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कोरिया/एमसीबी@10 दिन बाद मिली गुम जांच फाइल, कलेक्टर ने डीईओ से मांगी जवाबदेही

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  • एकलव्य आवासीय विद्यालय पोड़ीडीह भ्रष्टाचार मामला फिर सुर्खियों में…
  • एकलव्य विद्यालय पोड़ीडीह भ्रष्टाचार की गुम जांच फाइल 10 दिन बाद मिली
  • खबर छपते ही हरकत में प्रशासन, कलेक्टर ने डीईओ से मांगी जवाबदेही
  • 2018-21 के करोड़ों के घोटाले पर वर्षों तक चुप्पी, अब पत्राचार शुरू
  • अगर मीडिया नहीं बोलता,तो क्या फाइल कभी मिलती?

-रवि सिंह-
कोरिया/एमसीबी, 17 दिसंबर 2025 (घटती-घटना)।
एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय पोड़ीडीह (विकासखंड खड़गवां) में वर्ष 2018 से 2021 के बीच हुए करोड़ों रुपये के कथित भ्रष्टाचार से जुड़ी जांच फाइल,जिसे लेकर प्रशासनिक स्तर पर लंबे समय से असमंजस बना हुआ था,आखिरकार दैनिक घटती घटना में खबर प्रकाशित होने के 10 दिन बाद कोरिया जिले के कलेक्टर कार्यालय में मिलने की पुष्टि हुई है,गौरतलब है कि 6 दिसंबर 2025 को दैनिक घटती घटना ने यह खबर प्रमुखता से प्रकाशित की थी कि एकलव्य विद्यालय पोड़ीडीह के भ्रष्टाचार की जांच से संबंधित महत्वपूर्ण फाइल गुम है और वर्षों से उस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पा रही है।
बता दे की एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय पोड़ीडीह (विकासखंड खड़गवां) में वर्ष 2018 से 2021 के बीच हुए करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार से जुड़ी जांच फाइल, जो लंबे समय से ‘गुम’ बताई जा रही थी, आखिरकार दैनिक घटती घटना में खबर प्रकाशित होने के 10 दिन बाद कलेक्टर कार्यालय कोरिया में मिलने की पुष्टि हुई है, खबर प्रकाशित होने के बाद प्रशासन हरकत में आया और 15 दिसंबर 2025 को कलेक्टर (आदिवासी विकास) कोरिया द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी कोरिया एवं मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर को पत्र जारी कर यह पूछा गया कि जांच पूरी होने के बावजूद अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई, पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि एकलव्य विद्यालय पोड़ीडीह में 2017-18 से 2021-22 तक पदस्थ रहे प्राचार्य/प्रभारी प्राचार्य एवं छात्रावास अधीक्षक के कार्यकाल की जानकारी तत्काल उपलब्ध कराई जाए।

फाइल गुम नहीं थी,इच्छाशक्ति गुम थी…
एकलव्य आवासीय विद्यालय पोड़ीडीह का मामला यह साबित करता है कि जब तक मीडिया सवाल नहीं करता,तब तक सिस्टम सोता रहता है,जांच हो चुकी थी,भ्रष्टाचार की पुष्टि हो चुकी थी,फिर भी वर्षों तक कार्रवाई नहीं हुई, सवाल यह नहीं कि फाइल कहां थी सवाल यह है कि कार्रवाई क्यों नहीं थी? क्या यह महज लापरवाही थी? या फिर जानबूझकर आदिवासी बच्चों के हक को दबाया गया? कोरोना काल में जब स्कूल और छात्रावास बंद थे, तब भी खरीदी कैसे हुई? और अगर यह सब जांच में साबित हुआ,तो दोषियों पर कार्रवाई क्यों नहीं? अब जब फाइल ‘मिल गई’ है, तो उम्मीद नहीं जवाबदेही तय होनी चाहिए।
खबर के बाद हरकत में आया प्रशासन
खबर प्रकाशित होने के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हुई और अंततः यह फाइल कलेक्टर कार्यालय, कोरिया में मिलने की जानकारी सामने आई, फाइल मिलने के बाद 15 दिसंबर 2025 को कलेक्टर (आदिवासी विकास) कोरिया की ओर से पहला आधिकारिक पत्र जारी किया गया,इस पत्र में जिला शिक्षा अधिकारी, कोरिया एवं जिला शिक्षा अधिकारी, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर से यह स्पष्ट जानकारी मांगी गई है कि एकलव्य आवासीय विद्यालय पोड़ीडीह में वर्ष 2017-18 से 2021-22 की अवधि में पदस्थ रहे प्राचार्य/प्रभारी प्राचार्य एवं छात्रावास अधीक्षक के विरुद्ध भ्रष्टाचार की जांच होने के बाद भी अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
पत्र में क्या कहा गया है?
कलेक्टर कार्यालय द्वारा जारी पत्र में साफ तौर पर कहा गया है कि शिकायत एवं जांच पहले ही हो चुकी है, जांच में अनियमितताओं की पुष्टि भी सामने आई थी, इसके बावजूद संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध किसी भी प्रकार की विभागीय या दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई, अब तत्काल यह जानकारी उपलब्ध कराई जाए कि, जिम्मेदार अधिकारी कौन थे,किस स्तर पर कार्रवाई रुकी, फाइल किसके पास और क्यों लंबित रही
सबसे बड़ा सवालः फाइल गुम कैसे हुई?
इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा और गंभीर सवाल यही है कि इतनी गंभीर जांच फाइल वर्षों तक कहां थी? क्या जानबूझकर फाइल को दबाया गया? क्या प्रभावशाली अधिकारियों या राजनीतिक संरक्षण के चलते कार्रवाई रोकी गई? और सबसे अहम अगर मीडिया में खबर नहीं छपती, तो क्या यह फाइल कभी सामने आती?
आदिवासी बच्चों के हक से जुड़ा मामला
यह मामला केवल कागजी भ्रष्टाचार तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे सीधे तौर पर आदिवासी बच्चों के शिक्षा, भोजन, आवास और भविष्य का अधिकार जुड़ा हुआ है,कोरोना काल में विद्यालय बंद रहने के बावजूद करोड़ों की खरीदी, निर्माण और व्यय को लेकर पहले ही सवाल उठ चुके हैं।
अब नजर कार्रवाई पर…
अब जबकि फाइल मिल चुकी है और कलेक्टर ने आधिकारिक रूप से जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, सवाल यह है कि क्या इस बार केवल पत्राचार तक मामला सीमित रहेगा? या वास्तव में दोषियों पर कार्रवाई होगी? क्या वर्षों से प्रतीक्षा कर रहे आदिवासी बच्चों को न्याय मिलेगा? दैनिक घटती घटना इस पूरे मामले पर अपनी नजर बनाए रखेगा,जांच हुई, पुष्टि हुई फिर कार्रवाई क्यों नहीं?
खबर ने खोली अलमारी,फाइल निकली बाहर
दैनिक घटती-घटना में 6 दिसंबर को खबर छपने के बाद ही वर्षों से ‘गुम’ बताई जा रही जांच फाइल कलेक्टर कार्यालय में मिलने की पुष्टि हुई, जांच में भ्रष्टाचार की पुष्टि के बावजूद न प्राचार्य पर कार्रवाई, न जिम्मेदार अफसरों पर कोई दंड आखिर किसके संरक्षण में रुकी फाइल?
आदिवासी बच्चों के हक पर चुप्पी क्यों?
यह केवल फाइल नहीं,बल्कि आदिवासी बच्चों के भोजन, शिक्षा और भविष्य से जुड़ा मामला है फिर भी वर्षों तक अनदेखी क्यों?

एकलव्य आवासीय विद्यालय पोड़ीडीह, 2017–18 से 2021–22 व जिम्मेदारी बनाम कार्यकाल:-
1. सुश्री बी. बड़ा
पद:
विकासखंड शिक्षा अधिकारी (प्रभारी प्राचार्य) 
कार्यकाल: मार्च 2017 – 10.12.2019
जिम्मेदारी: प्रारंभिक वर्षों की बड़ी खरीदी, क्रय प्रक्रिया व स्टॉक संधारण
स्थिति: क्रय समिति रिकॉर्ड नहीं स्टॉक पंजी अपूर्ण
2. श्री शैलेन्द्र कुमार मिश्रा
पद: प्रभारी प्राचार्य
कार्यकाल: 10.12.2019 – 10.02.2021
जिम्मेदारी: सर्वाधिक व्यय इसी अवधि में, भुगतान अनुमोदन
स्थिति: एक भी क्रय समिति बैठक नहीं सामग्री भौतिक सत्यापन में अनुपस्थित घोटाले का मुख्य कालखंड
3. श्री ललित शुक्ला
पद: सहायक आयुक्त (प्रभारी प्राचार्य)
कार्यकाल: 10.02.2021 – 18.03.2021
जिम्मेदारी: प्रभार ग्रहण के समय सुधार
स्थिति: अव्यवस्था यथावत
4. श्री द्वारिका प्रसाद मिश्रा
पद: विकासखंड शिक्षा अधिकारी (प्रभारी प्राचार्य)
कार्यकाल: 18.03.2021 – 12.11.2021
जिम्मेदारी: क्रय पंजी पर हस्ताक्षर
स्थिति: बिना बैठक हस्ताक्षर स्वीकार प्रक्रियात्मक उल्लंघन स्वीकार
5. श्री भागवत सिंह
पद: प्राचार्य
कार्यकाल: 12.11.2021 – वर्तमान
जिम्मेदारी: जांच के समय पदस्थ
स्थिति: दस्तावेज़ उपलब्ध कराए, पूर्व कार्यकाल की गड़बड़ियाँ उजागर
छात्रावास स्तर
6. श्री रामकुमार खुटे
पद: अधीक्षक
कार्यकाल: 03.06.2019 – 18.03.2021
मुद्दा: निजी वाहन पर सरकारी भत्ता
7. श्रीमती रजनी तिग्गा
पद: बालिका छात्रावास अधीक्षिका
स्थिति: क्रय समिति/सत्यापन की जानकारी नहीं
8. श्री रामप्रसाद सिंह
पद: बालक छात्रावास अधीक्षक
स्थिति: निरीक्षण में सामग्री गायब

संभावित जिम्मेदारियां
तत्कालीन प्राचार्य / प्रभारी प्राचार्य, छात्रावास अधीक्षक, जिला शिक्षा अधिकारी (तत्कालीन),आदिवासी विकास विभाग,जांच रिपोर्ट को लंबित रखने वाले अधिकारी
सबसे संवेदनशील प्रश्न
अगर जांच पूरी थी, तो कार्रवाई किसने रोकी?
फाइल वर्षों तक किस अधिकारी के पास थी?
क्या आदिवासी विकास विभाग और शिक्षा विभाग के बीच तालमेल की कमी थी?
या फिर यह संरक्षण आधारित चुप्पी थी?
क्या मीडिया दबाव न होता तो आज भी फाइल गुम रहती?
खबर छपी तो फाइल मिली,वरना आदिवासी बच्चों का हक दबा ही रहता”


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