रायपुर,21 दिसम्बर 2025। छत्तीसगढ़ में एक बार फिर से सरकारी खरीद प्रणाली त्रद्गरू क्कशह्म्ह्लड्डद्य से टेंडर सवालों के घेरे में है। इस बार मामला भारत स्काउट्स एंड गाइड्स के जंबूरी आयोजन से जुड़ा है, जहां 1 सितंबर 2025 को टेंडर को लेकर जारी गाइडलाइन की खुलेआम अनदेखी करते हुए करीब 5 करोड़ रुपये के संभावित घोटाले की पटकथा पहले ही लिख दी गई। सूत्रों के मुताबिक 8 दिसंबर को जंबूरी आयोजन के लिए भूमि पूजन खुद शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव द्वारा किया गया। इसके ठीक दो दिन बाद, 10 दिसंबर को जेम पोर्टल पर टेंडर फ्लोट कर दिया गया। नियमों के मुताबिक टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता और तय समय-सीमा का पालन अनिवार्य होता है, लेकिन इस पूरे मामले में नियम सिर्फ कागज़ों तक सीमित नजर आते हैं। टेंडर की क्लोजिंग 20 दिसंबर की शाम 5ः30 बजे तय थी और इसी दिन टेंडर फाइनल किया जाना था। लेकिन हैरानी की बात यह है कि क्लोजिंग के समय विभाग का कार्यालय बंद मिला। टेंडर से संबंधित जानकारी के लिए जारी किए गए मोबाइल नंबर भी बंद पाए गए। सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह है कि 20 दिसंबर की शाम को टेंडर फाइनल किया गया। मगर बालोद के मालीघोरी मैदान में टेंट लगाने का काम एक सप्ताह पहले ही शुरू हो चुका था। वर्तमान में आधे से ज्यादा काम भी पूरा हो चुका है। दरअसल मालीघोरी मैदान में दर्जनों टैंट गाड़े जा चुके हैं। इसके अलावा अस्थाई आवास को तैयार करने के लिए लगाने वाला सामान भी मैदान में पड़ा हुआ है। यह काम एक रात में तो संभव नहीं है। टीआरपी के पास इससे जुड़े सभी दस्तावेज मौजूद हैं। सवाल उठता है कि जब टेंडर फाइनल ही नहीं हुआ था, तब काम कैसे शुरू हो गया? क्या कंपनी पहले से ही तय कर ली गई थी? बता दें कि मालीघोरी मैदान, बालोद को जंबूरी आयोजन स्थल के रूप में 14 नवंबर 2025 को भारत स्काउट्स एवं गाइड्स के राष्ट्रीय मुख्यालय द्वारा जारी सर्कुलर में घोषित किया गया था।
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