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कोरिया@ 2025: कोरिया जिला…उपलब्धियों की चमक, चुनौतियों की छाया और अधूरे वादों का साल

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  • 2025: कोरिया जिले का साल…जब पहचान बढ़ी, पर भरोसा डगमगाया
  • उपलब्धियों के बीच उलझा कोरिया,2025 ने क्या सिखाया?
  • प्रशासनिक प्रयोग बनाम जमीनी हकीकत… कोरिया का 2025
  • सम्मान से सवालों तकःकोरिया जिले का एक साल
  • कोरिया 2025ःसम्मान भी मिला, सवाल भी खड़े हुए
  • उम्मीद,उपलब्धि और असंतोष…कोरिया जिले का 2025
  • कोरिया का 2025: राष्ट्रीय पहचान से स्थानीय नाराज़गी तक
  • 2025 की कहानीःकोरिया में प्रशासन आगे, ज़मीन पीछे
  • कोरिया 2025ःजहाँ तारीफ़ भी रही, तकलीफ़ भी
  • राष्ट्रीय सम्मान, स्वास्थ्य-सुशासन की उपलब्धियाँ, और साथ में अधूरी योजनाएँ,सड़क हादसे व किसान संकट
  • विकास के दावे,चुनावी बदलाव और जमीनी चुनौतियों का सालाना लेखा-जोखा
  • 2025: कोरिया जिले के लिए उपलब्धियों, प्रशासनिक बदलावों और चुनौतियों का मिला-जुला साल
जिले के इकलौते पटना नगर पंचायत चुनाव में भाजपा का कब्जा 
2025 में कोरिया जिले को मिला देवेंद्र तिवारी के रूप में भाजपा का नया जिलाध्यक्ष

-रवि सिंह-
कोरिया,30 दिसंबर 2025 (घटती-घटना)।
वर्ष 2025 कोरिया जिले के इतिहास में एक ऐसा साल रहा, जिसे न पूरी तरह उपलब्धियों का कहा जा सकता है और न ही सिर्फ चुनौतियों का, यह वर्ष प्रशासनिक नवाचार, राष्ट्रीय मंच पर पहचान और विकास की नई कोशिशों के साथ-साथ अधूरी योजनाओं, सड़क हादसों और कुछ दुखद घटनाओं के कारण भी याद किया जाएगा। वर्ष 2025 कोरिया जिले के लिए कई मायनों में निर्णायक रहा, यह साल न तो केवल उत्सव का था और न ही केवल असफलताओं का। कहीं राष्ट्रीय मंच पर सम्मान और सराहना मिली, तो कहीं अधूरी योजनाओं, सड़क दुर्घटनाओं और सामाजिक संकटों ने प्रशासनिक दावों की परीक्षा ली, कुल मिलाकर 2025 कोरिया जिले के लिए उपलब्धि और असंतोष का मिला-जुला वर्ष बनकर सामने आया, वर्ष 2025 कोरिया जिले के लिए उपलब्धियों और चुनौतियों का संतुलित मिश्रण रहा,राष्ट्रीय सम्मान, स्वास्थ्य और सुशासन में प्रयोगों ने जिले की छवि को मजबूत किया,लेकिन अधूरे विकास कार्य,सड़क हादसे और सामाजिक समस्याओं ने यह भी साफ किया कि सिर्फ प्रशंसा से जमीनी हकीकत नहीं बदलती, अब 2026 से अपेक्षा यही है कि 2025 में मिली पहचान को ठोस विकास, सुरक्षित सड़कों और समयबद्ध योजनाओं में बदला जाए, ताकि उपलब्धियाँ कागज़ों से निकलकर जि़ंदगी में उतर सकें।
जिला मुख्यालय सड़क चौड़ीकरणःवादों की फाइल,काम शून्य
बैकुण्ठपुर जिला मुख्यालय की मुख्य सड़कों का चौड़ीकरण 2025 का सबसे बड़ा और ज्वलंत मुद्दा रहा,हर कुछ महीनों में इस पर नई तारीख,नया आश्वासन और नई घोषणा सामने आती रही, लेकिन साल के अंत तक काम शुरू होना तो दूर,ठोस कार्ययोजना तक नजर नहीं आई,ट्रैफिक जाम, संकरी सड़कें और बढ़ते हादसे,व्यापारियों और आम नागरिकों की लगातार शिकायतें, जनप्रतिनिधियों के स्तर पर सिर्फ बैठकें और बयान, 2025 में यह साफ हो गया कि सड़क चौड़ीकरण का मामला घोषणाओं की राजनीति में ही उलझा रहा।
पीजी कॉलेज बैकुण्ठपुरःअनियमितताओं पर जांच सिफर
बैकुण्ठपुर पीजी कॉलेज में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं का मुद्दा पूरे साल सुर्खियों में रहा,छात्र संगठनों और सामाजिक संगठनों ने बार-बार जांच की मांग उठाई,लेकिन न कोई स्वतंत्र जांच समिति बनी,न किसी जिम्मेदार पर कार्रवाई हुई,न ही प्रशासन की ओर से ठोस जवाब सामने आया, परिणामस्वरूप,यह मामला भी फाइलों में दबा एक और प्रकरण बनकर रह गया, जिसने शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए।
महाविद्यालय परिसर में एसपी कार्यालय: विरोध के बावजूद निर्माण
2025 में सबसे ज्यादा विवादित मुद्दों में से एक रहा महाविद्यालय परिसर में एसपी कार्यालय का निर्माण, छात्र संगठनों, शिक्षाविदों और सामाजिक संगठनों ने इसका विरोध किया, तर्क दिया गया कि शैक्षणिक परिसर की गरिमा और स्वायत्तता प्रभावित होगी, इसके बावजूद, तमाम विरोध और ज्ञापनों के बाद भी अंततः महाविद्यालय परिसर में ही एसपी कार्यालय का निर्माण शुरू कर दिया गया, यह निर्णय प्रशासनिक दृष्टि से भले जरूरी बताया गया हो, लेकिन इससे यह सवाल गहराया कि क्या जनभावनाओं और शिक्षा के हितों को नजरअंदाज किया गया?

धरती आभा जनजाति ग्राम उत्कर्ष अभियान में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों सम्मान प्राप्त करती कलेक्टर चंदन त्रिपाठी

राष्ट्रीय मंच पर कोरिया की पहचान
2025 में कोरिया जिले ने प्रशासनिक क्षमता और योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के कारण देशभर में अपनी अलग पहचान बनाई, जनजातीय क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के प्रभावी विस्तार के चलते धरती आबा जनजाति ग्राम उत्कर्ष अभियान में जिले को राष्ट्रपति के हाथों राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुआ, यह सम्मान न केवल जिला प्रशासन की कार्यशैली का प्रमाण बना, बल्कि आदिवासी अंचलों में भरोसे की वापसी का भी संकेत माना गया, इसी तरह कुपोषण प्रबंधन में जिले को नीति आयोग की राष्ट्रीय रैंकिंग में तीसरा स्थान मिला, यह उपलब्धि आंगनबाड़ी, स्वास्थ्य अमला और प्रशासनिक निगरानी की संयुक्त मेहनत का परिणाम रही, जल संरक्षण के क्षेत्र में भी अमृत सरोवर, तालाब पुनर्जीवन और जनभागीदारी आधारित प्रयासों को राष्ट्रीय जल पुरस्कार समारोह में सराहा गया, स्वास्थ्य क्षेत्र में चिरायु योजना के तहत 25 हजार से अधिक बच्चों की जांच और निःशुल्क उपचार ने जिले को राज्य स्तर पर पहचान दिलाई।

गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज होने पर टीम की सदस्य सोनल राजे के साथ कलेक्टर एवं जिला पंचायत सीईओ कोरिया

स्वास्थ्य क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि
स्वास्थ्य सेवाओं के लिहाज से 2025 कोरिया के लिए सकारात्मक रहा, चिरायु योजना के अंतर्गत जिले में 25 हजार से अधिक बच्चों की स्वास्थ्य जांच की गई। निःशुल्क बाल हृदय रोग शिविरों के माध्यम से कई गंभीर रूप से बीमार बच्चों को नया जीवन मिला। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिविरों की निरंतरता ने प्रशासन को राज्य स्तर पर प्रशंसा दिलाई, हालाँकि, दूसरी ओर नया जिला अस्पताल और एमसीएच भवन अब भी अधूरे रहे। भवन तैयार होने के बावजूद फिनिशिंग और संसाधनों की कमी के कारण आमजन को अब भी पुराने अस्पताल ढांचे पर निर्भर रहना पड़ा, जिससे प्रशासनिक उपलब्धियों पर सवाल भी खड़े हुए।
सुशासन, शिक्षा और डिजिटल पहल
वर्ष 2025 में सुशासन तिहार और सुशासन सप्ताह के जरिए प्रशासन जनता के सीधे संपर्क में दिखा, जिले भर से 40 हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हुए, जिनके निराकरण का दावा प्रशासन ने समयबद्ध रूप से किया, ‘सुशासन ऑन व्हील्स’ और ‘सुशासन संगवारी’ जैसी पहलें दूरस्थ और बुजुर्ग आबादी तक पहुंचने में कारगर रहीं, शिक्षा के क्षेत्र में पीएम श्री स्कूल और मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा प्रोत्साहन छात्रवृत्ति योजनाओं से छात्रों को नई सुविधाएं और अवसर मिले। कलेक्ट्रेट और न्यायालयों में डिजिटलीकरण की शुरुआत को भी प्रशासनिक सुधार की दिशा में अहम कदम माना गया।
कांग्रेस के लिए 2025: कोरिया जिले में उपलब्धियों से ज्यादा ‘कमियों और कमियों’ का साल
वर्ष 2025 कोरिया जिले में जहाँ प्रशासन और सत्तारूढ़ दल के लिए उपलब्धियों और राजनीतिक मजबूती का साल रहा, वहीं कांग्रेस के लिहाज से यह वर्ष नुकसान, निराशा और संगठनात्मक कमजोरी का प्रतीक बनकर सामने आया। नगरीय निकायों से लेकर जनपद और जिला स्तर तक हुए लगभग सभी चुनावों में कांग्रेस को पराजय का सामना करना पड़ा। परिणामस्वरूप पार्टी न सिर्फ सत्ता से दूर रही, बल्कि जनाधार और संगठनदोनों मोर्चों पर कमजोर दिखाई दी, कुल मिलाकर, 2025 कोरिया जिला कांग्रेस के लिए उपलब्धियों का नहीं, बल्कि कमियों और कर्मियों से जुड़ी चुनौतियों का साल रहा। चुनावी हार, कमजोर संगठन और नेतृत्व को लेकर उठते सवालों ने पार्टी की स्थिति को कठिन बना दिया है, अब 2026 कांग्रेस के लिए करो या मरो जैसा साल साबित हो सकता है—जहाँ या तो पार्टी खुद को नए सिरे से खड़ा करेगी, या फिर राजनीतिक हाशिये की ओर और खिसकती नजर आएगी।

संगठन चुनाव की पूरी प्रक्रिया नतीजा यथावत जिलाध्यक्ष प्रदीप गुप्ता

कोरिया में कांग्रेस का संगठनात्मक संदेश: बदलाव नहीं, यथास्थिति पर भरोसा
2025 कोरिया जिले में कांग्रेस ने संगठनात्मक मजबूती की बजाय स्थिरता (यथास्थिति) को प्राथमिकता देना ज्यादा जरूरी समझा है, संगठन चुनाव की पूरी प्रक्रिया भले ही औपचारिक रूप से पूरी की गई हो, लेकिन अंततः मोहर फिर से जिलाध्यक्ष प्रदीप गुप्ता पर ही लगाई गई, यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब जमीनी स्तर पर संगठन की कमजोरी, निष्कि्रयता और अपेक्षित जनसंपर्क की कमी को लेकर सवाल लगातार उठते रहे हैं, राजनीतिक रूप से यह निर्णय दो संकेत देता है, पहला—प्रदेश नेतृत्व ने यह मान लिया है कि वर्तमान परिस्थितियों में नेतृत्व परिवर्तन से संगठन को तत्काल कोई लाभ नहीं मिलेगा, दूसरा—यह भी कि संगठन की संभावित कमजोरी की कीमत चुकाने को भी नेतृत्व तैयार है, बशर्ते अंदरूनी असंतोष या शक्ति-संतुलन न बिगड़े, हालांकि आलोचक यह सवाल उठाने से नहीं चूक रहे कि अगर संगठन कमजोर हो रहा है, कार्यकर्ताओं में ऊर्जा की कमी है और चुनावी तैयारी सुस्त है, तो फिर वही नेतृत्व दोहराना किस हद तक व्यावहारिक है? संगठन चुनाव की प्रक्रिया अगर अंततः पूर्वनिर्धारित निर्णय पर ही खत्म होनी थी, तो उसे बदलाव और लोकतांत्रिक अभ्यास का आवरण देने की जरूरत क्यों पड़ी?
चुनावी मोर्चे पर लगातार हार
2025 में हुए नगरीय निकाय, जनपद पंचायत और जिला पंचायत चुनाव कांग्रेस के लिए शुभ नहीं रहे, अधिकांश नगर पंचायतों में पार्टी को हार मिली, जनपद और जिला पंचायतों में भी कांग्रेस प्रभावी चुनौती पेश नहीं कर सकी, कई परंपरागत कांग्रेस समर्थित क्षेत्रों में भी मतदाताओं का रुझान बदलता नजर आया, इन नतीजों ने यह स्पष्ट कर दिया कि जमीनी स्तर पर पार्टी की पकड़ कमजोर हुई है और संगठन मतदाताओं से जुड़ाव बनाने में असफल रहा।
संगठनात्मक कमजोरी और कार्यकर्ताओं की हताशा
2025 में कांग्रेस की सबसे बड़ी समस्या संगठनात्मक शिथिलता रही, बूथ स्तर से लेकर ब्लॉक और जिला स्तर तक सक्रियता की कमी दिखाई दी, कार्यकर्ताओं के बीच आपसी समन्वय का अभाव रहा, कई स्थानों पर चुनाव के दौरान पार्टी की मौजूदगी केवल औपचारिकता तक सीमित दिखी, इसका सीधा असर चुनावी परिणामों पर पड़ा और कार्यकर्ताओं में निराशा व असंतोष गहराता गया।
जिलाध्यक्ष का मुद्दा बना चर्चा का केंद्र
पूरा साल कांग्रेस जिला अध्यक्ष का विषय पार्टी के भीतर चर्चा और असंतोष का कारण बना रहा, नेतृत्व को लेकर असमंजस की स्थिति बनी रही, संगठनात्मक फैसलों में स्पष्टता और आक्रामकता की कमी महसूस की गई, कई वरिष्ठ नेताओं और जमीनी कार्यकर्ताओं में यह धारणा बनी कि नेतृत्व बदलाव या पुनर्गठन की जरूरत है, इस आंतरिक खींचतान ने कांग्रेस को एकजुट होकर सत्तारूढ़ दल के खिलाफ प्रभावी भूमिका निभाने से रोके रखा।
विपक्ष की भूमिका भी कमजोर
2025 में कांग्रेस विपक्ष के रूप में भी अपेक्षित दबाव नहीं बना सकी, धान खरीदी, अधूरे विकास कार्य, सड़क हादसे और प्रशासनिक मुद्दों पर आवाज जरूर उठी, लेकिन वह न तो व्यापक जनआंदोलन बन सकी और न ही राजनीतिक लाभ में बदल पाई, इससे यह संदेश गया कि कांग्रेस मुद्दे तो उठा रही है, लेकिन उन्हें धार देने और जनता से जोड़ने में चूक रही है।
2026 की राह: सवाल और संभावनाएँ
अब सबसे बड़ा सवाल यही है 2026 कांग्रेस के लिए कैसा होगा? क्या पार्टी संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करेगी? नेतृत्व में बदलाव या स्पष्टता लाएगी? जमीनी कार्यकर्ताओं को फिर से सक्रिय कर पाएगी? या फिर 2025 की तरह 2026 भी आत्ममंथन और अंदरूनी खींचतान में ही निकल जाएगा—यह तो आने वाला साल ही बताएगा।
विकास कार्य: दावे ज्यादा, रफ्तार कम…2025 में कोरिया जिले में विकास योजनाओं की सुस्त प्रगति एक बड़ी चुनौती रही…
जिला अस्पताल और एमसीएच भवन
जल जीवन मिशन की अधूरी पाइपलाइनें
प्रधानमंत्री आवास योजना के अधूरे मकान
सोनहत क्षेत्र के मिनी स्टेडियम और सीसी सड़कें

बैकुंठपुर सड़क चौड़ीकरण ये सभी योजनाएँ समय-सीमा पार करने के बावजूद अधूरी रहीं। इससे आम जनता में नाराजगी और प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल बढ़े।
सड़क सुरक्षा और कानून-व्यवस्था: चिंता का विषय- 2025 सड़क सुरक्षा के लिहाज से कोरिया जिले के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण वर्षों में गिना गया, नेशनल हाईवे और चौरचा, कटगोड़ी जैसे क्षेत्रों में कई भीषण हादसे हुए, जिनमें युवाओं की जान चली गई, हालाँकि प्रशासन ने हेलमेट, सीटबेल्ट और नशे में ड्राइविंग के खिलाफ अभियान चलाया, लेकिन हादसों की संख्या में अपेक्षित कमी नहीं आ सकी, कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर हत्या, आत्महत्या और संदिग्ध मौतों की घटनाओं ने जिले को झकझोर दिया। नशे के खिलाफ आबकारी विभाग की सख्त कार्रवाई जरूर राहत देने वाली रही।
किसान, अतिक्रमण और मानव–वन्यजीव संघर्ष- धान खरीदी में लिमिट, रकबा कटौती और टोकन की समस्या ने किसानों को सबसे ज्यादा परेशान किया। कई केंद्रों पर लंबी कतारें और विरोध प्रदर्शन देखने को मिले, हाथी–मानव द्वंद में फसलों और घरों को भारी नुकसान हुआ, जबकि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में बरसात से पहले कई परिवार बेघर हो गए, जिनके पुनर्वास पर सवाल उठे।
सुशासन, शिक्षा और डिजिटल पहल– सुशासन सप्ताह और सुशासन तिहार के माध्यम से प्रशासन ने गांव-गांव तक सरकारी योजनाओं की पहुंच बनाई, हजारों आवेदनों का समयबद्ध निराकरण हुआ, शिक्षा के क्षेत्र में पीएम श्री स्कूल और मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा प्रोत्साहन छात्रवृत्ति जैसी योजनाओं से छात्रों को लाभ मिला। कलेक्ट्रेट और न्यायालयों में डिजिटलीकरण की शुरुआत को भी एक सकारात्मक कदम माना गया।

जिला पंचायत चुनाव में अध्यक्ष उपाध्यक्ष पद पर भाजपा का कब्जा

राजनीति और पंचायत चुनाव- राजनीतिक दृष्टि से 2025 भाजपा के लिए अनुकूल रहा। पंचायत चुनावों में पार्टी ने जिला, जनपद और नगर पंचायतों में मजबूत पकड़ बनाई। गांवों में नए नेतृत्व के चयन को लेकर उत्साह दिखा, वहीं विपक्ष ने कुछ मुद्दों पर सवाल भी उठाए।
विकास कार्यों की सुस्त रफ्तार- जहाँ एक ओर उपलब्धियों की चर्चा रही, वहीं कई बड़े विकास कार्य अधूरे रहना साल की बड़ी निराशा बना। जिला अस्पताल और एमसीएच भवन, जल जीवन मिशन की अधूरी पाइपलाइनें, प्रधानमंत्री आवास योजना के अधूरे घर और सोनहत क्षेत्र के मिनी स्टेडियम जैसे प्रोजेक्ट्स समय-सीमा पार करने के बावजूद पूरे नहीं हो सके। बैकुंठपुर सड़क चौड़ीकरण भी सिर्फ घोषणाओं तक सीमित रहा।
सड़क सुरक्षा और दुखद घटनाएँ- 2025 सड़क सुरक्षा के लिहाज से चुनौतीपूर्ण रहा। नेशनल हाईवे और कुछ प्रमुख मार्ग ‘ब्लैक स्पॉट’ के रूप में उभरे, जहाँ कई जानलेवा हादसे हुए। इसके अलावा हत्या, आत्महत्या और अन्य आपराधिक घटनाओं ने जिले को झकझोर दिया। प्रशासन ने ट्रैफिक नियमों और नशे के खिलाफ सख्ती जरूर दिखाई, लेकिन हादसों की संख्या चिंता का विषय बनी रही।
राष्ट्रीय पहचान और सम्मान
जनजातीय कल्याण में उत्कृष्टता: अक्टूबर 2025 में नई दिल्ली के विज्ञान भवन में द्रौपदी मुर्मू के हाथों कोरिया जिले को ‘धरती आबा जनजाति ग्राम उत्कर्ष अभियान’ के उत्कृष्ट क्रियान्वयन हेतु सम्मान मिला। यह सम्मान कलेक्टर चंदन त्रिपाठी ने प्राप्त किया।
नीति आयोग की सराहना: कुपोषण प्रबंधन में नवाचारों के लिए नीति आयोग के “यूज़-केस चैलेंज” में जिले को देश में तीसरा स्थान मिला।
पर्यावरण व जल संरक्षण: छठे राष्ट्रीय जल पुरस्कार में अमृत सरोवर, वर्षा जल संचयन और जनभागीदारी के प्रयासों की सराहना हुई।
विकास की रफ्तार: अधूरे प्रोजेक्ट्स
जिला अस्पताल/एमसीएच : डेडलाइन पार; फिनिशिंग में देरी—पूरी शुरुआत 2026-27 तक खिसकने की आशंका।
जल जीवन मिशन: पाइपलाइन बिछी, पर कई गाँवों में नल सूखे—टंकी/कनेक्टिविटी अधूरी।
प्रधानमंत्री आवास (सोनहत): सैकड़ों मकान छत/लिंटर पर अटके।
मिनी स्टेडियम/सीसी सड़कें (सोनहत): स्वीकृति के बाद काम ठप।
बैकुंठपुर सड़क चौड़ीकरण: वादे बहुत, प्रगति शून्य।
उच्च शिक्षा: पीजी कॉलेज अनियमितताओं पर जाँच ठंडी; कॉलेज परिसर में स्क्क कार्यालय को लेकर विरोध के बीच निर्माण शुरू।

2025: कोरिया जिले के लिए उपलब्धियों, प्रशासनिक बदलावों और चुनौतियों का मिला-जुला साल

पर्यटन और पर्यावरण
गुरु घासीदास–तमोर पिंगला टाइगर रिज़वर्: ट्रैकिंग की शुरुआत से पर्यटन संभावनाएँ बढ़ीं।
चुनौतियाँ: राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में अनियमितताओं की चर्चाएँ और मानव-वन्यजीव संघर्ष—विशेषकर हाथी-मानव द्वंद में फसल/आवास क्षति।
कानून-व्यवस्था और सामाजिक घटनाएँ
दुखद वारदातें: जमगहना क्षेत्र में हत्या-आत्महत्या की घटना; युवक-युवती के फाँसी पर मिले शव—क्षेत्र में सनसनी।
नशे पर प्रहार: आबकारी विभाग की बड़ी कार्रवाइयाँ; सप्लायरों पर शिकंजा।
स्कूल सुरक्षा: ओवरलोड वैनों पर सख्त कार्रवाई।
सड़क सुरक्षा: चुनौतीपूर्ण वर्ष
ब्लैक स्पॉट्स: एनएच -43, चौरचा, कटगोड़ी मोड़—तेज रफ्तार और लापरवाही से कई जानें गईं।
प्रमुख हादसे:
चौरचा-बैकुंठपुर मार्ग पर हाइवा-बाइक टक्कर—तीन युवकों की मौत; सड़क सुधार की माँग।
बरसात में बस पलटी—15+ घायल, राहत कार्य तत्पर।
प्रशासनिक कदम: हेलमेट-सीटबेल्ट अभियान, शराब पीकर वाहन चलाने पर जुर्माना, संवेदनशील वन क्षेत्रों में स्पीड-लिमिट/सावधानी बोर्ड।
कृषि और आजीविका
धान खरीदी: रकबा-कटौती, लिमिट और टोकन समस्याएँ—किसान परेशान; विरोध प्रदर्शन।
अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई: बरसात पूर्व कई परिवार बेघर—पुनर्वास की मांग।
एक नज़र में 2025
क्षेत्र
प्रमुख तथ्य
स्वास्थ्य
चिरायु में 25,000+ बच्चों की जाँच

प्रशासन
सुशासन तिहार; 41,000+ आवेदनों का निपटारा
पर्यावरण
जल संरक्षण में राष्ट्रीय सराहना

पर्यटन
टाइगर रिज़र्व ट्रैकिंग की शुरुआत
सड़क सुरक्षा
5 ब्लैक स्पॉट चिन्हित, सख्ती बढ़ी
विकास
कई बड़े प्रोजेक्ट अधूरे


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