पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में नियम ताक पर…ग्राम सभा प्रस्ताव के आधार पर सर्टिफिकेट बनाने का प्रावधान नहीं…फिर भी जारी
-रवि सिंह-
कोरिया/पटना,19 नवंबर 2025 (घटती-घटना)। कोरिया जिले की पटना तहसील के तहसीलदार एक बार फिर अपने विवादित फैसलों को लेकर सुर्खियों में हैं, इस बार उन पर एक गैर-आदिवासी व्यक्ति को जनजातीय समुदाय का फर्जी जाति प्रमाण पत्र जारी करने का गंभीर आरोप लगा है,सूत्रों के अनुसार, यह प्रमाण पत्र कथित तौर पर उस व्यक्ति को सरपंच बनने की योग्यता प्रदान करने के उद्देश्य से जारी किया गया है,चूंकि कोरिया जिला पांचवीं अनुसूची क्षेत्र के अंतर्गत आता है, इसलिए त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था के प्रमुख पदों पर चुनाव लड़ने के लिए जनजातीय समुदाय से होना अनिवार्य है।
बता दे कोरिया जिले के पटना तहसील के तहसीलदार लगातार खुद को सुर्खियों में बनाए हुए हैं, उनके कई फैसले और कई आदेश ऐसे देखने सुनने को मिल रहे हैं जो यह साबित करते हैं कि वह नियम कायदों से आगे बढ़कर काम करने के आदि हैं और उसी आधार पर वह आदेश जारी करते हैं और कई फैसले वह सुनाते हैं,हालिया मामला एक जनजातीय समुदाय के जाति प्रमाण पत्र का है,सूत्रों के अनुसार तहसीलदार साहब ने एक गैर आदिवासी समाज के व्यक्ति को जनजातीय समुदाय का जाति प्रमाण पत्र जारी कर दिया है,यह मामला एक ग्राम के सरपंच से जुड़ा हुआ है जिसे माना जाता है सरपंच बनने के लिए यह जाति प्रमाण-पत्र प्रदान किया गया है, वैसे यह एक सवाल है जो सूत्रों की जानकारी से खड़ा हो रहा है कि क्या पटना तहसील के तहसीलदार ने केवल एक ग्राम में सरपंच बनने के लिए योग्यता प्रदान करने के लिए एक जाति प्रमाण पत्र प्रदान कर दिया जारी कर दिया क्योंकि कोरिया जिला पांचवीं अनुसूची क्षेत्र अंतर्गत आता है और जिले में त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था अंतर्गत प्रमुख पदों पर चुनाव लड़ने के लिए जनजातीय समुदाय से होना आवश्यक है।वैसे क्या तहसीलदार पटना ने सब कुछ जानते हुए ग्राम सभा प्रस्ताव आधार पर जाति प्रमाण-पत्र बनाया जिससे किसी व्यक्ति को सरपंच बनने में आसानी हो सके, सूत्रों की माने तो सच यही है। खैर अब यह मामला जांच का है नहीं है यह तो जिले के वरिष्ठ अधिकारी तय करेंगे, लेकिन यदि आवाज उठी है तो कुछ न कुछ सच्चाई मामले में होगी यह कहना गलत नहीं होगा, वैसे तहसीलदार पटना से जुड़ा यह कोई पहला मामला नहीं है,वह लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं और यह सुर्खियां उन्हें उनके द्वारा जारी विभिन्न आदेशों के कारण मिल रही हैं, कभी भूमि मामलों के निपटारे का आदेश कभी जाति प्रमाण पत्रों के जारी करने में आरोप,तहसीलदार पटना पर आरोप लगते चले आ रहे हैं और जांच किसी मामले में उनके विरुद्ध संस्थित नहीं की जा रही है।
नियमों की अनदेखी और ग्राम सभा प्रस्ताव का दुरुपयोग
रिपोर्ट में सबसे बड़ा सवाल यह उठाया गया है कि तहसीलदार ने यह जाति प्रमाण पत्र ग्राम सभा के प्रस्ताव के आधार पर बनाया है…
सवाल- सूत्रों की जानकारी के अनुसार, ग्राम सभा के आधार पर जाति प्रमाण पत्र बनवाने का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है। इसके बावजूद, तहसीलदार ने किस आधार पर यह प्रमाण पत्र जारी कर दिया?
आरोप-सूत्रों का मानना है कि तहसीलदार ने सब कुछ जानते हुए,केवल एक गैर-आदिवासी व्यक्ति को सरपंच बनने में मदद करने के लिए यह प्रमाण-पत्र बनाया है…
यदि यह आरोप सही साबित होता है,तो इसका सीधा अर्थ है कि एक जनजातीय समुदाय के योग्य व्यक्ति को निर्वाचित होने से वंचित करते हुए अन्य समाज को लाभ पहुंचाया गया है, जो पेसा एक्ट और पांचवीं अनुसूची के मूल उद्देश्य का उल्लंघन है…
तहसीलदार की कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह…तहसीलदार पटना से जुड़ा यह पहला मामला नहीं है। वह पहले भी भूमि मामलों के निपटारे और अन्य आदेशों को लेकर लगातार सुर्खियों में रहे हैं। उन पर कई बार आरोप लग चुके हैं, लेकिन किसी भी मामले में उनके विरुद्ध जांच संस्थित नहीं की गई है…
अब जांच और कार्रवाई की मांग
इस नए और गंभीर मामले ने जिला प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है। स्थानीय लोगों और सूत्रों ने मांग की है…
जाति प्रमाण पत्र की तत्काल जांच- क्या तहसीलदार ने सच में फर्जी जाति प्रमाण पत्र जारी किया है?
सर्टिफिकेट निरस्त हो-यदि प्रमाण-पत्र फर्जी पाया जाता है,तो उसे तुरंत निरस्त किया जाए…
तहसीलदार पर कार्रवाई-नियम-कायदों का उल्लंघन करने और पद के दुरुपयोग के लिए तहसीलदार के खिलाफ जल्द से जल्द कार्रवाई की जाए…
ग्राम सभा की जांच-जिस ग्राम सभा प्रस्ताव के आधार पर यह प्रमाण-पत्र जारी किया गया है,उसकी सत्यता और उसमें शामिल लोगों की भूमिका की भी जांच हो। जिला प्रशासन इस संवेदनशील मामले में क्या रुख अपनाता है, यह देखना बाकी है। यह मामला सिर्फ एक अधिकारी के कदाचार का नहीं,बल्कि पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में संवैधानिक व्यवस्था के सम्मान का सवाल है।
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