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कोरिया@सोनहत के 22 गांवों में बदले गए सौर प्लांट के खराब इन्वर्टर,गांवों में फिर लौटी रोशनी

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-रवि सिंह-
कोरिया,09 नवंबर 2025 (घटती-घटना)। सोनहत विकासखण्ड के वनांचल क्षेत्रों में खराब पड़े सौर ऊर्जा प्लांट के कारण फैल रहे अंधेरे पर ‘घटती घटना’ द्वारा प्रकाशित समाचार का महत्वपूर्ण प्रभाव सामने आया है। जिला प्रशासन और कलेक्टर कोरिया द्वारा संज्ञान लेते ही छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (क्रेडा) ने त्वरित कार्रवाई करते हुए खराब इन्वर्टर और बैटरी बैंक बदलने की प्रक्रिया शुरू की,जिसके बाद अब 22 गांवों में रोशनी और पेयजल आपूर्ति फिर से सुचारू हो गई है।
सूत्रों के अनुसार, आर.वी.ई., डीडीजी एवं सौभाग्य योजना अंतर्गत स्थापित अधिकांश सौर संयंत्र वारंटी अवधि खत्म होने के बाद तकनीकी रूप से बाधित हो गए थे, जिससे कई गांवों में पेयजल तथा घरेलू विद्युत उपयोग प्रभावित हो रहा था। खबर प्रकाशित होने के बाद क्रेडा जिला कार्यालय द्वारा 31 स्पेयर इन्वर्टर और 240 बैटरी बैंक की मांग का प्रस्ताव प्रधान कार्यालय रायपुर भेजा गया, जिस पर त्वरित स्वीकृति मिलते ही तकनीकी टीमों ने गांवों में सुधार कार्य प्रारंभ किया, क्रेडा के तकनीकी अधिकारियों ने बताया कि नए इन्वर्टर लगने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में सौर ऊर्जा आधारित सेवाएं पुनः सक्रिय कर दी गई हैं। जिन गांवों में प्लांट लिविंग सिस्टम पर चल रहे थे, वहां भी स्थायी इन्वर्टर इंस्टॉल कर बैकअप बढ़ाया गया है।
पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने जताया आभार

इस विषय में पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने कलेक्टर कोरिया को पत्र लिखकर इन्वर्टर और बैटरी बदलने की मांग की थी। समस्या के समाधान के बाद उन्होंने कलेक्टर कोरिया और क्रेडा विभाग का धन्यवाद किया तथा जन सरोकारों से जुड़े मुद्दे को प्रमुखता से उठाने के लिए ‘घटती घटना’ का भी आभार व्यक्त किया।
कोरिया जन सहयोग समिति और ग्रामीणों ने किया स्वागत
कोरिया जन सहयोग समिति के कार्यकारी अध्यक्ष अधिवक्ता जय सोंपाकर, चुलादर के ग्रामीण गणेश गुप्ता, स्थानीय नेता अनित दुबे, प्रकाश चन्द्र साहू और जनपद अध्यक्ष आशा देवी सोनपाकर सहित ग्रामीणों ने जिला प्रशासन की इस संवेदनशील पहल की सराहना की है।
इन गांवों में फिर जगमगाई रोशनी
नतवाही, देवतीडांड़, पत्थरगवां, निग्नोहर, कचोहर, तुर्रीपानी, परिहत, सिंघोर छात्रावास, सलगवां खुर्द, रामगढ़, बंशीपुर, तंजरा, मझगवां, रावत सारई, अमृतपुर, उधेनी, कुर्थी, चंदहा, गिधेर सहित 22 गांवों में सौर संयंत्र पुनः संचालित हो चुके हैं। यह समाधान न केवल ग्रामीण ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह भी बताता है कि जब समाचार जनहित में हो — तो प्रशासन भी सक्रिय होकर जवाब देता है।


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