
अनुमति मिलते ही भालुओं की जंगल वापसी तय
मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के निर्देश पर भालुओं को पकड़ने का ख़ाका तैयार
मनेंद्रगढ़,02 दिसंबर 2025 (घटती-घटना)। वन मंडल के रिहायशी इलाकों में उत्पाती भालुओं के आतंक के कारण पैदा हुई गंभीर स्थिति पर अब उच्च स्तरीय प्रशासनिक कार्रवाई शुरू हो गई है। छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्याम बिहारी जायसवालके सीधे निर्देश पर, वन विभाग ने एक मादा भालू और उसके दो शावकों को पकड़ने के लिए ‘ऑपरेशन ट्रैंम्लिाइज’ का खाका तैयार कर लिया है, वनमंडल अधिकारी मनेंद्रगढ़, मनीष कश्यप ने इस मानव-वन्यजीव संघर्ष को खत्म करने के लिए प्रधान मुख्य वन संरक्षक को एक आपात पत्र लिखकर तुरंत भालुओं को बेहोश कर पकड़ने की अनुमति मांगी है।
डीएफओ का ‘रेड अलर्ट’: हमलावर हो रहे भालू
डीएफओ मनीष कश्यप द्वारा 2 दिसंबर को पीसीसीएफ को जारी किए गए आधिकारिक पत्र ने क्षेत्र में व्याप्त खतरे की भयावह तस्वीर पेश की है भोजन की घुसपैठ मनेंद्रगढ़ परिक्षेत्र में भालू रिहायशी इलाकों में भोजन की तलाश में घुसकर लोगों के घरों तक व कालोनी की सड़कों तक में विचरण कर रहे है,दहशत मादा भालू और उसके शावक प्रतिदिन सुबह 3 बजे तक लोगों के घरों के आसपास घूमते हैं,जिससे ग्रामीण लगातार भयभीत और जागते रहते हैं,खतरनाक व्यवहार डीएफओ कश्यप ने आगाह किया है कि खराब मौसम और बारिश के कारण ये भालू नर्वस हो गए हैं और हमलावर व्यवहार दिखा रहे हैं, जिससे मानव जीवन और संपत्ति को गंभीर खतरा पैदा हो गया है। मंत्री का निर्देश, डीएफओ की तत्परता वनमंडल अधिकारी मनीष कश्यप ने इस समस्या के त्वरित समाधान के लिए पीसीसीएफ को भेजे गए पत्र में स्पष्ट किया है कि भालुओं को सुरक्षित पकड़ने के लिए ट्रैंम्लिाइजर टीम की आवश्यकता है। यह कदम मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के संज्ञान और निर्देश पर उठाया गया है, जो इस समस्या के प्रति सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाता है।
अनुमति का उद्देश्य
पत्र में स्पष्ट रूप से मादा भालू और उसके 02 शावकों को पकड़ने के लिए टैक्विलाइज करने की अनुमति मांगी गई है।
अगला चरण
पीसीसीएफ की मंजूरी मिलते ही, भालुओं को सुरक्षित पकड़ा जाएगा और उन्हें सुरक्षित घने जंगल में छोड़ा जाएगा ताकि मानव-वन्यजीव संघर्ष समाप्त हो सके, डीएफओ मनीष कश्यप ने इस ऑपरेशन की सूचना मुख्य वन संरक्षक, सरगुजा वृत और संभागीय अधिकारी (एकीकृत रेड), सरगुजा को भी दी है, जिससे समन्वय सुनिश्चित किया जा सके। मनेंद्रगढ़ के भयभीत ग्रामीणों को अब उम्मीद है कि डीएफओ की यह तत्परता जल्द ही उन्हें इस आतंक से मुक्ति दिलाएगी।
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