धान घोटाले पर कांग्रेस के भीतर ही मतभेद,प्रशासन असमंजस में

-ओंकार पाण्डेय-
सूरजपुर 23 जनवरी 2026 (घटती-घटना)। सूरजपुर जिले में सामने आए धान उपार्जन केंद्रों के महाघोटाले ने जहां प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है, वहीं अब यह मामला कांग्रेस पार्टी के भीतर भी विरोधाभास का कारण बनता नजर आ रहा है,एक ओर कांग्रेस संगठन के पदाधिकारी दोषियों पर सख्त कार्रवाई और एफआईआर की मांग कर रहे हैं,तो दूसरी ओर पार्टी से जुड़े ही कुछ जनप्रतिनिधि जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कार्रवाई टालने की बात करते दिखाई दे रहे हैं,इस स्थिति ने न केवल राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है,बल्कि प्रशासन को भी असमंजस की स्थिति में डाल दिया है कि आखिर कांग्रेस की किस आवाज को सही माना जाए। सूरजपुर जिले में सामने आया धान घोटाला अब केवल प्रशासनिक जांच का विषय नहीं रहा,बल्कि राजनीतिक अंतर्विरोध और दबाव की कहानी बन चुका है। कांग्रेस के भीतर ही अलग-अलग सुर इस बात का संकेत दे रहे हैं कि मामला जितना बड़ा है, उतना ही संवेदनशील भी,अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वह निष्पक्ष जांच के साथ दोषियों पर सख्त कार्रवाई करता है या फिर यह महाघोटाला भी फाइलों में दबकर रह जाता है।
धान घोटाले की जांच और एफआईआर की मांग को लेकर कांग्रेस का ज्ञापन
धान उपार्जन केंद्रों में सामने आई भारी अनियमितताओं और कथित महाघोटाले की निष्पक्ष जांच कराने एवं दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग को लेकर ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष जफर हैदर के नेतृत्व में कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा,ज्ञापन में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि जिले के कई धान उपार्जन केंद्रों में,हजारों क्विंटल धान की गंभीर कमी पाई गई है, यह लापरवाही नहीं बल्कि सुनियोजित घोटाले का संकेत है इसके बावजूद अब तक न तो किसी जिम्मेदार समिति प्रबंधक के विरुद्ध एफआईआर दर्ज हुई है और न ही किसी को निलंबित किया गया है।
छिंदिया उपार्जन केंद्र में भी 000 बोरी धान की कमी का आरोप
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि रामानुजनगर विकासखंड के छिंदिया उपार्जन केंद्र में लगभग 3000 बोरी धान कम पाया गया है,जिसका उल्लेख जांच रजिस्टर में भी दर्ज है,इसके बावजूद इस केंद्र को लेकर अब तक कोई स्पष्ट कार्रवाई सामने नहीं आई है।

कांग्रेस के भीतर ही दो राय,जांच पर उठे सवाल
जहां एक ओर कांग्रेस संगठन कार्रवाई की मांग कर रहा है, वहीं दूसरी ओर पार्टी से जुड़े एक कांग्रेसी जनपद सदस्य द्वारा शिवप्रसादनगर धान खरीदी केंद्र का निरीक्षण कर बयान दिया गया कि पहले धान का उठाव होने दिया जाए, उसके बाद यदि कमी पाई जाए तो कार्रवाई की जाए, इस बयान ने पूरे मामले को और उलझा दिया है।
यह केवल लापरवाही नहीं,सुनियोजित घोटाला है : जफर हैदर
ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष जफर हैदर ने कहा कि इतनी बड़ी मात्रा में धान की कमी को प्रशासनिक भूल कहकर नहीं टाला जा सकता, यह स्पष्ट रूप से सुनियोजित घोटाले का मामला है, यदि समय रहते दोषियों पर एफआईआर दर्ज नहीं की गई, तो यह प्रशासनिक संरक्षण का प्रमाण माना जाएगा, उन्होंने मांग की कि सभी जिम्मेदार समिति प्रबंधकों को तत्काल निलंबित किया जाए, धान घोटाले में शामिल लोगों पर एफआईआर दर्ज हो, पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
प्रशासन के सामने असमंजस की स्थिति
अब स्थिति यह बन गई है कि एक कांग्रेसी नेता एफआईआर की मांग कर रहा है, दूसरा कांग्रेसी नेता जांच पर सवाल उठाकर कार्रवाई टालने की बात कह रहा है,ऐसे में प्रशासन भी असमंजस में है कि किस कांग्रेसी की बात मानी जाए और किसकी नहीं,सूत्रों का कहना है कि राजनीतिक दबाव और परस्पर विरोधी बयानों के चलते कई मामलों में कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पा रही है।
अब आम जनता और किसानों के बीच यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि…
क्या करोड़ों के घोटाले पर भी केवल नोटिस देकर मामला समाप्त कर दिया जाएगा?
क्या राजनीतिक रसूख के चलते दोषियों को बचाया जा रहा है?
क्या किसानों के धान के साथ हुआ यह घोटाला कभी अपने अंजाम तक पहुंचेगा?
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