पूर्व विधायक विकास उपाध्याय बोले…5 करोड़ में टॉयलेट से लेकर टेंट तक बड़ा घोटाला हुआ
रायपुर,12 जनवरी 2026। बालोद जिले में आयोजित राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी की टेंडर प्रक्रिया और अस्थायी निर्माण कार्यों को लेकर कांग्रेस के पूर्व विधायक और पूर्व संसदीय सचिव विकास उपाध्याय ने पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग की है। उनका आरोप है कि जंबूरी आयोजन में किए गए भुगतान सामान्य प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि सुनियोजित भ्रष्टाचार की तरफ इशारा करते हैं। विकास उपाध्याय का कहना है कि यदि इस मामले की जांच किसी स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी से नहीं कराई गई, तो सच्चाई सामने नहीं आ पाएगी। उन्होंने आशंका जताई कि स्थानीय स्तर पर की जाने वाली जांच में तथ्यों को दबाया जा सकता है।
5 करोड़ का टेंडर और दो करोड़ का टॉयलेट बिल
पूर्व विधायक के अनुसार,जंबूरी आयोजन के लिए करीब 5 करोड़ रुपए का टेंडर जारी किया गया, जिसमें से लगभग 2 करोड़ रुपए केवल अस्थायी टॉयलेट निर्माण के नाम पर दिखाए गए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि कुछ दिनों के आयोजन के लिए बनाए गए अस्थायी टॉयलेट पर इतना बड़ा खर्च कैसे जायज ठहराया जा सकता है। उपाध्याय का कहना है कि, यह आंकड़ा जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाता और आशंका है कि कागजों में संख्या और लागत बढ़ाकर भुगतान किया गया। जंबूरी में ठहरने की व्यवस्था को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। दावा किया गया है कि 1200 वीआईपी लोगों के लिए बनाए गए स्विस टेंट पर 64 लाख रुपए का बिल बनाया गया। वहीं 15 हजार बच्चों के ठहरने के लिए 2000 टेंट दिखाकर 76 लाख रुपए का कार्यादेश जारी किया गया। विकास उपाध्याय का कहना है कि आयोजन स्थल का निरीक्षण करने पर करीब 800 टेंट ही नजर आते हैं। जिससे फाइलों में दर्ज आंकड़ों और जमीनी स्थिति के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है। इस पूरे विवाद का सबसे अहम सवाल यह है कि भुगतान से पहले क्या शिक्षा विभाग, जिला प्रशासन या संबंधित अधिकारियों ने आयोजन स्थल का भौतिक सत्यापन किया था।
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