- एमसीबी जिले में दोहरी पुलिसिंग! कहीं अवैध कारोबार पर सख्ती, तो कहीं संरक्षण के आरोप
- एमसीबी में ‘मायावी’ प्रधान आरक्षक का साया: वर्दी की आड़ में अवैध कारोबार का संगठित खेल?
- 112 के नाम पर वापसी, कोतवाली में अवैध धंधों की फील्डिंग,जब प्रधान आरक्षक बन जाए ‘पावर सेंटर’, कानून खुद हो जाए बेबस
- आईपीएस तक को साधने वाला मायावी प्रधान आरक्षक, एमसीबी में फिर सक्रिय, जशपुर से एमसीबी तक: सवालों के घेरे में एक रहस्यमयी वापसी
- कोतवाली से अपराध का संचालन? एमसीबी पुलिसिंग पर गंभीर आरोप,जिस मकसद से भेजे गए थे, क्या उसी पर काम कर रहे हैं?
- कानून व्यवस्था से खिलवाड़ या सुनियोजित प्रोपेगेंडा? अब आईजी–एसपी की बारी: कब टूटेगा ‘मायावी’ तंत्र?
-रवि सिंह-
एमसीबी,08 जनवरी 2026(घटती-घटना)। कानून की सबसे बड़ी ताकत समानता और निष्पक्षता होती है,लेकिन जब एक ही जिले में अलग-अलग थाना क्षेत्रों में अलग-अलग पुलिसिंग दिखाई दे, तो यह केवल प्रशासनिक विफलता नहीं,बल्कि कानून के साथ खुला मज़ाक है, एमसीबी जिला में यही हो रहा है—कहीं अवैध कारोबार पर सख़्त प्रहार,तो कहीं उसी अवैधता को वर्दी की छाया में संरक्षण,चिरमिरी में थाना प्रभारी ने साफ़ संदेश दिया अवैध कारोबार बर्दाश्त नहीं। नतीजा सबके सामने है: या तो कारोबार बंद,या सलाखों के पीछे, यह दिखाता है कि इच्छाशक्ति हो तो कानून काम करता है, लेकिन मनेंद्रगढ़ की तस्वीर इसके ठीक उलट क्यों है? यहां जुआ और अवैध शराब का जाल फल-फूल रहा है और आरोप है कि यह सब एक प्रधान आरक्षक के संरक्षण में चल रहा है,यह आरोप मामूली नहीं,पुलिसिंग की आत्मा पर धब्बा है,जिले की कानून-व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवाल अब केवल सामान्य आरोप नहीं रह गए हैं, बल्कि एक ‘मायावी’ प्रधान आरक्षक की भूमिका को लेकर गंभीर और सुनियोजित आरोप सामने आ रहे हैं,सूत्रों के मुताबिक,यह कोई साधारण पुलिसकर्मी नहीं,बल्कि ऐसा चेहरा है जिसकी चालाकी और प्रभाव में बड़े-बड़े अधिकारी यहां तक कि आईपीएस स्तर के अफसर और निरीक्षक भी आ जाते हैं,जब-जब ऐसा हुआ है,तब-तब कानून-व्यवस्था को नुकसान पहुंचा है यह कटु सत्य अब किसी से छिपा नहीं।
बता दे की जिले में इन दिनों पुलिसिंग को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं,एक ही जिले में,एक ही कानून के तहत काम कर रही पुलिस के बीच अलग-अलग थाना क्षेत्रों में बिल्कुल अलग तस्वीर सामने आ रही है,कहीं अवैध कारोबारियों पर कड़ी कार्रवाई हो रही है,तो कहीं उन्हीं अवैध गतिविधियों के फलने-फूलने के आरोप लग रहे हैं,एमसीबी जिले में सामने आ रही यह दोहरी पुलिसिंग गंभीर जांच और त्वरित सुधार की मांग करती है,यदि समय रहते अवैध कारोबारियों और उन्हें संरक्षण देने वाले पुलिसकर्मियों पर सख्त कदम नहीं उठाए गए,तो जिले में कानून-व्यवस्था पर जनता का भरोसा और कमजोर हो सकता है,अब निगाहें जिला पुलिस प्रशासन पर टिकी हैं, क्या वह चिरमिरी मॉडल को पूरे जिले में लागू करेगा,या मनेंद्रगढ़ की यह स्थिति यूं ही बनी रहेगी।
चिरमिरी में सख्त पुलिसिंग, अवैध कारोबारियों को ‘ना’- यदि चिरमिरी थाना क्षेत्र की बात करें, तो यहां की पुलिसिंग इन दिनों चर्चा में है, चिरमिरी थाना प्रभारी ने अवैध कारोबारियों के खिलाफ स्पष्ट और सख्त रुख अपनाया है, सूत्रों के अनुसार, छोटे से छोटे अवैध कारोबारी तक पर कार्रवाई हो रही है, कई लोग अवैध गतिविधियों से तौबा कर चुके हैं, जबकि नियमों की अनदेखी करने वालों को सलाखों के पीछे पहुंचाया जा रहा है, चिरमिरी पुलिस इस समय अवैध कारोबार के रास्ते में एक मजबूत दीवार बनकर खड़ी दिखाई दे रही है।
मनेंद्रगढ़ में आरोप—एक प्रधान आरक्षक के संरक्षण में फल-फूल रहा अवैध कारोबार- इसके ठीक उलट तस्वीर मनेंद्रगढ़ से सामने आ रही है, जिला मुख्यालय मनेंद्रगढ़ में सूत्रों का दावा है कि जुआ और अवैध शराब जैसे कारोबार खुलेआम फल-फूल रहे हैं, आरोप है कि एक मायावी प्रधान आरक्षक के संरक्षण में यह अवैध नेटवर्क संचालित हो रहा है, बताया जा रहा है कि यही प्रधान आरक्षक पहले कोरिया जिला से अपनी कथित दोषपूर्ण कार्यप्रणाली के कारण हटाया गया था और बाद में जशपुर जिला भेजा गया।
112 के नाम पर वापसी, कोतवाली में ‘फील्डिंग’- बताया जाता है कि उक्त प्रधान आरक्षक 112 सेवा में कार्य करने के नाम पर एमसीबी लौटा था, लेकिन कोतवाली में बैठकर अब फिर से अवैध कारोबार की फील्डिंग करने लगा है, सूत्रों का यह भी आरोप है कि उसने अवैध कारोबारियों को आपस में प्रतिद्वंद्वी बनाकर एक नया, संगठित नेटवर्क खड़ा करना शुरू कर दिया है, ताकि नियंत्रण भी बना रहे और संरक्षण भी चलता रहे, धीरे-धीरे यह नेटवर्क पैर पसार रहा है, और इसका असर जिला मुख्यालय की कानून-व्यवस्था पर दिखने लगा है।
जिले की कप्तान की मेहनत पर भारी पड़ते ‘पुराने चेहरे’?- एमसीबी जिले की पुलिस अधीक्षक एक महिला अधिकारी हैं और जिले की कानून-व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए उनके प्रयासों की चर्चा भी होती रही है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि वर्षों से जमे कुछ पुलिसकर्मी, खासकर यह मायावी प्रधान आरक्षक, उनकी मंशा को पलीता लगाने का काम कर रहे हैं, यदि संबंधित प्रधान आरक्षक की पूर्व कार्यप्रणाली की पूरी जानकारी समय रहते संज्ञान में ली जाती, तो संभवतः उसे थाने से दूर रखकर 112 सेवा तक सीमित किया जाता।
जुआ और अवैध शराब, जिला मुख्यालय में गहराती समस्या- जिले में खासकर मनेंद्रगढ़ क्षेत्र में जुआ और अवैध शराब का कारोबार फिर से सिर उठाता नजर आ रहा है, यह न केवल कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती है, बल्कि आम नागरिकों में पुलिस की निष्पक्षता को लेकर अविश्वास भी पैदा कर रहा है।
एक जिला, दो कानून?- सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब चिरमिरी में सख्त कार्रवाई संभव है, तो मनेंद्रगढ़ में क्यों नहीं?
क्या एमसीबी जिले में एक ही कानून के दो मापदंड लागू हो रहे हैं? क्या अवैध कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई थाना प्रभारी की इच्छा पर निर्भर हो गई है, या फिर संरक्षण देने वालों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
‘तलवे चाटने’ की कला और वर्दी की गिरती गरिमा- सूत्रों का दावा है कि संबंधित प्रधान आरक्षक अधिकारियों को खुश करने की कला में इस हद तक माहिर है कि वर्दी की गरिमा तक दांव पर लग जाती है, आरोप है कि किस तरह वह अपने वरिष्ठों को साधकर अवैध कारोबार की नींव रखता है, यह बात विभाग के भीतर वर्षों से चर्चित रही है, कहा जा रहा है कि जशपुर से एमसीबी में उसकी वापसी भी उसी ‘कला’ का नतीजा है, किस अधिकारी की कृपा और किस ‘गिड़गिड़ाहट’ के बाद यह हुआ, यह चर्चा महज गलियारों तक सीमित नहीं रही।
पुराने रिकॉर्ड और नई तैनाती,सवालों के घेरे में- यह भी आरोप है कि संबंधित प्रधान आरक्षक की पूर्व कार्यप्रणाली विवादों से भरी रही है, यदि यह सब जानकारी समय रहते संज्ञान में ली जाती, तो उसे थाना-कार्य से दूर रखकर केवल 112 जैसी सीमित भूमिका में ही तैनात किया जाता, लेकिन सवाल यह है कि जिस मकसद से उसे एमसीबी भेजा गया, क्या वह उसी मकसद पर काम कर रहा है या फिर अपना निजी ‘प्रोपेगेंडा’ गढ़कर पुराने तरीके दोहरा रहा है?
शीर्ष स्तर पर संज्ञान की मांग- सूत्रों के अनुसार, यह तैनाती पूर्व पुलिस अधीक्षक की अनुशंसा पर हुई थी और वर्तमान आईजी के निर्देशों से अमल में लाई गई, ऐसे में अब यह आवश्यक हो गया है कि एमसीबी पुलिस के साथ-साथ सरगुजा रेंज पुलिस का शीर्ष नेतृत्व इस पूरे मामले का तत्काल संज्ञान ले, यदि समय रहते कठोर और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई, तो एमसीबी जिले में एक बार फिर वही पुरानी कहानी दोहराई जा सकती है, जहां अपराधियों का हौसला बढ़ता है और जनता का भरोसा टूटता है, अब निगाहें एमसीबी के पुलिस अधीक्षक और सरगुजा रेंज के आईजी पर टिकी हैं, क्या वे आरोपों की तह तक जाएंगे, या यह मामला भी फाइलों में दब कर रह जाएगा?
समाचार पत्र का आग्रह कठोर है- दैनिक घटती घटना समाचार पत्र का आग्रह कठोर है, पर न्यायसंगत है तुरंत स्वतंत्र जांच, संदिग्ध तैनातियों की रीव्यू और रोटेशन, अवैध कारोबार पर जिला-व्यापी एक्शन, और यदि आरोप सही हों तो वर्दी उतारने तक की कार्रवाई, आधे-अधूरे कदम अब काम नहीं आएंगे, कानून का डर अपराधी को होना चाहिए, जनता को नहीं, यदि चिरमिरी मॉडल संभव है, तो मनेंद्रगढ़ अपवाद क्यों? एक जिला, एक कानून एक पुलिसिंग। यही कसौटी है इसके बिना भरोसा लौटेगा नहीं, और बिना भरोसे कानून सिर्फ काग़ज़ रह जाता है।
क्या अब होगी निष्पक्ष जांच? जिले में यह सवाल आम है कि—
क्या यह प्रधान आरक्षक 112 की भूमिका में है या कोतवाली से अवैध कारोबार का संचालन कर रहा है?
क्या उसकी तैनाती नियमों के अनुरूप है?
और सबसे अहम—क्या आरोपों की स्वतंत्र जांच होगी?
घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur