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कोरिया सोनहत@ 46 करोड़ की स्वीकृत सड़कें ठंडे बस्ते में

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  • रामगढ़-कोटाडोल और चकडंड-ढूम्माडांड मार्ग पर निर्माण न शुरू होने पर बड़ा आंदोलनःगुलाब कमरो
  • बिना नोटिस मकान तोड़े, सड़कें नहीं बनी…अब संघर्ष के अलावा विकल्प नहींःपूर्व विधायक
  • सरकार बदलते ही स्वीकृत सड़कें गायब? क्या 46 करोड़ की परियोजनाएं राजनीति का शिकार बन गईं…
  • रामगढ़-कोटाडोल मार्ग से दर्जनों गांवों को राहत मिलती पर विभाग की चुप्पी से ग्रामीण आग बबूला
  • चकडंड-ढूम्माडांड सड़क भी ठहरी…मतदान बहिष्कार के बाद दिया गया वादा आज तक अधूरा

-राजन पाण्डेय-
कोरिया सोनहत,08 दिसंबर 2025 (घटती-घटना)।
भरतपुर-सोनहत क्षेत्र के पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने रविवार को सोनहत ब्लॉक के कई ग्राम पंचायतों का दौरा किया। चकडंड से लेकर रामगढ़ तक ग्रामीणों ने उनसे अपनी समस्याएँ साझा की जिनमें बिना सूचना बुलडोजर कार्रवाई,धान का रकबा काटना, खसरा नंबर में त्रुटियां,और सबसे बड़ी समस्या वर्षों से लंबित सड़क निर्माण शामिल थी। चकडंड पहुँचने पर भारी संख्या में ग्रामीण एकत्र हुए। महिलाओं ने खुलकर कहा जब आप विधायक थे तब घर सुरक्षित थे… बाद में बिना नोटिस सब तोड़ दिया गया। हमारी सुनने वाला अब कोई नहीं, पूर्व विधायक ने सभी शिकायतों को गंभीरता से सुना और कहा कि ग्रामीणों के अधिकारों की रक्षा के लिए बड़ा आंदोलन आवश्यक है।
6 करोड़ की सड़कें…स्वीकृति के बाद भी क्यों नहीं शुरू हुआ काम?
पूर्व विधायक कमरो ने बताया कि,रामगढ़-कोटाडोल सड़क (27.20 किमी),स्वीकृत राशिः 46.95 करोड़,प्रशासकीय स्वीकृति जारीः 22 सितंबर 2023,स्वीकृति पूर्ववर्ती सरकार के द्वितीय अनुपूरक बजट (2022-23) में उन्होंने कहा कि यह मार्ग क्षेत्रीय जनता की जीवन रेखा है, सड़क बनने से रामगढ़, कोटाडोल, देवसिल,कटवार,रौंख,मसर्रा, सोनवाही,नटवाही,चुलादार,कुहूकपुर,मनियारी,बडेरा,बड़गांव कला/खुर्द सहित दर्जनों गांवों को सीधी सुविधा मिलती, लेकिन सरकार बदलने के बाद निर्माण कार्य ठहर गया, पीडब्ल्यूडी सचिव को पत्र भेजने के बावजूद, विभाग की ओर से आज तक कोई पहल नहीं हुई, कमरो ने कहा जनता की तकलीफ़ को देखते हुए अब बड़ा आंदोलन ही विकल्प है, ताकि बात शासन तक पहुँचे।
चकडंड-ढूम्माडांड सड़कः मतदान बहिष्कार के बावजूद अब तक शुरू नहीं
जिला पंचायत सदस्य सुरेश सिंह ने बताया कि चकडंड-ढूम्माडांड सड़क पर्यावरण एवं अधोसंरचना मद से स्वीकृत थी, यह वही सड़क है जिसके लिए ग्रामीणों ने मतदान का बहिष्कार किया था। आश्वासन के बाद बहिष्कार समाप्त हुआ, परंतु 2 साल में भी काम शुरू नहीं हुआ।
क्या राजनीति का शिकार हो गई 46 करोड़ की सड़क?
ग्रामीणों के बीच चर्चा है क्या इसलिए काम नहीं हो रहा क्योंकि इसे कांग्रेस सरकार ने स्वीकृत किया था? क्या भाजपा सरकार पिछली सरकार की योजनाओं को आगे नहीं बढ़ा रही? आखिर इतने बड़े इलाके की आवाज़ अनसुनी क्यों? पूर्व विधायक के शब्दों में सड़कें जनता के लिए होती हैं, किसी दल के लिए नहीं। निर्माण न होना सीधे-सीधे जनता के हितों पर चोट है।
क्षेत्र की असलियत…सड़क की हालत बदत्तर
रामगढ़-कोटाडोल सड़क पर चारपहिया वाहन का निकलना कठिन, बारिश में रास्ता दलदल, 108 और 102 एंबुलेंस सेवाएं मुश्किल,आपातकाल में मरीजों को भारी परेशानी, ग्रामीणों ने कहा सड़क बनने से स्वास्थ्य, शिक्षा, बाजार सबकी दूरी कम हो जाती। लेकिन राजनीतिक खींचतान में विकास रुक गया।
रामगढ़ में जनसंपर्क
पूर्व विधायक ने रामगढ़ व आसपास के गांवों का भ्रमण किया, बाजार में लोगों से मुलाकात की और विस्तृत समस्याएं सुनीं, दौरे में जिला पंचायत सदस्य सुरेश सिंह, यूथ कांग्रेस अध्यक्ष प्रकाश चंद्र साहू, सांसद प्रतिनिधि वीरेंद्र साहू और अविनाश पाठक भी मौजूद रहे।


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