बिलासपुर,25 जनवरी 2026। हाई कोर्ट ने पुरानी सेवा की गणना कर पुरानी पेंशन योजना का लाभ देने के लिए नीति बनाने के निर्देश शासन को दिया है. सहायक शिक्षक,शिक्षाकर्मियों की याचिका पर न्यायमूर्ति एके प्रसाद की बेंच में सुनवाई हुई। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी ने पैरवी की. दरअसल, छत्तीसगढ़ राज्य में कार्यरत सहायक शिक्षक,शिक्षक तथा (एल.बी.) संवर्ग के शिक्षक. जिनकी प्रारंभिक नियुक्ति वर्ष 1998-99 में सहायक शिक्षक/शिक्षाकर्मी (पंचायत)/ शिक्षाकर्मी (नगरी निकाय) के पद पर हुई थी, तब से निरंतर सेवाएं देते आ रहे थे। वर्ष 2018 में इनका संविलियन स्कूल शिक्षा विभाग में कर दिया गया,तथा राज्य शासन ने पुरानी पेंशन योजना बहाल कर दी। लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया कि पेंशन के लिए उनकी सेवा की गणना प्रारंभिक नियुक्ति, नियमितीकरण या वर्ष 2018 में हुए संविलियन में से किस तारीख से की जाएगी. की स्पष्ट निर्देश ना होते हुए भी 1 अप्रैल 2012 से शिक्षक पंचायत/नगरी निकाय संवर्ग के लिए नवीन अंशदाई पेंशन योजना लागू की गई थी. शिक्षाकर्मी यदि उनके मूल वेतन की 10′ तक राशि इस योजना में जमा करता है तो नियोक्ता द्वारा भी उतने ही राशि अपने अंश के रूप में जमा करने का प्रावधान किया गया था, तथा एनपीएस के रूप में राशि कटौती की जा रही थी। जिससे परिवेदित होकर एल.बी. संवर्ग के शिक्षकों द्वारा हाई कोर्ट अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी,अनूप मजूमदार,ईशान वर्मा, सी. जयंत,के. राव, मोनिका ठाकुर के माध्यम से याचिका प्रस्तुत की गई थी। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति एके प्रसाद की बेंच में हुई,याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी द्वारा यह आधार लिया गया था।
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