
वीडियो सही,दोष सिद्ध फिर भी ‘निलंबन का आराम
रिश्वत ली,पकड़े गए…तो बर्खास्तगी क्यों नहीं?
भ्रष्टाचार का इनाम : आधा वेतन…पूरा आराम
जब रिश्वत की सज़ा छुट्टी बन जाए…
रिश्वत पर निलंबन,बर्खास्तगी पर चुप्पी-क्या यही है ‘सुधार’ की परिभाषा?
पटवारी की रिश्वत लेती वायरल वीडियो ने खड़े किए गंभीर सवाल…
निलंबन तक सीमित कार्रवाई या भ्रष्टाचार को बचाने की पुरानी परंपरा?
-रवि सिंह-
बैकुंठपुर,29 दिसंबर 2025 (घटती-घटना)। कोरिया जिले के बैकुंठपुर तहसील में पदस्थ पटवारी अमरेश पाण्डेय का किसानों से रिश्वत लेते हुए वायरल वीडियो सामने आने के बाद राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर कठघरे में खड़ी है। विभागीय जांच में वीडियो की सत्यता स्वीकार किए जाने के बाद पटवारी को निलंबित कर दिया गया है,लेकिन कार्रवाई यहीं रुक जाना कई गंभीर सवाल खड़े करता है।
बता दे की छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में पटवारी अमरेश पाण्डेय का रिश्वत लेते हुए वायरल वीडियो सिर्फ एक व्यक्ति की बेईमानी नहीं,बल्कि पूरे राजस्व तंत्र के सड़ते ढांचे का आईना है,वीडियो की सत्यता विभागीय जांच में सही पाई गई, रिश्वत लेने की बात स्वीकार कर ली गई, और उसके बाद हमेशा की तरह निलंबन, यहीं से असली सवाल शुरू होता है, जब रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़े जाने जैसा स्पष्ट प्रमाण मौजूद है,तब एफ़आईआर क्यों नहीं? जब भ्रष्टाचार सिद्ध है,तब बर्खास्तगी क्यों नहीं? निलंबन कोई सज़ा नहीं, बल्कि कई मामलों में यह आराम की सरकारी छुट्टी बन चुका है आधा वेतन,कोई काम नहीं, कोई जवाबदेही नहीं। यह व्यवस्था अपराध को दंडित नहीं करती,बल्कि उसे समय देती है,ताकि मामला ठंडा हो जाए, लोग भूल जाएं, और फिर वही चेहरा किसी और हल्के आदेश से बहाल हो जाए,राजस्व विभाग में रिश्वत कोई अपवाद नहीं रही, बल्कि यह एक अनकही परंपरा बन चुकी है। वर्षों से किसान कहते आए हैं पैसा दो, तभी काम होगा। अब जब वही बात वीडियो में कैद होकर सामने आ गई,तब भी अगर प्रशासन सिर्फ निलंबन तक सीमित है,तो यह साफ संकेत है कि व्यवस्था खुद अपराधी को बचाने में रुचि रखती है,और सवाल सिर्फ रिश्वत तक सीमित नहीं है, क्या आय से अधिक संपत्ति की जांच होगी? क्या स्वतंत्र एजेंसी से पड़ताल कराई जाएगी? या फिर यह मामला भी फाइलों की कब्र में दफन कर दिया जाएगा? अगर इस प्रकरण में कठोर, अंतिम और सार्वजनिक कार्रवाई नहीं हुई, तो यह तय है, रिश्वत रुकेगी नहीं, ईमानदार कर्मचारी हतोत्साहित होंगे और जनता का भरोसा प्रशासन से पूरी तरह टूटेगा, अब फैसला प्रशासन को करना है यह मामला मिसाल बनेगा या एक और भुला दी गई फाइल।
वायरल वीडियो ने खोली व्यवस्था की पोल…
वायरल वीडियो में पटवारी किसानों से खुलेआम पैसे मांगते और किस काम के कितने पैसे लेने हैं, इस पर मोलभाव करते दिखाई दे रहे हैं। यह वही कार्य हैं, जिन्हें नियमों के तहत उन्हें निःशुल्क करना होता है। शासन से नियमित वेतन और भत्ते पाने के बावजूद इस तरह की वसूली, राजस्व विभाग में वर्षों से चली आ रही उस परंपरा की पुष्टि करती है, जिसकी चर्चा आमजन लंबे समय से करते रहे हैं।
सवालों के घेरे में सिर्फ पटवारी नहीं…पूरा विभाग…
मामला बैकुंठपुर तहसील के एक गांव से जुड़ा है,जहां किसानों के अनुसार रिश्वत दिए बिना काम होना लगभग असंभव था। वीडियो सामने आने के बाद विभाग ने त्वरित निलंबन तो किया,लेकिन एफ़आईआर, बर्खास्तगी या आपराधिक कार्रवाई को लेकर अब तक कोई स्पष्ट कदम नहीं उठाया गया है।
निलंबनः कार्रवाई या बचाव की रणनीति?
सबसे बड़ा सवाल यही है,जब वीडियो सही पाया गया,जब रिश्वत लेने की बात विभाग ने मान ली,तो बर्खास्तगी और आपराधिक मामला दर्ज करने में देरी क्यों? निलंबन के बाद आरोपी पटवारी को जीवन निर्वाह भत्ता (आधा वेतन) मिल रहा है। पूर्व के मामलों को देखें तो आशंका स्वाभाविक है कि क्या यह निलंबन समय गुजरने के साथ बहाली का रास्ता खोलने की सोची-समझी रणनीति तो नहीं?
कार्यकाल पर गंभीर आरोप, किसानों में राहत…
सूत्रों के अनुसार अमरेश पाण्डेय का पूरा कार्यकाल भ्रष्टाचार की शिकायतों से भरा रहा है। जहां-जहां उनकी पदस्थापना रही,वहां किसानों की नाराज़गी और शिकायतें सामने आती रहीं, जो कथित तौर पर राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव में दबा दी गईं। निलंबन के बाद कई गांवों में किसानों के बीच राहत और संतोष की भावना देखी जा रही है, और अब उनकी मांग साफ है,स्थायी बर्खास्तगी।
आखिरी सवालः वेतन के बावजूद रिश्वत क्यों?
शासन कर्मचारियों का वेतन-भत्ता तय करता है ताकि वे सम्मानजनक जीवन जी सकें। फिर भी यदि रिश्वत ली जा रही है,तो यह व्यक्तिगत लालच, व्यवस्था की ढील,या कार्रवाई के डर का अभाव क्या है? यदि वेतन अपर्याप्त है तो उसका संवैधानिक रास्ता है, रिश्वत नहीं।
आय से अधिक संपत्ति की जांच की मांग…
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी तेज है कि पटवारी की संपत्तियां उनकी आय से मेल नहीं खातीं, ऐसे में सवाल उठता है, क्या आय से अधिक संपत्ति की जांच होगी? क्या किसी स्वतंत्र एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराई जाएगी? यह मांग अब सिर्फ आरोप नहीं, बल्कि जनता की अपेक्षा बन चुकी है।
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