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कोरिया/सुरजपुर@सुरजपुर के 17 गांवों में बिजली की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल आठवें दिन भी जारी

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आंदोलनकारियों ने मुंडन कर जताया विरोध,बोले…बिजली आए बिना नहीं हटेंगे
-राजन पाण्डेय-
कोरिया/सुरजपुर 22 दिसम्बर 2025 (घटती-घटना)।
कोरिया जिले की सीमा से सटे सुरजपुर जिले के 17 गांवों में बिजली सहित अन्य बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल आठवें दिन भी लगातार जारी है। रसौकी, लुल्ह, खोहिर, मोहली, उमझर, रामगढ़, कच्छवारी, मोहरसोप, बसनारा, जुड़वनिया, बैजनपाठ, दुधनिया, कैलाशनगर, भुसकी, छतरंग, वनगवां, घुइड़ी सहित आसपास के आश्रित ग्रामों में आज तक बिजली नहीं पहुंची है, इसी मांग को लेकर ग्रामीणों ने आंदोलन छेड़ रखा है, आंदोलन के आठवें दिन प्रदर्शनकारियों ने मुंडन कराकर सरकार और प्रशासन के प्रति अपना विरोध दर्ज कराया, आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक नियमित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित नहीं की जाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा,कड़ाके की ठंड में 24 घंटे जारी यह आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर है। सवाल सीधा है क्या प्रशासन ग्रामीणों की बुनियादी मांगों पर संज्ञान लेगा, या यह संघर्ष और लंबा खिंचेगा।
जब तक बिजली नहीं,तब तक आंदोलन
ग्रामीणों ने बताया कि आठ दिन बीतने के बावजूद शासन-प्रशासन का कोई भी प्रतिनिधि मौके पर नहीं पहुंचा है और न ही कोई ठोस आश्वासन मिला है, इसी कारण सर्वसम्मति से मुंडन कर विरोध का निर्णय लिया गया,आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन पूर्णतः गैर-राजनीतिक है और सभी ग्रामवासियों की सहमति से जारी है।
बिन बिजली—सब सून, पढ़ाई से शादियां तक प्रभावित
बिजली के अभाव में गांवों में शिक्षा, संचार और रोज़मर्रा के कामकाज बुरी तरह प्रभावित हैं। सौर ऊर्जा के विकल्प लगाए गए हैं, लेकिन वे अपर्याप्त और खराब स्थिति में हैं, जिससे पर्याप्त बैकअप नहीं मिल पाता, ग्रामीणों का कहना है कि युवाओं की शादियां तक अटक रही हैं, बच्चों की पढ़ाई प्रभावित है और संचार सुविधाएं ठप हैं।
सरकारें बदलीं…हालात नहीं…
ग्रामीणों के अनुसार रसौकी जैसे सीमावर्ती गांवों में न सड़क, न पुल और न बिजली है। पिछली सरकारों में कुछ जगह सड़क निर्माण हुआ, लेकिन वह नाकाफी साबित हुआ। चुनाव पूर्व बिजली पहुंचाने का आश्वासन मिला था, पर 26 गांवों में आज भी बिजली नहीं पहुंची।
विधानसभा क्षेत्र का मामला,उम्मीदें अब भी कायम
ये गांव संबंधित विधानसभा क्षेत्र में आते हैं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि शेष कच्चे मार्गों का पक्कीकरण और सभी गांवों तक बिजली पहुंचेगी, हालांकि, अब तक कोई ठोस पहल न होने से आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
कई संगठनों का समर्थन
आंदोलन को कांग्रेस पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, कुशवाहा एकता मंच और पत्रकार संगठनों का समर्थन मिला है। समर्थन पत्र सौंपकर मांगों के साथ खड़े रहने की बात कही गई है।

आंदोलनकारियों की आवाज
लक्ष्मण जायसवालः आज़ादी के बाद भी बिजली नहीं पहुंची। पढ़ाई, विवाह और संचार—सब प्रभावित है। मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
गजमोचन सिंहः वर्षों से मांग के बावजूद सुनवाई नहीं हुई। अब बिजली आए बिना आंदोलन नहीं रुकेगा।
जितेंद्र साकेतः कई सरकारें आईं-गईं, पर बिजली नहीं आई। अब आर-पार की लड़ाई है।
तुलसी जायसवालः 16 पंचायत और 26 आश्रित ग्राम प्रभावित हैं। कोई प्रतिनिधि बात करने नहीं आया—मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।


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