यह बैंक है साहब…यहाँ भरोसा नहीं,पहचान चलती है!
10 साल में सबसे ज़्यादा लोन और एनपीए, सवाल शाखा प्रबंधन पर
बैकुंठपुर यूको बैंक: नियम बाहर, नेटवर्क अंदर!
लोन पहचान पर, एनपीए जनता पर!
बैंक है या ब्याज की मंडी? यूको बैंक या अपनों का एटीएम?
नियम-विरुद्ध ऋण का अघोषित अड्डा बना बैकुंठपुर यूको बैंक?
10 साल में सबसे ज़्यादा एनपीए, बैंक के अंदर मैनेजर का राज—बाहर भाई का नेटवर्क!
-रवि सिंह-
बैकुंठपुर,28 दिसंबर 2025 (घटती-घटना)। कोरिया जिले के बैकुंठपुर स्थित यूको बैंक की शाखा इन दिनों बैंकिंग सेवाओं के कारण नहीं, बल्कि नियम-विरुद्ध ऋण वितरण, बढ़ते एनपीए,भाई-भतीजावाद और सूदखोरी के संरक्षण जैसे गंभीर आरोपों को लेकर चर्चा के केंद्र में है,यह मामला कोई नया नहीं है पूर्व में 25 दिसंबर 2025 को इस विषय पर विस्तृत खबर प्रकाशित हो चुकी है,लेकिन उसके बाद भी बैंक प्रबंधन की चुप्पी और प्रशासनिक निष्कि्रयता ने संदेह को और गहरा कर दिया है,अगले अंक में बताएगे दो भाइयो और कारनामे और लोन का घिनोना खेल।
10 साल पुरानी शाखा,सबसे ज़्यादा एनपीए-संयोग या कुप्रबंधन?
बैकुंठपुर यूको बैंक को खुले लगभग 10 वर्ष हो चुके हैं। सूत्रों के अनुसार, इन 10 वर्षों में सबसे अधिक एनपीए वर्तमान बैंक मैनेजर के कार्यकाल में दर्ज हुए हैं, बैंकिंग मानकों के अनुसार,खाते का एनपीए होना सीधे तौर पर शाखा प्रबंधन की लापरवाही,जोखिम आकलन की विफलता और निगरानी तंत्र के ढहने को दर्शाता है,सवाल सीधा है क्या यह केवल अक्षमता है या जानबूझकर आंखें मूंदकर किए गए ऋण वितरण का नतीजा?
मुद्रा लोनःरोजगार के लिए या मौज-मस्ती के लिए?
सूत्रों का दावा है कि शाखा से दिए गए कई मुद्रा लोन का उपयोग व्यवसाय के बजाय निजी खर्च,यात्राओं और विलासिता में किया गया, एक ही व्यक्ति को बार-बार और भारी-भरकम ऋ ण स्वीकृत किए गए, इतने कि अन्य किसी बैंक में ऐसी उदारता दुर्लभ है,स्थानीय व्यापारियों के बीच यह बात आम हो चुकी है कुछ दस्तावेज लाइए और बड़े अमाउंट का लोन ले जाइए।
बैंक के अंदर मैनेजर,बाहर भाई,दोहरी सत्ता का आरोप…
सबसे गंभीर आरोप यह है कि बैंक के अंदर शाखा मैनेजर का प्रभाव चलता है, बैंक के बाहर मैनेजर के भाई का नेटवर्क सक्रिय है सूत्रों के अनुसार,यूको बैंक के आसपास सूदखोरी का धंधा पनप रहा है,जिसे कथित तौर पर भाई का संरक्षण प्राप्त है,जिन लोगों को बैंक से ऋण दिलाने में मदद की जाती है,उनसे बाद में निजी तौर पर ऊँचे ब्याज पर पैसा वसूले जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
रायपुर तक फैले सपने,बैकुंठपुर में साख दांव पर…
सूत्र यह भी बताते हैं कि बैंक मैनेजर और उनके भाई ने रायपुर में क्लब खोलने तक की योजनाएँ एक शहर के व्यापारी के साथ बनाई हैं, कथित तौर पर जिन लोगों से पैसे लिए गए,उन्हें रकम वापस नहीं की गई और वही पैसा बैंकिंग प्रभाव के सहारे आगे घुमाया गया।
स्टाफ भी दबाव और प्रताड़ना का शिकार?
शाखा से जुड़े कुछ कर्मचारियों का कहना है कि नियमों के विरुद्ध काम का दबाव,मौखिक प्रताड़ना,एकतरफा निर्णय जैसी समस्याएँ आम हैं, हालांकि कर्मचारी खुलकर सामने आने से डरते हैं,क्योंकि शाखा की पूरी निर्णय-प्रक्रिया एक व्यक्ति के इर्द-गिर्द सिमटी बताई जा रही है।
पूर्व में प्रकाशित खबर, फिर भी चुप्पी क्यों?
उल्लेखनीय है कि 25 दिसंबर 2025 को इस पूरे प्रकरण को लेकर विस्तृत समाचार प्रकाशित किया जा चुका है,जिसमें नियमविरुद्ध ऋण, मुद्रा लोन गड़बड़ी,बढ़ते एनपीए,और बैंक प्रबंधन की भूमिका पर सवाल उठाए गए थे, इसके बावजूद न तो बैंक प्रबंधन का कोई जवाब आया, न ही रीजनल ऑफिस, रायपुर की ओर से सार्वजनिक कार्रवाई की जानकारी सामने आई।
जांच हुई तो क्या खुलेंगे राज?
स्थानीय सूत्रों का कहना है कि यदि वर्तमान बैंक मैनेजर के कार्यकाल में स्वीकृत ऋ णों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच हो जाए, तो दस्तावेजी खामियाँ, पात्रता मानकों की अनदेखी, जानबूझकर जोखिम भरे ऋण जैसे कई तथ्य सामने आ सकते हैं, यह भी जानकारी मिल रही है कि रीजनल ऑफिस रायपुर तक औपचारिक शिकायत दर्ज कराने की तैयारी चल रही है।
जब बैंक शाखा,बैंक नहीं ‘ब्याज की मंडी’ बन जाए
किसी भी सार्वजनिक बैंक की सबसे बड़ी पूंजी उसका पैसा नहीं, बल्कि जनविश्वास होता है,लेकिन बैकुंठपुर स्थित यूको बैंक शाखा से उठते सवाल यह संकेत दे रहे हैं कि यहाँ बैंकिंग नहीं, मनमानी चल रही है,10 साल पुरानी शाखा, लेकिन सबसे ज़्यादा एनपीए यह आँकड़ा महज़ संयोग नहीं हो सकता,एनपीए सिर्फ खराब किस्मत का परिणाम नहीं होता,वह खराब फैसलों,लचर निगरानी और संदिग्ध नीयत का प्रमाण होता है, सबसे खतरनाक आरोप यह नहीं है कि लोन गलत तरीके से दिए गए,सबसे खतरनाक आरोप यह है कि एक ही व्यक्ति को बार-बार,भारी भरकम लोन दिए गए,और उन पैसों का उपयोग व्यापार के बजाय मौज-मस्ती और निजी खर्चों में हुआ।
बैंक के अंदर एक सत्ता, बाहर दूसरी?
शहर में चर्चा है बैंक के अंदर शाखा मैनेजर चलता है, और बैंक के बाहर उसका भाई,यदि यह चर्चा केवल अफ़वाह होती,तो इतनी शिकायतें,इतनी कहानियाँ और इतना डर कर्मचारियों के बीच नहीं दिखता,सूदखोरी का धंधा अगर बैंक के आसपास पनप रहा है,तो यह केवल कानून-व्यवस्था की विफलता नहीं,बैंकिंग व्यवस्था पर सीधा धब्बा है।
एनपीए सिर्फ नंबर नहीं,चेतावनी होते हैं…
हर एनपीए यह सवाल पूछता है किस आधार पर लोन दिया गया? कौन जि़म्मेदार है? किसने आँखें मूँदी? लेकिन यहाँ सवाल पूछने वाले ही खामोश हैं, रीजनल ऑफिस,आरबीआई और बैंक प्रबंधन की चुप्पी सबसे बड़ा संदेह पैदा करती है।
पहले भी सवाल उठे,फिर भी सन्नाटा क्यों?
यह कोई पहला खुलासा नहीं है, 25 दिसंबर 2025 को भी यही सवाल सार्वजनिक किए गए थे, लेकिन न जवाब आया, न जांच की घोषणा हुई, न किसी तरह की कार्रवाई दिखी, यह चुप्पी बताती है कि मामला केवल एक शाखा तक सीमित नहीं हो सकता।
बड़ा सवाल क्या बैकुंठपुर का यूको बैंक एक सार्वजनिक बैंक है या नियम-विरुद्ध
ऋण वितरण और सूदखोरी का अघोषित केंद्र? यदि समय रहते रीजनल ऑफिस, आरबीआई या उच्च स्तर से जांच नहीं हुई, तो नुकसान केवल बैंक का नहीं होगा आम खाताधारकों के पैसों और सार्वजनिक विश्वास पर भी गहरा आघात लगेगा।
पत्रकारिता मानक सूचना
यह समाचार स्थानीय सूत्रों,शिकायतों एवं उपलब्ध दस्तावेजी जानकारियों पर आधारित है, संबंधित पक्षों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे समान प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
अंतिम सवाल
अगर सार्वजनिक बैंक में भी नियमों की कोई कीमत नहीं, तो आम आदमी किस पर भरोसा करे? अगर आज बैकुंठपुर यूको बैंक में सवालों को दबा दिया गया, तो कल किसी और शहर में यही कहानी दोहराई जाएगी, अब यह सिर्फ बैंक का मामला नहीं, सिस्टम की परीक्षा है।
घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur