सारंगढ़,23 जनवरी 2026। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में कोतवाली थाने के सामने तहसीलदार आमरण-अनशन पर बैठ गये। दरअसल कोरबा में पदस्थ तहसीलदार के बेटे के साथ कलेक्टर के गनमैन ने मारपीट की थी। इस घटना के बाद पीडि़त युवक ने कोतवाली थाने में शिकायत की,लेकिन घटना के 48 घंटे बाद भी एफआईआर दर्ज नही होने से दुःखी तहसीलदार खुद ही थाने के सामने धरने पर बैठ गये। इससे हरकत में आई पुलिस ने आनन-फानन में एफआईआर दर्ज की,जिसके बाद धरना समाप्त हो गया।
आर्मी से रिटायर्ड हैं तहसीलदार भगत : टीआरपी न्यूज से अपनी तकलीफ साझा करते हुए बंदेराम भगत ने बताया कि वे सेना से रिटायर्ड जवान हैं और उसके बाद वे राज्य में प्रशासनिक अधिकारी बने। यह पूरा मामला सारंगढ़ कोतवाली थाना क्षेत्र का है। वर्तमान में बंदेराम भगत कोरबा के दीपका में तहसीलदार के पद पर पदस्थ है। उन्होंने आरोप लगाया है कि 20 जनवरी को उनका बेटा राहुल भगत अपनी स्कूटी से आ रहा था। इसी दौरान सड़क पर कुछ अवरोध पैदा हुआ । यहां खड़े कलेक्टर के गनमैन ने मामूली नोंक-झोंक के बाद राहुल की पिटाई कर दी। इस दौरान जब राहुल यहां से जमीन पर गिरे मोबाईल को उठाने लगा, तब गनमैन ने दोबारा उस पर हमला कर दिया और अपने जूते से जमीन पर गिर पड़े राहुल के कान को कुचलने लगा। इस घटना के बाद राहुल भगत ने कोतवाली थाना पहुंचकर पूरे मामले की लिखित शिकायत की ।
कान का पर्दा फटा : मारपीट में घायल राहुल भगत की सारंगढ़ में मेडिकल जांच की गई और उसे रायगढ़ मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। यहां डॉक्टर ने बताया कि राहुल के कान के पर्दे को नुकसान पहुंचा है। भगत ने आरोप लगाया कि शिकायत दिए जाने के 48 घंटे बाद भी पुलिस ने न तो एफ आईआर दर्ज किया और न ही किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई की,जबकि उन्होंने कार्रवाई के लिए एसपी से भी मुलाकात की, एसपी ने उल्टे इस मामले में राहुल को दोषी ठहराया। पुलिस की इस निष्कि्रयता से आहत होकर तहसीलदार बंदेराम भगत ने कल स्वयं कोतवाली के सामने धरना शुरू कर दिया। तहसीलदार ने कहा कि जब एक जिम्मेदार अधिकारी और उसके परिवार को न्याय के लिए सड़क पर बैठना पड़ रहा है,तो आम जनता की स्थिति का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
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