- मशाल रैली से पुलिस कार्रवाई तक: कर्मचारी आंदोलन बनाम प्रशासन
- हड़ताल का समर्थन पड़ा महंगा, मनेंद्रगढ़ में तीन कर्मचारियों पर एक्शन
- कलम बंद–काम बंद: चेतावनी नहीं, हकीकत है…वादों की गारंटी फेल, आंदोलन की गारंटी चालू
- 800 दिन बाद भी अधूरे वादे, सरकार कटघरे में…संवाद की जगह दमन? कार्रवाई से भड़का कर्मचारी गुस्सा”
- छत्तीसगढ़ बना आंदोलनगढ़ : कर्मचारी फेडरेशन की हड़ताल उग्र, मशाल रैली से सड़कों पर जनसैलाब
- मनेंद्रगढ़ में कार्रवाई से भड़का आक्रोश, ‘कलम बंद–काम बंद’ जारी




-राजन पाण्डेय-
कोरिया/एमसीबी 30 दिसम्बर 2025 (घटती-घटना)। छत्तीसगढ़ में अधिकारी–कर्मचारी फेडरेशन के आह्वान पर चल रही प्रदेशव्यापी तीन दिवसीय हड़ताल अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है, एक ओर कोरिया जिले में मशाल रैली और जनसैलाब ने आंदोलन को धार दी, वहीं दूसरी ओर मनेंद्रगढ़ (एमसीबी) में हड़ताल के समर्थन पर तीन कर्मचारियों पर की गई कार्रवाई ने आग में घी डालने का काम किया है, फेडरेशन ने साफ कर दिया है कि ‘कलम बंद, काम बंद’ आंदोलन किसी भी सूरत में वापस नहीं लिया जाएगा।
कोरिया में उग्र प्रदर्शन, मशाल रैली से सरकार को चेतावनी- कोरिया जिले के बैकुंठपुर स्थित प्रेमाबाग धरनास्थल से कुमार चौक तक निकाली गई मशाल रैली में हजारों अधिकारी–कर्मचारी शामिल हुए, रैली के दौरान सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी हुई, भीड़ के कारण कुमार चौक पर यातायात बाधित रहा और राजीव भवन–रेस्ट हाउस मार्ग अस्थायी रूप से अवरुद्ध हो गया, हड़ताल को कांग्रेस का खुला समर्थन मिला। जिला कांग्रेस कमेटी कोरिया के अध्यक्ष प्रदीप गुप्ता और कांग्रेस नेता आशीष डबरे धरनास्थल पहुंचे, प्रदीप गुप्ता ने कहा कि चुनाव के दौरान कर्मचारियों से किए गए 11 सूत्रीय वादे—अनियमित कर्मचारियों का नियमितीकरण, केंद्र के समान डीए, समयमान वेतनमान, वेतन विसंगति का निराकरण—800 दिन बाद भी अधूरे हैं। उन्होंने इसे “मोदी की गारंटी का फेल होना” बताया, आशीष डबरे ने आरोप लगाया कि प्रदेश में रोजगार सहायक, पटवारी, पंचायत सचिव, आंगनबाड़ी, मितानिन, एनएचएम कर्मी, शिक्षक, सफाईकर्मी सहित लगभग साढ़े चार लाख कर्मचारी आंदोलनरत हैं, जो सरकार के दावों की सच्चाई उजागर करता है।
छत्तीसगढ़ : वादों की सरकार या आंदोलन की प्रयोगशाला?- छत्तीसगढ़ आज एक असहज सच्चाई के सामने खड़ा है, जिस प्रदेश में सरकार ने “गारंटी” के नाम पर भरोसा मांगा था, उसी प्रदेश की सड़कों पर आज मशालें जल रही हैं, फाइलें बंद हैं और कर्मचारी खुली चेतावनी दे रहे हैं, अब और नहीं, अधिकारी–कर्मचारी फेडरेशन की तीन दिवसीय हड़ताल केवल वेतन या भत्तों की मांग नहीं है, यह उस टूटे भरोसे का प्रतीक है जो सत्ता और कर्मचारियों के बीच बनना चाहिए था, 11 सूत्रीय मांगें नई नहीं हैं, ये वर्षों से लंबित हैं। चुनाव बीत गए, सरकार बन गई, लेकिन समाधान फाइलों में कैद रह गए, कोरिया में मशाल रैली और मनेंद्रगढ़ में हड़ताल समर्थकों पर कार्रवाई, ये दो घटनाएं मिलकर एक सवाल खड़ा करती हैं।
क्या असहमति अब “शांति भंग” मानी जाएगी?- लोकतंत्र में विरोध अपराध नहीं होता। हड़ताल का समर्थन करना, संवाद की अपील करना, आवाज़ उठाना, ये संविधान प्रदत्त अधिकार हैं। लेकिन जब कलेक्टर कार्यालय में समर्थन मांगने पर पुलिस बुला ली जाती है, तो संदेश साफ जाता है, संवाद नहीं, दमन, सबसे चिंताजनक यह है कि सरकार अभी भी हालात को “कंट्रोल” में बताने की कोशिश कर रही है, जबकि ज़मीनी हकीकत इसके उलट है। रोजगार सहायक से लेकर शिक्षक, आंगनबाड़ी से लेकर सफाईकर्मी, प्रदेश का हर विभाग उबल रहा है। यह किसी एक संगठन की नाराज़गी नहीं, बल्कि सिस्टम पर अविश्वास का विस्फोट है, इतिहास गवाह है कलम बंद करने से सवाल नहीं रुकते, काम बंद कराने से आक्रोश खत्म नहीं होता सरकार के सामने अब दो ही रास्ते हैं बातचीत, भरोसा और समयबद्ध समाधान या फिर एक ऐसा प्रदेश, जहां हर चौक धरनास्थल और हर दिन आंदोलन का दिन हो फैसला सत्ता को करना है।
11 सूत्रीय मांगों पर एकजुटता- धरनास्थल पर वक्ताओं ने लंबित मांगों की अनदेखी पर नाराज़गी जताई। आंदोलन को और व्यापक बनाने की रणनीति तय हुई, कर्मचारियों की एकजुटता, अनुशासन और संगठनात्मक शक्ति स्पष्ट नजर आई।
मनेंद्रगढ़ में कार्रवाई से उबाल- इधर एमसीबी/मनेंद्रगढ़ में हड़ताल के समर्थन पर तीन कर्मचारियों पर शांति भंग के आरोप में कार्रवाई की गई। कलेक्टर डी. राहुल वेंकट के निर्देश पर सिटी कोतवाली पुलिस कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंची,
कार्रवाई की जद में आए, नगर पंचायत झगराखांड के आरआई संजय पांडेय, खेल अधिकारी गोपाल सिंह और सफाई कर्मी सुरेंद्र प्रसाद जो 29 से 31 दिसंबर तक चल रही हड़ताल के समर्थन में अधिकारियों–कर्मचारियों से संपर्क कर रहे थे।
गुलाब कमरो की तीखी प्रतिक्रिया- पूर्व विधायक एवं ट्रेड यूनियन काउंसिल छत्तीसगढ़ के प्रांताध्यक्ष गुलाब कमरो ने कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए कहा यह लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा हमला है, ऐसी कार्रवाइयों से कर्मचारियों की आवाज़ दबाई नहीं जा सकती। हम पूरी मजबूती से कर्मचारियों के साथ खड़े हैं।
फेडरेशन का ऐलान— आंदोलन नहीं रुकेगा- छत्तीसगढ़ कर्मचारी–अधिकारी फेडरेशन ने प्रशासनिक कदम को दमनात्मक प्रयास करार दिया और दो टूक कहा कि किसी भी पदाधिकारी पर कार्रवाई हुई तो पूरा फेडरेशन उसके साथ खड़ा रहेगा। फेडरेशन ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन पूरी मजबूती से जारी रहेगा।
घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur