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कोरिया@ जिला खनिज न्यास का‘अमर लिपिक’

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जिला खनिज न्यास शाखा का लिपिक वर्षों से एक ही कुर्सी पर जमे
क्या ‘फेविकोल मॉडल’ पर चल रहा है सिस्टम?
संपत्ति, संरक्षण,पुरानी भर्ती और चोरी प्रकरण पर उठ रहे गंभीर सवाल
-रवि सिंह-
कोरिया,26 नवंबर 2025 (घटती-घटना)।
जिला खनिज न्यास शाखा में वर्षों से एक ही कुर्सी पर जमे लिपिक टेकचंद साहू को लेकर बड़े आरोप और गहरी चर्चाएँ सामने आ रही हैं, स्थानीय लोगों और विभागीय सूत्रों के अनुसार, लिपिक की लंबे समय से एक ही जगह जमे रहने को लेकर सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ संयोग है या किसी अदृश्य संरक्षण की वजह?
एक लिपिक, एक कुर्सी… और पूरा तंत्र? कोरिया में खनिज न्यास शाखा की ‘अदृश्य सत्ता’ पर मौन क्यों?
कोरिया जिले में जिला खनिज न्यास शाखा से जुड़ा एक सवाल पिछले कई वर्षों से अनुत्तरित है एक लिपिक को हटाने की हिम्मत आखिर क्यों नहीं जुटा पाते अधिकारी? हमारा सवाल किसी व्यक्ति पर व्यक्तिगत हमला नहीं, बल्कि तंत्र की संरचना, सिस्टम की कमजोरी, और जवाबदेही की कमी पर है।
वर्षों से एक ही कुर्सीः जिले में चर्चा क्या इस कुर्सी पर फेविकोल लगा है?
जिला अधिकारियों के कई कार्यकाल बदल गए, पर इस एक लिपिक की कुर्सी नहीं बदली, सूत्रों का सवाल कौन-सी शक्ति है जो इस लिपिक को इस शाखा से हटने नहीं देती?
क्या वाकई एक लिपिक इतना शक्तिशाली हो सकता है?
सवाल यही है यदि एक लिपिक वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थ रहे, फाइलों,प्रक्रियाओं और निर्णयों में प्रभाव रखे, और प्रशासन उसका तबादला तक न कर पाए, तो क्या यह व्यक्ति की क्षमता है या सिस्टम की निर्बलता? यदि यह केवल प्रशासनिक आवश्यकता होती, तो इतने वर्षों तक तबादला न होना संयोग नहीं कहा जा सकता।
संपत्ति और रहन-सहन पर उठती चर्चाएँ…क्या सिर्फ चर्चा मानकर छोड़ दिया जाए?
जिले में चर्चा है कि एक लिपिक का रहन-सहन,उसके वेतन के अनुपात से कहीं अधिक है,यह आरोप प्रमाणित नहीं हैं, परंतु यदि चोरी की घटना हो और एफआईआर न हो,तो सवाल तो उठेंगे ही, क्यों नहीं हुई एफआईआर? क्यों नहीं हुई विभागीय जांच? क्यों नहीं हुई संपत्ति का सत्यापन? यदि इन सवालों पर प्रशासन चुप है,तो चुप्पी भी एक उत्तर है और वह उत्तर बहुत कुछ कहता है।
खनिज न्यास: सबसे संवेदनशील विभाग…लेकिन निगरानी सबसे कम
जिला खनिज न्यास की राशि कोई सामान्य बजट नहीं,यह वह पैसा है जो खनिज क्षेत्र के विकास, जनकल्याण और बुनियादी सुविधाओं के लिए आरक्षित है, यदि इसी शाखा में प्रक्रियाओं पर अनौपचारिक नियंत्रण या एक व्यक्ति पर अत्यधिक निर्भरता,जैसी स्थिति बने,तो जोखिम केवल वित्तीय नहीं,लोकतांत्रिक और प्रशासनिक दोनों हैं।
2014 भर्ती परीक्षा…अधूरे सवालों का पुराना पन्ना
यदि किसी भर्ती परीक्षा पर प्रश्नचिह्न लगें,और उसमें वही नाम सामने आए जिसका वर्तमान में विवाद चल रहा हो, तो जांच का क्षेत्र और व्यापक हो जाता है, सवाल यह नहीं कि आरोप सही हैं या गलत, सवाल यह है जांच क्यों नहीं हुई? और जांच से बचने का लाभ किसे मिलता है? वर्षों से तबादला न होना, क्या यह ‘सुविधा का तंत्र’ है? प्रशासन में बार-बार चर्चा रही है कि कुछ कर्मचारी कुछ पदों पर सुविधाजनक होते हैं उनके रहते काम जैसा चलना चाहिए वैसा चलता है, लेकिन, सवाल यह है किसके लिए सुविधाजनक? और किस कीमत पर?
जिला प्रशासन की चुप्पी… अब जनता सवाल पूछ रही है…
जब जिले के लोगों में यह सवाल उठने लगे,क्या लिपिकों की सत्ता, अफसरों से भी ऊपर है? तो यह केवल अफवाह नहीं, सिस्टम की विफलता का संकेत है, लोकतंत्र में एक लिपिक का अप्रभावित और अपरिवर्तित बने रहना किसी भी स्वस्थ प्रशासन का संकेत नहीं हो सकता,समाधान जांच,पारदर्शिता और जवाबदेही, यदि प्रशासन चाहता है कि जिले का विश्वास बना रहे, तो उसे आय से अधिक सम्पत्ति जांच,खनिज न्यास शाखा का ऑडिट,पदस्थापना और तबादला नीति की समीक्षा, पुराने मामलों की पुन:समीक्षा, लोकायुक्त/ईओडब्ल्यू से स्वतंत्र जांच जैसे कदमों पर विचार करना होगा।
करोड़ों की संपत्ति का आरोप… वेतन से ‘कहीं अधिक’ बताई जा रही धन-सम्पत्ति…रॉयल है जीवनशैली
सूत्रों का दावा है कि इस लिपिक ने वर्षों में करोड़ों की संपत्ति अर्जित की,जीवनशैली उच्च वर्ग जैसी,वाहन,मकान,जेवर और लेनदेन पर सवाल कई सहकर्मी कहते हैं सिर्फ वेतन से इतना संभव नहीं घटती-घटना इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करती, लेकिन चर्चा का माहौल गर्म है।
खनिज मद की फाइलें,राशि और प्रक्रिया पर ‘अत्यधिक प्रभाव’ का आरोप
कुछ सूत्रों का कहना है कि खनिज न्यास की राशि, फाइल संचालन, और उपयोग प्रक्रिया में इसका अप्रत्यक्ष नियंत्रण रहा है, यह आरोप भी स्वतंत्र पुष्टि की प्रतीक्षा में है, लेकिन जिले में यह विषय व्यापक चर्चा में है।
घर में चोरी,लेकिन एफआईआर न कराना,शहर में सबसे बड़ा सवाल
कुछ माह पूर्व लिपिक के घर में चोरी हुई, संवेदनशील बात, सूत्रों के अनुसार, लाखों की चोरी होने के बावजूद पुलिस एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई, चर्चा यह भी है कि यदि एफआईआर होती तो अवैध संपत्ति का खुलासा हो सकता था, इसलिए मामला दबा दिया गया।
धन्ना सेठ लिपिक…कार्यालय में चर्चा का विषय
कई कर्मचारियों का कहना है रहन-सहन किसी बड़े कारोबारी जैसा,गाडि़यों-कपड़ों से लेकर खर्च तक सबकुछ वेतन से बाहर का लगता है,प्रशासनिक संरक्षण मिले बिना ऐसा संभव नहीं,यह बयान कर्मचारियों द्वारा दिया गया है,नाम प्रकाशित नहीं किया जा रहा।
आय से अधिक संपत्ति की जांच हुई तो बड़ा खुलासा संभव?
स्थानीय नागरिकों का कहना है, यदि आय से अधिक संपत्ति की जांच लोकायुक्त, ईओडब्ल्यू या आर्थिक अपराध शाखा से हो जाए, तो बड़ा मामला खुल सकता है।
अधिकारियों की चुप्पी… क्या सुविधा वाला स्टाफ इसलिए नहीं हटाया जाता?
सबसे बड़ा सवाल वर्षों से एक ही पोस्ट, न तबादला, न जिम्मेदारी में बदलाव, न जांच, न विभागीय अनुशासन इसे लेकर जिले में चर्चा है कि क्या यह लिपिक अधिकारियों के लिए ‘सुविधाजनक’ बना हुआ है?
विशेष टिप्पणी…
यह रिपोर्ट सूत्रों,कार्यालय चर्चाओं और उपलब्ध दस्तावेज़ीय संकेतों पर आधारित है, दैनिक घटती-घटना इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता,यदि जिला प्रशासन या राज्य सरकार द्वारा जांच आरंभ की जाती है,तब वास्तविक स्थिति सामने आएगी।
समाप्ति में…
व्यक्ति नहीं व्यवस्था सवालों के घेरे में है, यदि एक लिपिक वर्षों तक एक कुर्सी पर टिककर, पूरे विभाग पर अप्रत्यक्ष नियंत्रण रख सकता है, तो इसे “दफ़्तर संस्कृति” नहीं, प्रशासनिक कमजोरी कहा जाएगा, कोरिया की जनता पारदर्शिता चाहती है, और पारदर्शिता केवल एक ही से आती है…जांच से, पूछा जाना ही पहला कदम है जवाबदेही की ओर।
पाठकों से सवाल…
क्या जिला खनिज न्यास शाखा की सम्पूर्ण व्यवस्था की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए?
अपनी राय हमारे संपादक को भेजें।
व्यवस्था यही है?
जिला खनिज न्यास का अमर लिपिक…कुर्सी पर वर्षों से जमे, संपत्ति पर उठे बड़े सवाल
धन्ना सेठ लिपिक का राज! न तबादला,न जांच…आखिर कौन दे रहा संरक्षण?
खनिज शाखा का असली कलेक्टर कौन?…लिपिक की संपत्ति,चोरी प्रकरण और पुराने घोटालों पर उठे सवाल
सरकारी वेतन या ‘खास कमाई’?- लिपिक की आलीशान लाइफस्टाइल ने खोले करोड़ों के रहस्य
जिला प्रशासन की चुप्पी क्यों?- एक लिपिक पर कार्रवाई न होना पूरे सिस्टम पर उंगली उठाता है”


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