- जिलाध्यक्ष देवेन्द्र तिवारी का 1 वर्ष… बूथ से लेकर सत्ता तक भाजपा संगठन में दिखा बदलाव
- संगठन, समन्वय और सफलता….भाजपा जिलाध्यक्ष देवेन्द्र तिवारी का एक साल
- भाजपा जिलाध्यक्ष देवेन्द्र तिवारी का कार्यकाल में उपेक्षित कार्यकर्ता बने संगठन की ताकत
- बूथ स्तर तक पहुंचा भाजपा संगठन, पहले ही वर्ष में देवेन्द्र तिवारी की बड़ी उपलब्धि
- पहले साल में ही चुनावी जीत और संगठनात्मक मजबूती, देवेन्द्र तिवारी का प्रभावशाली कार्यकाल
- कार्यालय से बूथ तक भाजपा, देवेन्द्र तिवारी के नेतृत्व में संगठन को मिली नई ऊर्जा
- एक वर्ष,कई उपलब्धियां, देवेन्द्र तिवारी ने कोरिया भाजपा को दी नई दशा-दिशा
- भाजपा जिलाध्यक्ष देवेन्द्र तिवारी का रिपोर्ट कार्ड, संगठन मजबूत, कार्यकर्ता सक्रिय
- 2026 की अग्नि परीक्षा से पहले देवेन्द्र तिवारी ने संगठन को किया तैयार




-राजन पाण्डेय-
कोरिया,08 जनवरी 2026 (घटती-घटना)। आइए बताता हूँ संगठन की कसौटी पर नेतृत्व की कहानी राजनीतिक दलों की असली मजबूती चुनावी नारों से नहीं,बल्कि जमीनी संगठन,कार्यकर्ताओं के मनोबल और समावेशी नेतृत्व से तय होती है, कोरिया जिले में भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष देवेन्द्र तिवारी का एक वर्ष पूरा होना इसी कसौटी पर परखने का अवसर देता है, बीते वर्षों में यह शिकायत आम रही कि संगठन कुछ चेहरों और कार्यालयों तक सीमित रह गया था, आम कार्यकर्ता हाशिए पर था, उसे केवल चुनावी समय याद किया जाता था,पिछले एक वर्ष में जिस बदलाव की चर्चा है,उसका मूल यही है कि संगठन को व्यक्ति-केन्दि्रत ढांचे से निकालकर कार्यकर्ता-केन्दि्रत बनाया जाए,बूथ स्तर तक कार्यक्रमों की नियमितता, कार्यकारिणी में विविध वर्गों की भागीदारी और उपेक्षित कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी ये संकेत बताते हैं कि दिशा बदलने की कोशिश ईमानदार रही है, चुनावी मोर्चे पर भी नेतृत्व की परीक्षा हुई, विरोध और संशयों के बीच लिए गए निर्णयों ने यह स्पष्ट किया कि रणनीति,संवाद और धैर्य के साथ चुनावी चुनौतियों को साधा जा सकता है,जीत का श्रेय केवल प्रत्याशी को नहीं,बल्कि उस संगठनात्मक मशीनरी को भी जाता है,जो बूथ से लेकर जिला स्तर तक सक्रिय रही,हालांकि,संपादकीय का दायित्व केवल सराहना तक सीमित नहीं,आगे की राह कठिन है, 2026 के निकाय चुनाव ऐसे समय आएंगे जब जन-असंतोष, स्थानीय मुद्दे और प्रशासनिक अपेक्षाएं एक साथ परीक्षा लेंगी,संगठनात्मक मजबूती को जनविश्वास में बदलना होगा,बिजली,पानी,रोजगार,किसानों और शहरी सेवाओं जैसे मुद्दों पर स्पष्ट और संवेदनशील रुख जरूरी होगा,प्रशासन से संतुलित तालमेल रखते हुए जनहित के परिणाम सामने लाने होंगे,केवल समन्वय की चर्चा पर्याप्त नहीं,नया कार्यालय,नए चेहरे और नई ऊर्जा ये सब साधन हैं, साध्य नहीं, साध्य है,कार्यकर्ता का सम्मान,जनता की सुनवाई और जवाबदेही,यदि यह संतुलन बना रहा,तो संगठन आगे भी मजबूत होगा, यदि नहीं, तो उपलब्धियां कागज़ी रह जाएंगी, पहला वर्ष दिशा दिखाता है,मंजि़ल नहीं,नेतृत्व की असली पहचान अगले कदमों से होगी—क्या संगठन जनता की आवाज़ बन पाएगा, क्या कार्यकर्ता स्वयं को सहभागी महसूस करेगा, और क्या चुनावी सफलता जनहित की नीतियों में बदलेगी। आने वाला समय इन सवालों का उत्तर देगा।
बता दे की भारतीय जनता पार्टी के कोरिया जिला संगठन में देवेन्द्र तिवारी के जिलाध्यक्ष बने एक वर्ष पूरे हो चुके हैं। यह एक वर्ष संगठनात्मक दृष्टि से न केवल सक्रियता से भरा रहा,बल्कि भाजपा के जमीनी ढांचे को फिर से खड़ा करने वाला भी साबित हुआ। वर्षों से उपेक्षित महसूस कर रहे कार्यकर्ताओं को मुख्यधारा से जोड़ने, संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और चुनावी चुनौतियों में सफलता दिलाने के कारण यह कार्यकाल चर्चा में रहा, एक वर्ष के कार्यकाल में संगठनात्मक विस्तार,कार्यकर्ताओं का मनोबल,चुनावी सफलता और प्रशासनिक संतुलन इन सभी पहलुओं ने देवेन्द्र तिवारी को एक सक्रिय और परिणाम देने वाले जिलाध्यक्ष के रूप में स्थापित किया है, अब देखना यह होगा कि 2026 के चुनावी रण में यह संगठनात्मक ताकत भाजपा को कितनी बड़ी सफलता दिला पाती है।
संगठन को कार्यालय से निकालकर बूथ तक पहुंचाया- बीते वर्षों में कोरिया जिले में भाजपा संगठन को लेकर यह आम धारणा बन चुकी थी कि गतिविधियां केवल भाजपा कार्यालय और कुछ बड़े चेहरों तक सीमित रहती हैं। देवेन्द्र तिवारी के जिलाध्यक्ष बनने के बाद इस तस्वीर में स्पष्ट बदलाव देखने को मिला, पार्टी के कार्यक्रम अब बूथ स्तर तक नियमित रूप से आयोजित होने लगे। कार्यकर्ताओं की भागीदारी बढ़ी और संगठनात्मक कार्यक्रम कागजों से निकलकर जमीन पर उतरते नजर आए। बूथ समितियों की सक्रियता और नीचे तक संवाद ने संगठन में नई ऊर्जा भरी।
हर वर्ग को प्रतिनिधित्व, कार्यकारिणी बनी संतुलन की मिसाल- जिला कार्यकारिणी के गठन में देवेन्द्र तिवारी ने हर वर्ग, हर समाज और हर क्षेत्र को प्रतिनिधित्व देने का प्रयास किया, ऐसे कई कार्यकर्ता, जो वर्षों से संगठनात्मक पदों से दूर थे, उन्हें जिम्मेदारी मिली, परिणामस्वरूप, पद मिलने के बाद वे कार्यकर्ता पार्टी कार्यक्रमों में नियमित रूप से सक्रिय दिखने लगे, इस कार्यकारिणी की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि इसमें अनुभव और नएपन का संतुलन नजर आया नए चेहरे, लेकिन ईमानदारी और समर्पण के साथ संगठन का काम करते हुए।
चुनावी मैदान में पहली ही परीक्षा में सफलता- जिलाध्यक्ष बनते ही देवेन्द्र तिवारी को पंचायत और निकाय चुनाव जैसी कठिन अग्नि परीक्षा से गुजरना पड़ा, पटना नगर पंचायत में विरोध के बावजूद गायत्री सिंह को प्रत्याशी बनाकर उन्होंने सबको चौंकाया, तमाम आशंकाओं के बीच भाजपा ने वहां ऐतिहासिक जीत दर्ज की और गायत्री सिंह प्रथम अध्यक्ष निर्वाचित हुईं साथ ही गौरव अग्रवाल को पटना नगर पंचायत का उपाध्यक्ष बनाया, इसके बाद जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में सीमित संख्या बल के बावजूद रणनीतिक कौशल दिखाते हुए मोहित पैकरा को अध्यक्ष बनवाने में सफलता मिली, उपाध्यक्ष पद पर भी पार्टी समर्थित प्रत्याशी की जीत सुनिश्चित कराई गई, यह सभी उपलब्धियां देवेन्द्र तिवारी की चुनावी प्रबंधन क्षमता को दर्शाती हैं।
उपेक्षित कार्यकर्ताओं को मिला सम्मान- कोरिया भाजपा में लंबे समय से यह शिकायत थी कि आम कार्यकर्ता केवल चुनाव के समय याद किए जाते हैं। देवेन्द्र तिवारी के नेतृत्व में इस सोच को बदलने का प्रयास हुआ, उपेक्षित महसूस करने वाले कार्यकर्ताओं को संगठनात्मक जिम्मेदारियां दी गईं, बैठकों में उनकी भागीदारी बढ़ी और निर्णय प्रक्रिया में उन्हें जोड़ा गया। आज ऐसे कई कार्यकर्ता सक्रिय रूप से संगठन का चेहरा बनते नजर आ रहे हैं।
मोर्चा-प्रकोष्ठों में नए चेहरों से बढ़ा उत्साह- पहली बार मोर्चा और प्रकोष्ठों में वर्षों से चले आ रहे “आरक्षित चेहरों” की परंपरा टूटी, भाजयुमो, महिला मोर्चा, अल्पसंख्यक, पिछड़ा वर्ग, अजजा और अजा मोर्चा इन सभी में नए और अपेक्षाकृत अनदेखे चेहरों को नेतृत्व दिया गया, इस फैसले से कार्यकर्ताओं में यह संदेश गया कि संगठन में मेहनत करने वालों के लिए आगे बढ़ने के अवसर खुले हैं।
प्रशासन के साथ संतुलित तालमेल- देवेन्द्र तिवारी के कार्यकाल में जिला प्रशासन के साथ टकराव नहीं, तालमेल की नीति देखने को मिली, जहां जनहित का विषय रहा, वहां संवाद के माध्यम से काम कराया गया, और जहां हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं थी, वहां संगठनात्मक मर्यादा बनाए रखी गई। इस संतुलन की प्रशंसा संगठन और आमजन दोनों करते हैं।
प्रदेश संगठन के भरोसेमंद सिपाही- कम समय के राजनीतिक जीवन में देवेन्द्र तिवारी को जिलाध्यक्ष जैसी बड़ी जिम्मेदारी मिलना यह दर्शाता है कि वे प्रदेश संगठन की नजर में भरोसेमंद माने जाते हैं, विधानसभा, लोकसभा और अन्य राज्यों के चुनावों में उन्हें दी गई जिम्मेदारियों का उन्होंने सफलतापूर्वक निर्वहन किया। कोरिया जिला कार्यकारिणी का समय पर गठन भी इसी भरोसे का परिणाम माना जाता है।
नया भाजपा कार्यालय, स्थायी विरासत- जिलाध्यक्ष बनते ही पुराने भाजपा कार्यालय के स्थान पर नए भवन के निर्माण की पहल की गई, प्रदेश संगठन की देखरेख में यह निर्माण कार्य जारी है और संभावना है कि एक वर्ष के भीतर कोरिया जिला भाजपा को नया, आधुनिक कार्यालय मिल जाएगा जो संगठन के लिए एक स्थायी आधार बनेगा।
आगे की चुनौती: 2026 के निकाय चुनाव- आने वाले समय में नगरपालिका परिषद बैकुंठपुर और शिवपुर चरचा के चुनाव होने हैं, राज्य स्तर पर मौजूद राजनीतिक परिस्थितियों और कुछ जनाक्रोश वाले मुद्दों के बीच यह चुनाव देवेन्द्र तिवारी के लिए अगली कठिन परीक्षा होंगे। संगठनात्मक मजबूती को फिर से चुनावी जीत में बदलना उनकी नेतृत्व क्षमता की असली कसौटी रहेगा।
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