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सूरजपुर@ प्रतापपुर व भैयाथान में फसल विविधीकरण का जमीनी जायजा

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कलेक्टर एस. जयवर्धन ने किसानों को किया प्रेरित, गन्ना फसल व डीएमएफ नलकूपों का निरीक्षण
सूरजपुर,28 दिसंबर 2025 (घटती-घटना)।
जिले में टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कलेक्टर एस. जयवर्धन ने शनिवार को प्रतापपुर एवं भैयाथान विकासखंड के विभिन्न गांवों का भ्रमण किया, इस दौरान उन्होंने रबी फसलों की स्थिति का अवलोकन किया और डीएमएफ योजना के अंतर्गत स्थापित नलकूपों का निरीक्षण किया,भ्रमण के दौरान कलेक्टर ने कृषक बंधुओं को फसल विविधीकरण अपनाने के लिए प्रेरित किया, कलेक्टर एस. जयवर्धन का यह भ्रमण स्पष्ट संदेश देता है कि जिले में कृषि को जल-संरक्षण, फसल विविधीकरण और दीर्घकालीन लाभ की दिशा में आगे बढ़ाया जा रहा है, डीएमएफ नलकूपों के प्रभावी उपयोग और वैकल्पिक फसलों को अपनाकर किसान भविष्य की चुनौतियों का बेहतर सामना कर सकते हैं।
दलहन-तिलहन अपनाने से बढ़ेगा लाभ, घटेगा जल संकट…
कलेक्टर ने किसानों से कहा कि घटते भू-जल स्तर को देखते हुए दलहन, तिलहन और अन्य कम पानी वाली फसलों को अपनाना समय की आवश्यकता है, इससे न केवल पानी की बचत होगी, बल्कि खेत की मिट्टी की उर्वरता भी बनी रहेगी और किसानों को बेहतर आर्थिक लाभ मिल सकेगा।
सकलपुर में गन्ने की फसल का निरीक्षण
प्रतापपुर विकासखंड के ग्राम सकलपुर में कलेक्टर ने कृषक मंगलेश्वर के गन्ने के खेत का निरीक्षण किया, उन्होंने गन्ने की फसल, उसकी वृद्धि एवं कटाई की स्थिति का अवलोकन किया। कृषक ने गन्ने की खेती की पूरी प्रक्रिया, लागत और उत्पादन के संबंध में कलेक्टर को विस्तृत जानकारी दी, इसके पश्चात ग्राम सकलपुर के ही कृषक शिवसागर के खेत में डीएमएफ द्वारा प्रदत्त नलकूप का निरीक्षण किया गया और उसके उपयोग व लाभ की जानकारी ली गई।
भैयाथान के ग्राम टइयां में नलकूप से बदली खेती…
कलेक्टर भैयाथान विकासखंड के ग्राम टइयां भी पहुंचे, जहां उन्होंने कृषक सहदेव को डीएमएफ योजना के अंतर्गत उपलब्ध कराए गए नलकूप का निरीक्षण किया, कृषक सहदेव ने बताया कि नलकूप के पानी से वे आलू और सरसों की खेती कर रहे हैं, जिससे उनकी आय में वृद्धि हुई है, उन्होंने कलेक्टर को अपना खेत दिखाते हुए वैकल्पिक फसलों के लाभ भी बताए।
ग्रीष्मकालीन धान से बचने की अपील…
भ्रमण के दौरान कलेक्टर ने किसानों को ग्रीष्मकालीन धान की खेती न करने के लिए प्रेरित किया, उन्होंने कहा कि ग्रीष्मकालीन धान अत्यधिक पानी की मांग करता है, जिससे जल संकट और गहरा होता है, उन्होंने कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि ग्रीष्मकालीन धान का रकबा कम करने के लिए किसानों को जागरूक किया जाए और कम पानी में अधिक उत्पादन देने वाली फसलों को बढ़ावा दिया जाए।


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