- शहर में गूंजते सवाल…आरोपों की परतें और चुप्पी का संदेह…
- बैकुंठपुर यूको बैंक में बड़ा आरोपःब्रांच मैनेजर-भाई का गठजोड़,मुद्रा लोन की आड़ में सूदखोरी…
- चेक बाउंस कराकर ब्लैकमेलिंग के गंभीर आरोप…बैंक की आड़ में अवैध वसूली का नेटवर्क?
- मुद्रा लोन,फर्जीवाड़ा और डर का कारोबार…
- 6 लाख दिए, 4 लाख लौटाए…फिर भी 16 लाख की देनदारी…पीडि़त का दावा…
- मामला पुलिस शिकायत की दहलीज पर बैंक प्रबंधन की चुप्पी सवालों के घेरे में…

-रवि सिंह-
बैकुण्ठपुर,24 दिसम्बर 2025 (घटती-घटना)। बैकुंठपुर स्थित यूको बैंक इन दिनों किसी नई बैंकिंग सुविधा या जनहितकारी योजना के कारण नहीं, बल्कि ब्रांच मैनेजर और उनके कथित भाई के गठजोड़ को लेकर सुर्खियों में है,शहर में चर्चा का विषय यह है कि आनंद और विशाल नाम के दो व्यक्ति लगातार इस बैंक से जुड़े विवादों में सामने आ रहे हैं,लेकिन अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इनमें से वास्तविक ब्रांच मैनेजर कौन है,बल्कि बैंक के ब्रांच मैनेजर और उनके कथित भाई पर लगे ऐसे आरोप हैं, जो अगर सही पाए गए तो न केवल बैंक की छवि, बल्कि पूरे बैंकिंग सिस्टम पर बड़ा सवाल खड़ा कर सकते हैं, शहर में यह सवाल अब खुलकर पूछा जा रहा है आखिर यूको बैंक का वास्तविक ब्रांच मैनेजर कौन है आनंद या विशाल? और क्या दोनों भाइयों का बैंक के भीतर-बाहर एक संगठित आर्थिक गठजोड़ है?
बैंक या सूदखोरी का अड्डा?
बैंक भरोसे की इमारत होते हैं लेकिन जब बैंक का नाम डर,चेक बाउंस और ब्लैकमेलिंग से जुड़ने लगे, तो सवाल सिर्फ एक ब्रांच का नहीं रहता,सवाल पूरे सिस्टम का हो जाता है,बैकुंठपुर में आज लोग यह नहीं पूछ रहे कि यूको बैंक में कौन-सी योजना है? बल्कि पूछ रहे हैं आनंद या विशाल,असली मैनेजर कौन है? और बैंक किसके लिए चल रही है जनता के लिए या दो भाइयों के लिए? अगर आरोप झूठे हैं, तो बैंक प्रबंधन को सामने आकर बोलना चाहिए,अगर आरोप सच हैं,तो चुप्पी सहमति मानी जाएगी,मुद्रा लोन गरीबों के लिए थे उन्हें सूदखोरी की पूंजी बना देना केवल अपराध नहीं,नैतिक पतन है, आज सवाल बैंक मैनेजर पर है,कल सवाल पूरे बैंकिंग सिस्टम पर होगा और तब जवाब देना मुश्किल होगा,अब ज़रूरत है स्वतंत्र ऑडिट की,पीडि़तों की सुरक्षा की और जवाबदेही तय करने की क्योंकि बैंक अगर डर पैदा करने लगे, तो लोकतंत्र सिर्फ कागज़ पर रह जाता है।
दो भाई,एक बैंक और कई आरोप…
सूत्रों के अनुसार,बैंक से जुड़े मामलों में आनंद और विशाल नामक दो व्यक्ति लगातार सामने आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि इनमें से एक बैंक का ब्रांच मैनेजर है,जबकि दूसरा व्यक्ति बैंक के नाम और प्रभाव का उपयोग कर मुद्रा लोन दिलाने,अवैध वसूली और सूदखोरी जैसे कार्यों में सक्रिय है, शहर में आम चर्चा है कि एक भाई बैंक के भीतर पद पर है, दूसरा भाई बैंक के बाहर रहकर ‘एजेंट’ की भूमिका निभा रहा है, दोनों के कथित तालमेल से बैंक की आड़ में एक अघोषित वित्तीय कारोबार चलाया जा रहा है।
मुद्रा लोन बना कथित खेल का आधार…
सूत्रों का दावा है कि बैंक में स्वीकृत कई मुद्रा लोन की प्रक्रिया संदेह के घेरे में है,आरोप है कि जरूरतमंद लोगों को मुद्रा लोन दिलाने का झांसा दिया जाता है, लोन के बदले नकद राशि वसूली जाती है, कई मामलों में फर्जी या अपात्र लोन स्वीकृत कराए गए, लोन की राशि निकलवाकर उसे सूदखोरी के धंधे में लगाया गया, यदि इन मामलों की स्वतंत्र जांच की जाए, तो कई ऐसे लोन सामने आ सकते हैं जो नियमों के विपरीत स्वीकृत हुए हों ऐसा दावा सूत्र कर रहे हैं।
चेक बाउंस और ब्लैकमेलिंग के गंभीर आरोप…
इस पूरे मामले में सबसे गंभीर आरोप चेक बाउंस कराकर ब्लैकमेलिंग से जुड़े हैं, कुछ कथित पीडि़तों का कहना है कि उन्हें ब्याज पर पैसा दिया गया, बदले में उनसे चेक लिए गए,खाते उसी बैंक में खुलवाए गए,बाद में जानबूझकर भारी रकम भरकर चेक बाउंस कराया गया,फिर कानूनी कार्रवाई की धमकी देकर दबाव बनाया गया,एक पीडि़त ने नाम न छापने की शर्त पर बताया की मुझे 6 लाख दिए गए थे। मैं 4 लाख लौटा चुका हूं, लेकिन अब 16 लाख की देनदारी बताकर लगातार मेरा चेक बाउंस कराया जा रहा है। मुझे केस में फंसाने की धमकी दी जा रही है।
बैंक के भीतर ‘सब सेट’ का दावा…
सूत्रों के अनुसार, जिन लोगों से चेक लिए जाते हैं उनके खाते जानबूझकर उसी बैंक शाखा में खुलवाए जाते हैं, यह भरोसा दिया जाता है कि बैंक में हमारा आदमी है, ताकि चेक बाउंस और अन्य प्रक्रियाओं में कोई रुकावट न आए, यदि यह आरोप सही हैं, तो यह केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि संस्थागत दुरुपयोग का मामला बनता है।
बैंक शिफ्टिंग पर भी सवाल
सूत्र यह भी बताते हैं कि बैंक पहले जिस भवन में संचालित हो रही थी, वहां अनुबंध समाप्त होने से पहले ही बैंक को दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया गया, इस शिफ्टिंग को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह निर्णय बैंक के नियमों के अनुसार लिया गया? या फिर इसमें व्यक्तिगत प्रभाव और हित जुड़े थे?
पुलिस तक पहुंच सकती है शिकायत…
शहर में चर्चा है कि अब कई पीडि़तों का सब्र जवाब दे चुका है और आने वाले दिनों में पुलिस में औपचारिक शिकायत, बैंक के उच्च अधिकारियों से लिखित शिकायत और संभवतः जांच एजेंसियों तक मामला पहुंच सकता है, यदि ऐसा होता है, तो यह मामला केवल स्थानीय स्तर पर नहीं, बल्कि क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर तक तूल पकड़ सकता है।
कानूनी स्पष्टीकरण…
यह खबर किसी को दोषी ठहराने का निर्णय नहीं है, बल्कि जांच की मांग है, बैंक जैसी सार्वजनिक संस्था पर लगे ऐसे आरोपों की निष्पक्ष,पारदर्शी और त्वरित जांच न केवल पीडि़तों के लिए, बल्कि बैंकिंग व्यवस्था की विश्वसनीयता के लिए भी आवश्यक है,यह रिपोर्ट आरोपों और आशंकाओं पर आधारित है,संबंधित पक्ष को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर है,जांच एजेंसियों द्वारा पुष्टि के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुँचना उचित होगा
अगले अंक मेंः दस्तावेज़ों की पड़ताल, कथित लेन-देन की कड़ी, और यह विश्लेषण—पूरा खेल कैसे और कब शुरू हुआ?
सवाल जो जवाब मांगते हैं…
सवालः बैकुंठपुर यूको बैंक का वास्तविक ब्रांच मैनेजर कौन हैआनंद या विशाल?
सवालः क्या मुद्रा लोन की स्वतंत्र ऑडिट होगी?
सवालः बैंक प्रबंधन और क्षेत्रीय कार्यालय की जवाबदेही तय कब होगी?
सवालः यदि आरोप निराधार हैं,तो स्पष्टीकरण सार्वजनिक क्यों नहीं? और यदि आरोप सही हैं,तो कार्रवाई में देरी क्यों?
सवालः क्या बैंक प्रबंधन इन आरोपों से अवगत है?
सवालः चेक बाउंस मामलों में बैंक की भूमिका की जांच कौन करेगा?
क्या हैं आरोप? (सूत्रों के हवाले से)
आरोपः मुद्रा लोन के नाम पर अनियमितताओं और फर्जीवाड़े की आशंका
आरोपः लोन दिलाने के बदले नकद वसूली
आरोपः कर्ज लेने वालों से चेक लेकर जानबूझकर बाउंस कराना, फिर कानूनी दबाव बनाना
आरोपः कथित तौर पर सूदखोरी और बैंकिंग व्यवस्था की आड़ में निजी वसूली तंत्र
आरोपः कुछ पीडि़तों का दावाः 6 लाख दिए गए, 4 लाख वापस ले चुका हूँ, फिर भी 16 लाख की देनदारी बताकर चेक बाउंस कराए जा रहे हैं। (यह सभी दावे सूत्रों व कथित पीडि़तों के बयान पर आधारित हैं; स्वतंत्र जांच अभी शेष है।)
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