रायपुर,13 नवम्बर 2025। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की सख्त फटकार के बाद राज्य पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम ने अंबिकापुर के एक 9 साल पुराने आपराधिक मामले की जांच में हुई देरी पर सख्त कदम उठाया है। डीजीपी ने खुद हाईकोर्ट में व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल किया, जिसके 24 घंटे के भीतर ही साक्ष्य के अभाव में केस को बंद करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। पुलिस विभाग ने लापरवाही के लिए 6 उपनिरीक्षकों (एसआई) की 1 वर्ष की वेतन वृद्धि रोक दी है, जबकि तत्कालीन डीएसपी मणीशंकर चंद्रा के खिलाफ ‘निराशा’ का दंड लगाया गया है।
9 साल पुराना मामला : मामला वर्ष 2016 का है। याचिकाकर्ता लखनलाल वर्मा के खिलाफ अंबिकापुर थाने में धारा 384, 502, 504, 34 भादवि के तहत अपराध दर्ज किया गया था। याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई कि उनके 2 सह-आरोपी पहले ही बरी हो चुके हैं, लेकिन पुलिस जानबूझकर जांच को लंबित रखे हुए है। 6 नवंबर 2025 को हाईकोर्ट ने डीएसपी को व्यक्तिगत रूप से हलफनामा देने और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की जानकारी प्रस्तुत करने का आदेश दिया था।
डीएसपी ने सौंपी रिपोर्ट,7 अफसरों पर हुई कार्रवाई…
डीएसपी अरुण देव गौतम ने अदालत को बताया कि आदेश मिलते ही पुलिस मुख्यालय ने तत्काल जांच के निर्देश दिए। देरी के लिए जिम्मेदार अफसरों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। संतोषजनक जवाब न मिलने पर 6 उपनिरीक्षक- नरेश चौहान, विनय सिंह, मनीष सिंह परिहार, प्रियेश जॉन, नरेश साहू और वंश नारायण शर्मा की 1 वर्ष की असंचयी वेतन वृद्धि रोकी गई। वहीं तत्कालीन डीएसपी मणीशंकर चंद्रा को ‘निराशा का दंड’ दिया गया है।
कोर्ट में डीएसपी का हलफनामा…
हलफनामे में डीएसपी ने कहा कि जांच के दौरान कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिला, इसलिए मामले में अब धारा 169 सीआरपीसी के तहत अंतिम रिपोर्ट विचारण न्यायालय में पेश की जा रही है। उन्होंने अदालत को भरोसा दिलाया कि हाईकोर्ट के निर्देशों का शत-प्रतिशत पालन किया गया है।
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