रायपुर,18 दिसम्बर 2025। छत्तीसगढ़ के खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने प्रदेश के दवा बाजार में सक्रिय जालसाजों और नकली दवाओं के सिंडिकेट के खिलाफ एक निर्णायक जंग छेड़ दी है। विभाग ने संदिग्ध और अवैध रूप से बेची जा रही दवाओं पर कड़ी कार्रवाई करते हुए तीन प्रमुख दवा निर्माता कंपनियों को घेरे में लिया है। इस बड़ी कार्रवाई से न केवल दवाओं के अवैध व्यापार पर अंकुश लगने की उम्मीद है, बल्कि यह उन तत्वों के लिए भी एक कड़ी चेतावनी है जो जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।
गोगांव ट्रांसपोर्ट नगर में संदिग्ध डाक की गुप्त सूचना : कार्रवाई की शुरुआत तब हुई जब विभाग के सतर्कता तंत्र को रायपुर के गोगांव स्थित नागपुर गोल्डन ट्रांसपोर्ट में दवाओं की एक संदिग्ध खेप के बारे में गुप्त सूचना मिली। रिपोर्ट के अनुसार, दवाओं की एक बड़ी डाक वहां कई दिनों से लावारिस पड़ी थी और कोई भी व्यक्ति या फर्म उसे प्राप्त करने का दावा नहीं कर रहा था। इस लावारिस डाक ने विभाग का संदेह गहरा कर दिया कि इसमें नकली या प्रतिबंधित औषधियां हो सकती हैं।
प्रयोगशाला की रिपोर्ट में ‘नकली
और अवमानक’ होने की पुष्टि
जांच दल ने बरामद की गई संदिग्ध दवाओं के नमूने सील किए और उन्हें विस्तृत परीक्षण के लिए कालीबाड़ी, रायपुर स्थित राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशाला भेज दिया। 16 दिसंबर को आई लैब रिपोर्ट ने विभाग के संदेह की पुष्टि कर दी। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि तीनों कंपनियों द्वारा निर्मित दवाएं न केवल ‘अवमानक’ हैं, बल्कि पूरी तरह से ‘नकली’ की श्रेणी में आती हैं। यह स्वास्थ्य सुरक्षा के लिहाज से एक गंभीर अपराध है।
इन तीन कंपनियों के
खिलाफ जारी हुआ अलर्ट
विभाग ने जिन कंपनियों की दवाओं को नकली पाया है, उनमें हिमाचल प्रदेश के सोलन की दो कंपनियां—मेसर्स जी बायोटेक प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स जी.सी हेल्थ केयर शामिल हैं। इसके अलावा, चेन्नई की मेसर्स लार आक्स फार्मास्युटिकल्स की दवाएं भी अवमानक पाई गई हैं। छत्तीसगढ़ प्रशासन ने इन कंपनियों की दवाओं की आपूर्ति श्रृंखला को तोड़ने के लिए अब केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन और राज्य के सभी जिला अधिकारियों को हाई अलर्ट पर रखा है।
आपूर्ति श्रृंखला की गहन जांच और भविष्य की रणनीति
वर्तमान में विभाग इस अवैध कारोबार के वास्तविक स्रोत और मास्टरमाइंड तक पहुँचने के लिए विस्तृत विवेचना कर रहा है। दवाओं के परिवहन रूट, फर्जी बिलिंग और इसमें शामिल संभावित स्थानीय विक्रेताओं की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि वे इस रैकेट की जड़ों तक पहुँचकर ही दम लेंगे ताकि भविष्य में छत्तीसगढ़ की सीमा के भीतर नकली दवाओं का प्रवेश रोका जा सके।
औषधि प्रशासन की त्वरित रेड और निरीक्षण दल का गठन
सूचना की संवेदनशीलता को देखते हुए विभाग ने बिना समय गंवाए ‘औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940’ के प्रावधानों के तहत एक उच्च स्तरीय निरीक्षण दल का गठन किया। जब टीम ने ट्रांसपोर्ट हब पर छापा मारा और इंदौर से भेजी गई बिल्टी व दवाओं की डाक का मिलान किया, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। बिल में जिन दवाओं का नाम दर्ज था, वे डिब्बे के अंदर मौजूद ही नहीं थीं। इसके बजाय, पार्सल में अन्य तीन प्रकार की औषधियां भरी हुई थीं।
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