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एमसीबी@ एमसीबी प्रशासन का पहला बयान सही या दूसरा?

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  • पूर्व विधायक गुलाब कमरों का तीखा सवाल
  • एसआईआर प्रक्रिया में ईपिक मैपिंग त्रुटि पर पूर्व विधायक का आरोप…मेरी जानकारी को ही भ्रामक बताया गया…
  • प्रशासन ने माना ईपिक नंबर तकनीकी खामी से धरमजयगढ़ (भाग-169) में दिखा…बाद में ठीक किया…
  • गलती प्रशासन की, लेकिन भ्रामक मैं कैसे?’ गुलाब कमरों ने प्रेस नोट जारी कर उठाए सवाल…
  • मतदाता सूची की शुचिता पर बड़ा मुद्दा…पूर्व विधायक का यह हाल, तो आम मतदाता कैसे बचेंगे?

-राजन पाण्डेय-
एमसीबी, 30 नवंबर 2025 (घटती-घटना)।
एमसीबी जिला प्रशासन का पहला बयान और दूसरा बयान दोनों में अंतर ने पूरे मामले को विवादास्पद बना दिया है, जब प्रशासन स्वयं गलती स्वीकार कर चुका है, तो पूर्व विधायक के सत्य बयान को भ्रामक बताने का ठोस आधार नजर नहीं आता,यह प्रकरण सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं,बल्कि पूरे जिले के मतदाता अधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला है जिस पर प्रशासन को स्पष्ट, तथ्यात्मक और जवाबदेह बयान देना होगा।
मतदाता सूची में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान हुई तकनीकी त्रुटि ने एमसीबी जिले की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है, पूर्व विधायक गुलाब कमरों (भरतपुर-सोनहत) ने जिला प्रशासन से साफ सवाल किया है जब प्रशासन खुद गलती स्वीकार कर रहा है, तो मेरे बयान को भ्रामक किस आधार पर कहा जा रहा है? पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब पूर्व विधायक ने सोशल मीडिया पर पोस्ट डालकर बताया कि एसआईआर फॉर्म भरते समय उनका ईपिक नंबर धरमजयगढ़ के भाग संख्या 169 में मैपिंग दिखा रहा था,उन्होंने इसे गंभीर त्रुटि बताते हुए कहा था कि यदि एक पूर्व विधायक का रिकॉर्ड गलत जा रहा है, तो आम मतदाताओं का क्या होगा? उन्होंने साथ ही राहुल गांधी के वोट चोर-गद्दी चोर अभियान का हवाला देते हुए मतदाताओं को सतर्क रहने की अपील भी की थी,लेकिन पोस्ट के बाद कुछ यूट्यूब चैनलों और समाचारों में दावा किया गया कि पूर्व विधायक की बात गलत और भ्रामक है।
प्रशासन ने खुद की गलती मान ली…
प्रशासन द्वारा जारी खंडन में दावा किया गया कि पूर्व विधायक का बयान भ्रामक है, लेकिन इसी खंडन में प्रशासन ने यह भी स्वीकार किया कि तकनीकी त्रुटि के कारण पूर्व विधायक का पुराना ईपिक विवरण धरमजयगढ़ भाग-169 में मैपिंग दिखा रहा था,यह गलती पूर्व विधायक द्वारा 20 नवंबर को स्क्रीनशॉट भेजने पर सामने आई, 21 नवंबर को कलेक्टर ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को तकनीकी समाधान का पत्र भेजा, 26 नवंबर को ईसीआई ने बीएलओ ऐप में अन-मैपिंग सुविधा उपलब्ध कराई, उसी दिन उनका रिकॉर्ड वापस मनेन्द्रगढ़ विधानसभा (भाग 94, भलौर, क्रमांक 767) में सही कर दिया गया अर्थात प्रशासन ने गलती भी मानी और उसे सुधारा भी।
पूर्व विधायक का सवाल…फिर भ्रामक क्या?
गुलाब कमरों ने अब प्रेस नोट जारी करके पूछा है जब तकनीकी गलती प्रशासन की थी,जब उसे आपने ही सुधारा,तो फिर मेरा बयान भ्रामक कैसे हुआ? उन्होंने अपने बयान में कहा मैंने वही बताया जो मेरे सामने एसआईआर के दौरान दिख रहा था,मैंने जनता को जागरूक किया,यदि मैं आवेदन न देता तो मेरा नाम सही स्थान पर वापस नहीं जुड़ता,पूर्व विधायक ने यह भी पूछा क्या गलती करने वाले कर्मचारी/अधिकारी पर कोई कार्रवाई हुई? क्या कोई नोटिस जारी किया गया? यदि त्रुटि मान ली गई है, तो गलत सूचना फैलाने का ठप्पा क्यों?
बड़ा सवाल
यदि पूर्व विधायक का रिकॉर्ड गलत हो सकता है,तो आम मतदाता का क्या? गुलाब कमरों ने कहा कि मतदाता सूची की शुचिता लोकतंत्र की बुनियाद है,त्रुटि बताने वाले को दोषी बताना सबसे गलत परंपरा है, उन्होंने नागरिकों से अपील की एसआईआर फॉर्म अवश्य भरें,अपनी एंट्री की जांच करें,क्योंकि गलतियां प्रशासन से भी होती हैं।


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