- भरतपुर सोनहत के पूर्व विधायक गुलाब कमरो का नाम मतदाता सूची से कटा धरमजयगढ़ में हो गई मैपिंग,कांग्रेस प्रभारी सचिन पायलट ने की प्रेस कॉन्फ्रेंस
- विधायक गुलाब कमरो ने इसे गम्भीर लापरवाही बताते हुए,मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को लिखा पत्र
- कांग्रेस प्रभारी सचिन पायलट और नेता प्रतिपक्ष डॉ चरणदास महंत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर एस आई आर में गंभीर लापरवाही का लगाया आरोप
- छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने सोशल मीडिया हैंडल के जरिये बनाया बड़ा मुद्दा



-राजन पाण्डेय-
एमसीबी, 28 नवंबर 2025 (घटती-घटना)। भरतपुर-सोनहत के पूर्व विधायक गुलाब कमरो का नाम मतदाता सूची से कटकर किसी दूसरे जिले धरमजयगढ़ में पहुँच जाना कोई छोटी बात नहीं है, यह सिर्फ एक तकनीकी गलती नहीं, बल्कि निर्वाचन प्रणाली में गहराई तक घुसी एक खतरनाक लापरवाही का प्रमाण है, और सबसे बड़ा प्रश्न यह क्या यह सिर्फ एक नाम का मामला है,या पूरी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर खड़ा हुआ महा चुनौतीपूर्ण प्रश्न? बता दे की एसआईआर प्रक्रिया के दौरान भरतपुर सोनहत विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक गुलाब कमरो का नाम मतदाता सूची से कटने की खबर कांग्रेस सोशल मीडिया हैंडल से वायरल है। इस खबर के वायरल होते ही लोग आश्चर्य चकित है और एस आई आर प्रक्रिया एक बार फिर सवालों के घेरे में हैं। खबर है कि गुलाब कमरो का नाम 2003 के सूची में भलोर बूथ क्रमांक 94 पर दर्ज है बावजूद इसके उनकी मैपिंग भरतपुर सोनहत विधानसभा के बूथ में न कर धरमजयगढ़ जिला रायगढ़ में हो गई है और गृह ग्राम के बूथ में नाम शो नही हो रहा है।
जब तीन बार विधायक रहे व्यक्ति का नाम ही ‘शिफ्ट’ हो जाए तो आम मतदाता किस भरोसे वोट डाले?
गुलाब कमरो वह व्यक्ति हैं जो तीन बार चुनाव लड़ चुके,जिनकी राजनीतिक पहचान मजबूत है,जिनका नाम आज भी उनके गृह ग्राम साल्ही की सूची में दर्ज होना चाहिए,लेकिन एसआईआर प्रक्रिया के दौरान सामने आया संदेश धरमजयगढ़ के बीएलओ ने मैपिंग की पुष्टि कर दी है मतलब साफ है की जिस विधानसभा में व्यक्ति पैदा हुआ, बड़ा हुआ, राजनीति की,चुनाव लड़ा,उसका नाम किसी दूसरे जिले में दर्ज कर दिया गया,यह गलती नहीं यह सिस्टम में बैठी लापरवाही और जवाबदेही की कमी का भयानक उदाहरण है।
सवाल नंबर 1: यह एक गलती है या एक पैटर्न?
जब सचिन पायलट प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहते हैं कि जब विधायक का नाम कट सकता है तो आदिवासी और आम नागरिकों का क्या होगा? तो यह सिर्फ राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि जमीनी सच्चाई है,क्योंकि हजारों लोग एसआईआर में लटक रहे हैं,बीएलओ से लेकर निर्वाचन कार्यालय तक जवाब नहीं दे रहे,लोग फॉर्म जमा कर रहे हैं, सिस्टम ‘एरर’ दे रहा है, नाम कट रहे हैं,पर जवाबदेही तय करने वाला कोई नहीं यह लोकतंत्र के स्वास्थ्य के लिए चेतावनी है।
सवाल नंबर 2: चुनाव आयोग चुप क्यों?
जब कांग्रेस पूछती है कि निर्वाचन आयोग से सवाल पूछो तो जवाब भाजपा के प्रवक्ता देते हैंज्तो इससे आयोग की निष्पक्षता पर प्रश्नचिन्ह स्वाभाविक रूप से खड़ा होता है,मतदाता सूची किस पार्टी की संपत्ति नहीं,एक राष्ट्र्रीय संवैधानिक दस्तावेज है,और जब इसकी अद्यतन प्रक्रिया में ऐसे गंभीर ‘मिसमैपिंग’ सामने आए,तो चुप्पी किसी भी तरह स्वीकार्य नहीं।
सवाल नंबर 3: क्या लोकतंत्र मतदाता के खिलाफ खड़ा हो रहा है?
राहुल गांधी की यह बात आज बिल्कुल सटीक लग रही है लोकतंत्र की मजबूती मतदाता के नाम से होती है, अगर वही नाम गलत जिले में पहुँच जाए, बूथ से गायब हो जाए, ऑनलाइन दर्ज न हो पाए, सुधार के लिए महीनों दौड़ लगानी पड़े तो यह लोकतंत्र की मजबूती नहीं, लोकतंत्र की अस्थिरता का संकेत है।
मुख्य मुद्दा: यह गलती नहीं—प्रक्रिया की विफलता है…
पूर्व विधायक ने साफ कहा अगर मेरे साथ ऐसा हो सकता है, तो जनता का क्या होगा? यही सबसे बड़ा सवाल है, आज एक प्रतिनिधि परेशान है, कल हजारों मतदाता बूथों पर खड़े होंगे और पाएंगे कि उनका नाम लिस्ट में है ही नहीं यह लोकतांत्रिक अधिकार का सीधा हनन है।
अब जरूरत समाधान की,न कि सफाई की…
चुनाव आयोग को चाहिए पूरे प्रदेश में एसआईआर प्र्रक्रिया की समीक्षा करे, हर विधानसभा में ‘मिसमैच ऑडिट’ कराए,गलत मैपिंग करने वाले कर्मियों पर तत्काल कार्रवाई,15 दिन का विशेष सुधार अभियान जारी हो, नागरिकों को स्रूस्/सूचना देकर नाम पुष्टि की सुविधा मिले,क्योंकि अगर मतदाता सूची ही संदिग्ध होगी,तो चुनाव परिणामों पर सवाल खड़े होना तय है।
मतदान का अधिकार पवित्र है,और जब पवित्रता खतरे में हो, तो आवाज उठाना कर्तव्य है…
गुलाब कमरो का मामला एक चिंगारी है जो पूरे सिस्टम में छिपी खामियों की आग को दिखा रहा है, आज एक नाम गायब हुआ है, कल यह संख्या हजारों–लाखों में भी हो सकती है, अब फैसला आयोग को लेना है क्या वह इस गलती को सुधार बनाएगा, या इसे लोकतंत्र की नई आदत बनने देगा?
इस मामले पर इनके विचार…
जब मेरा नाम ही दूसरे जिले में मैप कर दिया गयाज् सोचिए आम मतदाताओं के साथ क्या हो रहा होगा? यह गलती नहीं, चुनावी व्यवस्था की गंभीर लापरवाही है, एसआईआर प्रक्रिया मतदाता सूची को सुव्यवस्थित करने के लिए है, लेकिन यहां नाम काटने और परेशान करने का माध्यम बनती जा रही है।
गुलाब कमरो,पूर्व विधायक
जब पूर्व विधायक का नाम ही कट जाए, तो आदिवासी और आम नागरिकों के नाम कितने सुरक्षित हैं—यह बड़ा सवाल है,नाम काटे जा रहे हैंज् नाम गायब किए जा रहे हैंज्और यह सब ‘तकनीकी त्रुटि’ कहकर खारिज किया जा रहा है—यह स्वीकार्य नहीं।
सचिन पायलट,प्रभारी, छत्तीसगढ़ कांग्रेस
मतदाता सूची से नाम हटाना कोई तकनीकी गलती नहीं,यह निर्वाचन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल है।
डॉ. चरण दास महंत,नेता प्रतिपक्ष
एसआईआर प्रक्रिया का उद्देश्य सुधार है, लेकिन छत्तीसगढ़ में यह भ्रम और अव्यवस्था का प्रतीक बन चुकी है।
छत्तीसगढ़ कांग्रेस मीडिया सेल
राहुल गांधी की बात सही साबित हो रही है लोकतंत्र मतदाता के नाम से मजबूत होता है।
छत्तीसगढ़ कांग्रेस
मतदाता सूची अगर संदिग्ध होगी, तो चुनाव परिणामों की विश्वसनीयता भी संदिग्ध होगी।
दैनिक घटती-घटना रवि सिंह
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