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रायपुर@2025 छत्तीसगढ़ : फाइलें दौड़ती रहीं,जनता खड़ी रही…

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  • फाइलों में विकास, ज़मीन पर सवाल…प्रशासन चला, भरोसा डगमगाया
  • 2025 : आदेशों का साल, अनुभवों की कमी, छत्तीसगढ़ की 2025 डायरी : फैसले बहुत, राहत कम
  • 2025 : छत्तीसगढ़ में शासन था, अनुभूति नहीं…जनता लाइन में…सिस्टम फाइल में…
  • 2025 : छत्तीसगढ़ प्रशासन की परीक्षा
  • का साल, सिस्टम मजबूत, सेवा कमजोर,
  • मिशन मोड या भ्रम मोड?
  • 2025 का लेखा-जोखा : छत्तीसगढ़ में शासन बनाम जमीनी सच्चाई,उपलब्धियों के बीच अनुत्तरित सवाल,एक साल,कई तस्वीरें
  • 2025 चेतावनी था, 2026 इम्तिहान होगा…अगर यही चला, तो आगे क्या?
  • 2025 के सबक : क्या
  • 2026 में प्रशासन बदलेगा?


-न्यूज डेस्क-
रायपुर,30 दिसम्बर 2025 (घटती-घटना)। 2025 छत्तीसगढ़ के प्रशासन के लिए निर्णयों का साल नहीं, आदेशों का साल रहा, साल भर शासन-प्रशासन यह साबित करता रहा कि फाइलें तेज चल सकती हैं,लेकिन जनसेवा वहीं ठहरी रही जहाँ नेटवर्क नहीं, सड़क नहीं और जवाबदेही नहीं, प्रशासन का चेहरा मिशन मोड बताया गया, पर जमीन पर यह प्रोटोकॉल मोड बनकर रह गया, नक्सल उन्मूलन के नाम पर प्रशासन को सुरक्षा ढांचे में ऐसा बाँध दिया गया कि कलेक्टर जनप्रतिनिधि नहीं,कोऑर्डिनेटर बन गए विभाग सेवक नहीं, रिपोर्टर बन गए डिजिटल प्रशासन के दावे 2025 में सबसे ज्यादा बेनकाब हुए, छात्रवृत्ति के लिए पहाड़ चढ़ते छात्र, पेंशन के लिए भटकते बुजुर्ग,और प्रमाण-पत्र के लिए लाइन में खड़े नागरिक यह सब उस सिस्टम की तस्वीर है जो ऑनलाइन तो है,पर ऑन-ग्राउंड नहीं,भ्रष्टाचार के मामलों में प्रशासन की नीति और भी विचित्र रही,छोटे कर्मचारी पकड़ में आए, बड़े हस्ताक्षर ‘जांचाधीन’ रह गए, यही कारण है कि 2025 में भय नहीं, भ्रम का प्रशासन दिखा, 2025 में प्रशासन ने यह साबित किया कि सिस्टम चल सकता है लेकिन जनता के साथ नहीं, जनता के ऊपर।
प्रशासनिक दृष्टि से 2025 छत्तीसगढ़ के लिए कैसा रहा?

  1. प्रशासन पर सुरक्षा का भारी दबाव
    – पूरा साल नक्सल प्रभावित जिलों (बीजापुर,सुकमा, दंतेवाड़ा,नारायणपुर) में प्रशासन सुरक्षा एजेंसियों के साथ तालमेल में रहा
    – कई बार कलेक्टर-एसपी का निर्णय क्षेत्रीय हालात से बंधा दिखा…
    – ‘विकास’ की फाइलें भी ‘सुरक्षा क्लियरेंस’ के बाद ही आगे बढ़ीं…
    – नतीजाः प्रशासन सक्रिय रहा,लेकिन स्वतंत्र निर्णय क्षमता सीमित दिखी…
  2. ट्रांसफर-पोस्टिंग और अस्थिरता
    – 2025 में आईएएस / आईपीएसी / जिला स्तर पर असामान्य रूप से ज़्यादा बदलाव
    – कई जिलों में अधिकारी पूरे साल ‘सेट’ ही नहीं हो पाए…
    – योजनाओं की निरंतरता प्रभावित हुई…
    – संदेश साफ़ थाः ‘परफॉर्मेंस से ज़्यादा भरोसे’ का प्रशासन…
  3. भ्रष्टाचार पर कार्रवाईः दिखी, पर चयनात्मक
    – एसीबी/ ईओडब्ल्यू की कार्रवाइयाँ हुईं…
    – सहकारी विभाग, शिक्षा, बैंकिंग, भर्ती और पंचायत स्तर पर मामले सामने आए…
    – लेकिन बड़े नामों तक कार्रवाई नहीं पहुँची…
    – प्रशासन पर आरोप लगाः छोटे कर्मचारी पकड़े गए, सिस्टम बच गया…
  4. डिजिटल प्रशासन की पोल
    – छात्रवृत्ति, पेंशन, धान खरीदी, जाति-निवास प्रमाण-पत्र…
    – ऑनलाइन सिस्टम की विफलता…
    – नेटवर्क और सर्वर के नाम पर आम जनता परेशान
    – 2025 ने साबित कियाः डिजिटल सिस्टम है, लेकिन डिजिटल क्षमता नहीं…
  5. जमीनी निरीक्षण बनाम कागजी रिपोर्ट
    – कई योजनाएँ फाइलों में 100′
    – जमीन पर 50′ भी नहीं
    कलेक्टर स्तर पर निरीक्षण कम,रिपोर्टिंग ज़्यादा
    प्रदेश की सबसे बड़ी प्रशासनिक घटना – 2025- नक्सल उन्मूलन को प्रशासनिक मिशन घोषित करना, यह केवल सुरक्षा फैसला नहीं था यह पूरे प्रशासनिक ढांचे की दिशा बदलने वाला निर्णय था। क्यों यह सबसे बड़ी प्रशासनिक घटना मानी गई? पहली बारःकलेक्टर,वन विभाग, पीडब्ल्यूडी, शिक्षा, स्वास्थ्य सभी को नक्सल उन्मूलन से सीधे जोड़ा गया, ‘सामान्य प्रशासन’? ‘मिशन मोड प्रशासन ‘, अबूझमाड़, अंदरूनी इलाकों में सड़क, पुल, स्कूल, मोबाइल टावर प्रशासनिक आदेश से, सुरक्षा कवच में यह फैसला आने वाले 10 वर्षों के प्रशासनिक मॉडल को प्रभावित करेगा।
    संक्षिप्त निष्कर्ष पहलूस्थिति
    प्रशासनिक स्थिरता कमजोर
    सुरक्षा समन्वय मजबूत
    भ्रष्टाचार नियंत्रण अधूरा
    सेवा वितरण असंतोषजनक
    निर्णय की स्पष्टता थी,पर कठोर

  6. छत्तीसगढ़ 2025 : माह-दर-माह टाइमलाइन
    जनवरी 2025

    – साल की शुरुआत नक्सल हिंसा के साथ
    – बस्तर संभाग के बीजापुर-दंतेवाड़ा क्षेत्र में मुठभेड़
    – कई जवान शहीद ? सुरक्षा नीति पर बड़ा दबाव
    – राज्य सरकार ने ‘नक्सल उन्मूलन निर्णायक चरण’ की घोषणा की
    फरवरी 2025
    – नगर निकाय चुनाव
    – भाजपा को ऐतिहासिक बढ़त
    – कांग्रेस को शहरी इलाकों में बड़ा झटका
    – राजनीति में संदेश साफ़ः शहरी मतदाता सरकार के साथ।
    मार्च 2025
    – धान खरीदी अपने चरम पर
    – रिकॉर्ड मात्रा में खरीदी, किसानों को समय पर भुगतान
    – लेकिनः टोकन,लिमिट, बारदाना जैसे मुद्दों पर जमीनी नाराजगी भी।
    अप्रैल 2025
    – औद्योगिक निवेश का दौर
    – स्टील, पावर, लॉजिस्टिक्स और एमएसएमई सेक्टर में बड़े प्रस्ताव
    – रोजगार सृजन के वादे
    – सरकार ने ‘निवेश-अनुकूल छत्तीसगढ़’ की ब्रांडिंग तेज की।
    मई 2025
    – प्रशासनिक फैसलों पर बहस
    – मंत्रियों से सलामी गार्ड हटाने का निर्णय
    – समर्थक बोलेः औपनिवेशिक परंपरा से मुक्ति
    – आलोचक बोलेः प्रतीकात्मक राजनीति
    जून 2025
    – अबूझमाड़ और सुदूर वनांचल में सड़क व संचार विस्तार
    – कई सालों से कटे इलाकों में पहली बार मोबाइल नेटवर्क
    – इसे नक्सल विरोधी रणनीति का ‘सबसे मजबूत हथियार’ माना गया।
    जुलाई 2025
    – शिक्षा और डिजिटल असमानता उजागर
    – वनांचल के छात्र नेटवर्क के लिए पहाड़ों पर चढ़ते दिखे
    – ‘डिजिटल इंडिया’ बनाम ‘डिजिटल हकीकत’ पर बहस
    अगस्त 2025
    – स्वतंत्रता दिवस संदेश में विकास + सुरक्षा का संतुलन
    – सरकार ने दावा कियाः ‘नक्सलवाद अंतिम सांसों में ‘
    – विपक्ष ने सवाल उठाएः ‘जमीनी सच अलग है
    सितंबर 2025
    – भ्रष्टाचार से जुड़े कई मामले सामने
    – बैंकिंग, शिक्षा, पंचायत और भर्ती से जुड़े विवाद
    – एसीबी की कार्रवाई
    – प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल
    अक्टूबर 2025
    – आदिवासी क्षेत्रों में योजनाओं की समीक्षा
    – स्वास्थ्य, पोषण, आवास योजनाओं की प्रगति
    – काग़ज बनाम जमीन की खाई फिर सामने
    नवंबर 2025
    – राजनीतिक बयानबाजी तेज
    – विपक्ष नेतृत्व संकट से जूझता दिखा
    – सवाल उठाः ‘क्या छत्तीसगढ़ में विपक्ष सिर्फ एक चेहरे तक सिमट गया है? ‘
    दिसंबर 2025
    साल का
    लेखा-जोखा
    सरकार…
    – निवेश
    – सड़क
    – सुरक्षा को उपलब्धि बताती रही
    जनता…
    – रोजगार
    – महंगाई
    – सेवा की गुणवत्ता पर जवाब मांगती रही…
    जिला-वार प्रशासनिक
    रिपोर्ट कार्ड (2025)
    ग्रेडिंग आधारः
    – सेवा वितरण
    – प्रशासनिक स्थिरता
    – भ्रष्टाचार नियंत्रण
    – फील्ड उपस्थिति
    – जन-संतोष
    बीजापुर—ग्रेड 😀
    – प्रशासन पूरी तरह सुरक्षा-केंद्रित
    – विकास योजनाएँ धीमी
    – अधिकारी निर्णय से ज़्यादा अनुमति पर निर्भर
    – स्थितिः प्रशासन मौजूद, पर नागरिक अनुपस्थित
    दंतेवाड़ा-ग्रेड :C
    – शिक्षा-स्वास्थ्य में औसत प्रदर्शन
    – सुरक्षा और प्रशासन में तालमेल बेहतर
    – लेकिन भ्रष्टाचार शिकायतें बनी रहीं
    – नियंत्रण है, भरोसा नहीं
    सरगुजा-ग्रेड : B
    – आदिवासी योजनाओं का असर दिखा
    – डिजिटल सेवाओं में असमानता
    – जिला प्रशासन सक्रिय, पर संसाधन सीमित
    – स्थितिः ईमानदार कोशिश, अधूरा परिणाम
    कोरिया-ग्रेड : B
    – प्रशासनिक सक्रियता अच्छी
    – लेकिन शिक्षा, बैंकिंग व राजस्व में विवाद
    – शिकायतों पर कार्रवाई देर से
    – स्थितिः काम हुआ, विश्वास डगमगाया

बिलासपुर-ग्रेड : B
– न्यायिक व प्रशासनिक समन्वय बेहतर
– शहरी सेवाओं में सुधार
– ग्रामीण इलाकों में धीमापन
– स्थितिः संतुलित, पर असमान
रायपुर-ग्रेडः ए
– योजनाओं की तेज फाइल मूवमेंट
– मॉनिटरिंग मजबूत
– लेकिन आम नागरिक तक पहुँच में दूरी
– स्थितिः राजधानी का प्रशासन तेज, संवेदनशील कम
– कुल राज्य औसत ग्रेडः बी- प्रशासन चला, पर हर जगह समान नहीं चला।
प्रशासन को आत्ममंथन
करना होगा, वरना 2026 असंतोष का साल बनेगा
छत्तीसगढ़ में वर्ष 2025 के प्रशासनिक रिपोर्ट कार्ड ने शासन-प्रणाली की चिंताजनक तस्वीर सामने रखी है,जिला-वार मूल्यांकन में जहाँ कुछ शहरी जिलों को ए-बीग्रेड मिला, वहीं नक्सल व आदिवासी बहुल क्षेत्रों में सी और डी ग्रेड का प्रभुत्व यह दर्शाता है कि प्रशासनिक विकास समान और संतुलित नहीं रहा, यह रिपोर्ट स्पष्ट संकेत देती है कि प्रशासन फाइल-केंद्रित रहा, नागरिक-केंद्रित नहीं, डिजिटल सेवाएँ जमीन पर विफल रहीं, शिकायत निवारण प्रणाली भरोसा नहीं जगा सकी, अधिकारियों की स्थिरता और जवाबदेही दोनों कमजोर पड़ीं यदि 2026 में भी यही कार्यशैली जारी रही, तो यह केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि जन-असंतोष का संस्थागत कारण बन सकती है, प्रेस के माध्यम से शासन-प्रशासन को यह चेतावनी दी जाती है कि अब भी समय है आदेशों से बाहर निकलकर जमीन पर प्रशासन दिखाने का, अन्यथा, 2026 में जनता की चुप्पी 2028 में प्रश्न बनकर लौटेगी।


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