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सूरजपुर@ जेल में ठग का पिता भूमिविहीन, बाहर बेटा फेरारी में— 7.7 एकड़ जमीन हदीस–रिजवान–साधना के नाम कैसे हुई?

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सूरजपुर का महाघोटाला: ठगी के आरोपी की करोड़ों की जमीन बिक गई, पीड़ित रह गए खाली हाथ
ठगी का पैसा, जमीन का खेल और धान खरीदी की मेहरबानी — सूरजपुर में सिस्टम के भीतर सिस्टम!
जब जमीन पर था तीन बैंकों का कर्ज, तो रजिस्ट्री कैसे हुई?
महाठगी का महाजाल – भाग 1 : जरीफ की जमीन कैसे बनी हदीस–रिजवान–साधना की संपत्ति?
ठगी आरोपी के पिता की पूरी जमीन ट्रांसफर, धान खरीदी और बैंक सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल


-शमरोज खान-
सूरजपुर,24 जनवरी 2026(घटती-घटना)।
सरगुजा संभाग के इतिहास में सामने आए सबसे बड़े ठगी प्रकरण में अब एक नया और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है, करोड़ों रुपये की ठगी के आरोपी अशफाक उल्ला और उसके पिता जरीफ उल्ला से जुड़ा यह मामला अब केवल आर्थिक अपराध नहीं रह गया, बल्कि भूमि हस्तांतरण, बैंक ऋ ण,धान खरीदी और राजस्व तंत्र की मिलीभगत की ओर इशारा कर रहा है,सूत्रों के हवाले से दैनिक घटती घटना को प्राप्त दस्तावेज बताते हैं कि जिस जरीफ उल्ला के नाम वर्षों तक सैकड़ों बीघा कृषि भूमि दर्ज थी,वह आज पूरी तरह भूमिविहीन हो चुका है, जबकि उसकी वही जमीन अब हदीस मोहम्मद, रिजवान अंसारी और साधना कुशवाहा के नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज पाई गई है, सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जिस जरीफ उल्ला के नाम कभी बड़ी मात्रा में कृषि भूमि दर्ज थी,वह आज पूरी तरह भूमिविहीन बताया जा रहा है।


जमानत मिलते ही जमीन गायब- जानकारी के अनुसार अशफाक उल्ला पर कई करोड़ की ठगी के मामले दर्ज हैं, उसके पिता जरीफ उल्ला भी सह-आरोपी हैं, लंबे समय बाद पिता–पुत्र दोनों को जमानत मिली, जमानत अवधि के दौरान अशफाक फरार हो गया, उसी दौरान नवंबर 2025 में जरीफ उल्ला ने अपनी सारी कृषि भूमि बेच दी, आज स्थिति यह है कि पिता जेल में है, बेटा फरारी पर और पूरी जमीन तीन नए लोगों के नाम हो चुकी है।
फार्मर पोर्टल से बड़ा खुलासा– दैनिक घटती घटना के पास उपलब्ध Farmer Information Portal के आधिकारिक दस्तावेज में स्पष्ट रूप से दर्ज है कि ग्राम: सोनपुर (00005), तहसील: भैयाथान जिला: सूरजपुर पहले भूमि स्वामी: जरीफ उल्ला, अब दर्ज भू-स्वामी: हदीस मोहम्मद, रिजवान अंसारी, साधना कुशवाहा नाम हो गई है।
7.7 एकड़ जमीन एक साथ ट्रांसफर- राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार निम्न खसरों की जमीन स्थानांतरित हुई: 397, 398/1, 496/2, 497/1, 591/3, 595/1, 595/6, 595/7, 596/1, 596/2, 672/1, 673/2, 677/1, 686, कुल रकबा: लगभग 3.13 हेक्टेयर (करीब 7.7 एकड़ कृषि भूमि) यह कोई मामूली संपत्ति नहीं बल्कि करोड़ों की कृषि भूमि है।
तीन बैंकों के कर्ज के बावजूद रजिस्ट्री!- सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि जरीफ उल्ला की इस जमीन पर पहले से ॥HDFC बैंक, जिला सहकारी बैंक, छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक तीनों का ऋण दर्ज था, प्रश्न यह है कि बिना ऋण मुक्त प्रमाण पत्र , बिना बैंक अनुमति, बिना बंधक हटाए, रजिस्ट्री आखिर किस आधार पर हुई? यह सीधे तौर पर बैंक धोखाधड़ी का मामला बनता है।
धान बोया जरीफ ने, बेचा नए मालिकों ने- मामले में एक और गंभीर विसंगति सामने आई है फसल की बुआई अगस्त 2025, जमीन की बिक्री नवंबर 2025 यानि जिस किसान ने फसल बोई, वह जमीन बेच चुका था, लेकिन फार्मर पोर्टल में दर्ज है कि “हाँ (डीसीएस द्वारा प्राप्त)” अर्थात फसल का भौतिक सत्यापन हुआ, धान खरीदी स्वीकृत हुई और 205 मि्ंटल धान शिवप्रसादनगर धान खरीदी केंद्र में नए भू-स्वामियों के खाते में खरीदा गया, जबकि नियम कहता है कि फसल बेचने का अधिकार उसी किसान को होता है जिसने फसल बोई हो, यह नियम आम किसानों पर सख्ती से लागू होता है, लेकिन इस मामले में पूरी व्यवस्था मौन दिखाई दी।
सत्ता, पद और प्रभाव का खेल?- स्थानीय किसानों का कहना है कि मामूली नाम त्रुटि पर धान रिजेक्ट हो जाता है, आधार–खाता–खसरा नहीं मिले तो खरीदी नहीं होती, लेकिन यहां, जमीन हस्तांतरण के तुरंत बाद, बिना फसल प्रविष्टि के, बिना पुराने किसान की सहमति के धान खरीदी कर ली गई, किसके आदेश पर? यह सवाल अब पूरे धान खरीदी सिस्टम पर खड़ा हो गया है।
क्या यह ठगी की रकम को बचाने की साजिश थी?- सूत्रों का दावा है कि यह जमीन सामान्य बिक्री नहीं बल्कि अपराध से अर्जित धन को सुरक्षित करने का तरीका थी, ताकि पीड़ित पैसा वसूल न कर सकें, अदालत संपत्ति कुर्क न कर पाए, आरोपी परिवार कागजों में भूमिहीन बन जाए, यदि यह सत्य है, तो यह मामला सीधे मनी लॉन्डि्रंग एक्ट के अंतर्गत आता है।
अब सबसे बड़े सवाल
क्या जरीफुल्ला ने जमीन बेचकर पीड़ितों का पैसा लौटाया?
क्या यह जमीन ठगी की रकम से खरीदी गई?
बैंक ऋण रहते पंजीयन कैसे संभव हुआ?
धान खरीदी नियमों का उल्लंघन किसके आदेश पर हुआ?
क्या यह पूरी प्रक्रिया शिकायतकर्ताओं को अधिकार से वंचित करने की साजिश थी?

अब यह केवल ठगी नहीं यह प्रकरण अब शामिल करता है—
करोड़ों की ठगी
बैंक ऋण घोटाला
अपराध से अर्जित संपत्ति का अंतरण
धान खरीदी नियम उल्लंघन
राजस्व रिकॉर्ड में गंभीर अनियमितता
संभावित मनी लॉन्डि्रंग

प्रशासनिक जांच की मांग तेज स्थानीय नागरिकों व पीड़ितों ने मांग की है कि—
जमीन तत्काल कुर्क की जाए
बिक्री की पूरी प्रक्रिया रद्द हो
बैंक एनओसी की जांच हो
धान खरीदी अधिकारियों की भूमिका जांची जाए
श्वष्ठ,श्वह्रङ्ख एवं आर्थिक अपराध शाखा से जांच कराई जाए

सबसे बड़ा सवाल अब भी कायम- यदि जरीफुल्ला ने करोड़ों की जमीन बेची, तो ठगी पीड़ितों का पैसा कहां गया? जब पिता जेल में है, बेटा फरार है, और जमीन दूसरों के नाम है तो न्याय आखिर मिलेगा किसे?
पूर्व भूमि स्वामी
जरीफुल्ला

(अशफाक उल्ला – ठगी आरोपी का पिता)
वर्तमान भू-स्वामी (रिकॉर्ड अनुसार)
हदीस मोहम्मद
रिजवान अंसारी
साधना कुशवाहा

स्थानांतरित भूमि का विवरण

खसरा नंबररकबा (हे.)
3970.3100
398/10.4800
496/20.3300
497/10.1400
591/30.1900
595/10.1000
595/60.0500
595/70.0500
596/10.2000
596/20.2000
672/10.8600
673/20.0800
677/10.0700
6860.0700

कुल स्थानांतरित भूमि
लगभग 3.13 हेक्टेयर (करीब 7.7 एकड़)


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