रायपुर,19 दिसम्बर 2025। छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की ताजा ऑडिट रिपोर्ट ने सरकारी तंत्र की पारदर्शिता और कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में गरीबों के सिर पर छत देने के नाम पर न केवल नियमों की अनदेखी की गई, बल्कि सरकारी धन का जमकर बंदरबांट भी हुआ। इस खुलासे के बाद प्रदेश की राजनीति में उबाल आ गया है।
बिना जमीन के ही
बांट दिए 4.5 करोड़
मार्च 2023 तक की अवधि के लिए जारी इस ऑडिट रिपोर्ट में अनियमितताओं की एक लंबी सूची है। सबसे हैरान करने वाला तथ्य यह है कि रायपुर, बिलासपुर और कोरबा जैसे क्षेत्रों में 250 ऐसे हितग्राहियों को आवास का पैसा दे दिया गया, जिनके पास घर बनाने के लिए खुद की जमीन तक उपलब्ध नहीं थी। प्रशासन ने बिना धरातल की जांच किए इन लोगों को लगभग 4.5 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया। यह लापरवाही दर्शाती है कि सत्यापन प्रक्रिया में कितनी बड़ी चूक हुई है।
नियमों की अनदेखीः महिला सशक्तिकरण के निर्देश दरकिनार : केंद्र सरकार के स्पष्ट निर्देश हैं कि पीएम आवास योजना के तहत महिलाओं को प्राथमिकता दी जाए और आवास उनके नाम पर स्वीकृत हों। लेकिन छत्तीसगढ़ में इस नियम को भी ठेंगे पर रखा गया। ष्ट्रत्र रिपोर्ट बताती है कि प्रदेश में केवल 50 फीसदी आवास ही महिलाओं के नाम पर स्वीकृत किए गए। यह केंद्र के दिशा-निर्देशों का सीधा उल्लंघन है और बताता है कि धरातल पर मॉनिटरिंग कितनी कमजोर रही है। रिपोर्ट सार्वजनिक होते ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।भाजपा का प्रहारः कैबिनेट मंत्री केदार कश्यप और श्याम बिहारी जायसवाल ने तत्कालीन कांग्रेस सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि पिछली सरकार ने गरीबों के हक पर डाका डाला है। भ्रष्टाचार के कारण ही असली जरूरतमंद योजना के लाभ से वंचित रह गए।
रसूखदारों ने मारा गरीबों का हकः अपात्रों को मिला लाभ
जांच में पाया गया कि योजना का लाभ उन लोगों तक पहुँचा जो आर्थिक रूप से संपन्न थे। रिपोर्ट के मुताबिक,3 लाख रुपये से अधिक सालाना आय वाले 71 अपात्र लोगों को आवास आवंटित कर दिए गए। इतना ही नहीं,भ्रष्टाचार और चालाकी का आलम यह रहा कि 99 लोगों ने शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों की योजनाओं का दोहरा लाभ उठाया। इनमें से 35 लोग ऐसे थे जो पहले ही किसी अन्य सरकारी आवास योजना का फायदा ले चुके थे, फिर भी उन्हें दोबारा भुगतान किया गया।
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