एसएमएस आया…चालान कटा-गलत चालान पर न्याय कहां?
डिजिटल चालान या वसूली का खेल? वाहन मालिकों की बढ़ी परेशानी
दस्तावेज पूरे, फिर भी चालान! ई-चालान प्रणाली कटघरे में…
ई-चालान व्यवस्था से परेशान वाहन मालिक,शिकायत तंत्र पर सवाल
ऑनलाइन चालान प्रणाली में खामियां, जनता में बढ़ता असंतोष
अदृश्य कैमरों से निगरानी,लेकिन अपील व्यवस्था गायब
कैमरे दिखे नहीं,चालान कट गया ई-चालान से वाहन मालिक परेशान
डिजिटल निगरानी तेज गलत चालान पर जवाबदेही नहीं…
ऑनलाइन ट्रैफिक चालान को लेकर लोगों की शिकायतें…
-न्यूज डेस्क-
रायपुर/सरगुजा,10 जनवरी 2026 (घटती-घटना)। प्रदेश में यातायात व्यवस्था को आधुनिक और डिजिटल बनाने के नाम पर लगाए गए अदृश्य ट्रैफिक कैमरे अब आम जनता के लिए राहत नहीं,बल्कि परेशानी और आक्रोश का कारण बनते जा रहे हैं,सड़कों पर बिना जानकारी लगाए गए इन कैमरों के जरिए ऑनलाइन ई-चालान काटे जा रहे हैं और वाहन मालिकों के मोबाइल पर सीधे एसएमएस भेज दिया जा रहा है,लेकिन सवाल यह है कि क्या हर चालान सही है? और यदि चालान गलत है तो न्याय कहां मिलेगा? डिजिटल तकनीक का उद्देश्य जनता को सुविधा देना है,न कि उसे डर और भ्रम में डालना,यदि ई-चालान व्यवस्था पारदर्शी,जवाबदेह और न्यायसंगत नहीं बनी, तो यह जनविश्वास को तोड़ने का काम करेगी, अब बड़ा सवाल यही है ऑनलाइन ई-चालान जनता की सुविधा है,या अदृश्य कैमरों के जरिए जबरन वसूली का नया हथियार?
चालान कट गया एसएमएस आया और अब करें तो करें क्या?
वाहन मालिकों का कहना है कि अचानक मोबाइल पर चालान कटने का मैसेज आ जाता है, मैसेज में केवल चालान नंबर और भुगतान का निर्देश होता है, लेकिन यह नहीं बताया जाता कि चालान क्यों कटा,सबूत क्या है,और यदि चालान गलत है तो उसकी शिकायत या अपील कहां करें,अधिकांश लोगों को यह भी नहीं पता कि गलत चालान होने पर वे किस विभाग, किस अधिकारी या किस कार्यालय से संपर्क करें। ऐसे में आम नागरिक खुद को लाचार और ठगा हुआ महसूस कर रहा है।
जनता में बढ़ता आक्रोश
पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया,चाय दुकानों,और आम बातचीत में ई-चालान को लेकर गुस्सा और असंतोष साफ दिखाई दे रहा है, लोगों का कहना है कि वे नियमों के पालन के खिलाफ नहीं हैं,चालान से भी परहेज नहीं, लेकिन गलत चालान और अपील की व्यवस्था न होना उन्हें मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान कर रहा है।
परिवहन विभाग से सीधे सवाल
अब जनता सीधे परिवहन विभाग और शासन से जवाब चाहती है क्या हर ई-चालान से पहले मानवीय जांच होती है? तकनीकी गड़बड़ी की जिम्मेदारी कौन लेगा? गलत चालान होने पर सरल, सुलभ और त्वरित अपील व्यवस्था क्यों नहीं? क्या अदृश्य कैमरे केवल निगरानी के लिए हैं या वसूली के लिए?
दस्तावेज पूरे, फिर भी चालान-तकनीकी गलती की सजा जनता को…
कई वाहन मालिकों का दावा है कि उनके पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस,आरसी, बीमा,और पॉल्यूशन सर्टिफिकेट पूरी तरह मौजूद हैं,इसके बावजूद ‘दस्तावेज नहीं होने’ के नाम पर ई-चालान काट दिया गया,लोगों का कहना है कि यदि सर्वर डाउन है,डाटा अपडेट नहीं है,या किसी तकनीकी कारण से दस्तावेज सिस्टम में नहीं दिख रहे, तो इसकी जिम्मेदारी वाहन मालिक की कैसे हो सकती है? लेकिन हकीकत यह है कि तकनीकी खामी का खामियाजा सीधे जनता को भुगतना पड़ रहा है।
डिजिटल सुविधा या जबरन वसूली?
अब लोग खुलकर सवाल पूछने लगे हैं क्या यह सच में ऑनलाइन सुविधा है, या फिर सरकारी खजाना भरने का नया तरीका? आरोप लग रहे हैं कि अदृश्य कैमरों की मॉनिटरिंग करने वाले कर्मचारी बिना मानवीय सत्यापन के,बेवजह चालान काट रहे हैं,मानो उन्हें अधिक से अधिक चालान काटने का लक्ष्य दिया गया हो,जनता पूछ रही है क्या सरकार ने आर्थिक तंगी से उबरने के लिए जबरदस्ती चालान वसूली का रास्ता चुना है?
शिकायत व्यवस्था पूरी तरह नदारद
सबसे गंभीर और चिंताजनक पहलू यह है कि ई-चालान के एसएमएस में कोई हेल्पलाइन नंबर नहीं, कोई शिकायत पोर्टल का लिंक नहीं,और न ही यह जानकारी कि गलत चालान पर कहां और कैसे अपील की जाए,ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए यह व्यवस्था और भी मुश्किल है,जहां डिजिटल जानकारी सीमित है। लोग मजबूरी में चालान भर रहे हैं,भले ही उन्हें पूरा यकीन हो कि चालान गलत है।
जनता की मांग—सुधार जरूरी वाहन मालिकों की मांग है कि—
गलत ई-चालान के लिए स्पष्ट शिकायत और अपील प्रणाली बनाई जाए।
हर चालान एसएमएस में हेल्पलाइन नंबर, वेबसाइट और संपर्क अधिकारी की जानकारी हो।
तकनीकी कारणों से कटे चालानों को तुरंत निरस्त किया जाए।
डिजिटल व्यवस्था के साथ मानवीय विवेक और जवाबदेही भी तय की जाए।
दैनिक घटती घटना अखबार का
सुझाव, ई-चालान व्यवस्था में सुधार जरूरी
डिजिटल व्यवस्था को लागू करना समय की आवश्यकता है, लेकिन डिजिटल सुविधा यदि जनता के लिए परेशानी बन जाए, तो उस पर सुधार भी उतना ही जरूरी है,ई-चालान और अदृश्य कैमरों की व्यवस्था को लेकर सामने आ रही शिकायतें बताती हैं कि प्रणाली में तकनीकी के साथ-साथ मानवीय संवेदनशीलता का अभाव है, दैनिक घटती घटना अखबार का स्पष्ट सुझाव है कि हर ई-चालान के साथ हेल्पलाइन नंबर अनिवार्य किया जाए,चालान के एसएमएस में एक ऐसा सक्रिय हेल्पलाइन नंबर हो, जहां वाहन मालिक अपनी समस्या दर्ज करा सके और सही मार्गदर्शन पा सके,ऑनलाइन दस्तावेज अपलोड करने की सुविधा दी जाए,यदि वाहन मालिक के पास वैध दस्तावेज हैं और तकनीकी कारणों से चालान कट गया है,तो उसे एक निर्धारित पोर्टल या लिंक के माध्यम से आरसी,बीमा,ड्राइविंग लाइसेंस,प्रदूषण प्रमाण पत्र अपलोड करने की सुविधा मिले,दस्तावेज सही पाए जाने पर चालान स्वतः या त्वरित जांच के बाद निरस्त किया जाए,ऐसे में दैनिक घटती-घटना अखबार का मानना है कि परिवहन विभाग को तुरंत कुछ व्यावहारिक और जनहितकारी सुधार करने चाहिए, ताकि आम वाहन मालिकों को अनावश्यक मानसिक और आर्थिक कष्ट से राहत मिल सके।
हर जिले में ऑफलाइन सहायता केंद्र अनिवार्य हों…
आज भी बड़ी संख्या में लोग ऐसे हैं जो ऑनलाइन प्रक्रिया से दूर हैं, स्मार्टफोन या इंटरनेट की सुविधा नहीं रखते,या डिजिटल प्रक्रिया समझने में असमर्थ हैं, ऐसे लोगों के लिए प्रत्येक जिले में एक समर्पित ई-चालान सहायता केंद्र होना चाहिए,जहां वे अपने दस्तावेज दिखाकर गलत चालान के निरस्तीकरण के लिए आवेदन कर सकें।
तकनीकी गलती की सजा जनता को न मिले
यदि सर्वर डाउन है, डेटा अपडेट नहीं है या सिस्टम में तकनीकी खामी है,तो उसकी जिम्मेदारी वाहन मालिक पर नहीं डाली जानी चाहिए,ऐसी स्थिति में चालान को अस्थायी रूप से रोका जाए जब तक सत्यापन न हो जाए,पारदर्शिता और भरोसा सबसे जरूरी,डिजिटल चालान व्यवस्था तभी सफल होगी जब उसमें पारदर्शिता,जवाबदेही और त्वरित समाधान शामिल होगा।
दस्तावेज समाप्ति पर 10 दिन की मोहलत-
अखबार का स्पष्ट सुझाव है कि किसी भी दस्तावेज (बीमा, फिटनेस, पॉल्यूशन आदि) की तिथि समाप्त होने के बाद कम से कम 10 दिन की मोहलत दी जाए,कई बार वाहन मालिक दस्तावेज नवीनीकरण की प्रक्रिया में होता है,बीमा या फिटनेस हो चुका होता है,लेकिन ऑनलाइन सिस्टम में अपडेट नहीं हो पाता,या कार्यालय अवकाश/तकनीकी कारणों से दस्तावेज पूर्ण नहीं हो पाते,ऐसी स्थिति में सीधे चालान काटना अन्यायपूर्ण है।
हाल ही में समाप्त दस्तावेजों पर रियायत
यदि सिस्टम में यह स्पष्ट दिख रहा है कि कोई दस्तावेज हाल ही में (10 दिन के भीतर) समाप्त हुआ है, तो उस वाहन मालिक को चालान से राहत दी जानी चाहिए,और नवीनीकरण के लिए उचित समय दिया जाना चाहिए,इससे ईमानदार वाहन मालिकों को राहत मिलेगी और व्यवस्था पर भरोसा भी बढ़ेगा।
खबर का निष्कर्ष परेशानी नहीं समाधान जरुरी है…
ई-चालान व्यवस्था कानून पालन के लिए है, आम नागरिक को डराने या परेशान करने के लिए नहीं, यदि परिवहन विभाग उपरोक्त सुझावों पर अमल करता है,तो जनता का भरोसा बढ़ेगा, अनावश्यक विवाद कम होंगे,और डिजिटल व्यवस्था वास्तव में सुविधा का माध्यम बन सकेगी, दैनिक घटती घटना का मानना है कि तकनीक का उपयोग तब सफल होता है,जब वह आम आदमी के पक्ष में खड़ी दिखाई दे,न कि उसके खिलाफ,अब उम्मीद है कि परिवहन विभाग जनभावनाओं को समझते हुए आवश्यक सुधारों पर गंभीरता से विचार करेगा।
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