखेंगी। सरकार का कहना है कि ये बदलाव उच्च शिक्षा संस्थानों में निष्पक्षता और जवाबदेही लाने के लिए किए गए हैं। हालांकि,नियमों को जनरल कैटेगरी के खिलाफ बताकर विरोध हो रहा है। आलोचकों का कहना है कि सवर्ण छात्र ‘स्वाभाविक अपराधी’ बना दिए गए हैं। जनरल कैटेगरी के स्टूडेंट्स का कहना है कि नए नियम कॉलेज या यूनिवर्सिटी कैंपसों में उनके खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा दे सकते हैं। इससे कॉलेजों में अराजकता पैदा होगी।
केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान बोले- किसी के भी साथ अत्याचार नहीं होगा
केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि किसी को भी इसका गलत इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं रहेगा। किसी के भी साथ अत्याचार या भेदभाव नहीं किया जाएगा।
जातीय भेदभाव की स्पष्ट परिभाषा दी गई
इस परिभाषा में कहा गया है, ‘जाति, धर्म, नस्ल, लिंग, पैदाइश के स्थान, विकलांगता के आधार पर कोई भी अनुचित या पक्षपाती व्यवहार, जो पढ़ाई में बराबरी में बाधा बने या मानव गरिमा के खिलाफ हो, उसे जातिगत भेदभाव माना जाएगा।’ जबकि ड्राफ्ट में जातीय भेदभाव की स्पष्ट परिभाषा नहीं थी।

  1. परिभाषा में ह्रख्ष्ट को भी शामिल किया गया इस परिभाषा में ‘स्ष्ट/स्भ् के अलावा अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ह्रख्ष्ट छात्रों को शामिल किया गया है। कहा गया है कि इनके खिलाफ किसी भी अनुचित या पक्षपातपूर्ण व्यवहार को जाति-आधारित भेदभाव माना जाएगा। जबकि ड्राफ्ट में ह्रख्ष्ट को शामिल नहीं किया गया था।
  2. झूठी शिकायत करने पर सजा का प्रावधान हटाया गया ड्राफ्ट में झूठी शिकायतों को कम करने के लिए प्रावधान था। इसमें कहा गया था कि अगर झूठी या जानबूझकर दुर्भावनापूर्ण तरीके से किसी के खिलाफ शिकायत की गई, तो शिकायत करने वाले को आर्थिक दंड या कॉलेज से सस्पेंड भी किया जा सकता है। अब लागू हुए फाइनल नियमों से ये प्रावधान हटा लिया गया है।

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