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बिलासपुर@छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग भर्ती घोटाला

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  • हाईकोर्ट ने सरकार की अपील खारिज की
  • 37 सिलेक्टेड कैंडिडेट्स को नियुक्ति का आदेश


बिलासपुर,06 नवम्बर 2025। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की 2021-22 भर्ती प्रक्रिया से जुड़े बहुचर्चित घोटाले के मामले में गुरुवार को बड़ा फैसला आया है। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार की अपील को खारिज करते हुए सिंगल बेंच के फैसले को बरकरार रखा है। कोर्ट ने कहा कि जिन अभ्यर्थियों के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो ने अब तक कोई चार्जशीट दाखिल नहीं की है, उन्हें नियुक्ति से वंचित रखना उचित नहीं है। इस आदेश के साथ ही 37 चयनित अभ्यर्थियों के लिए नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है। डिवीजन बेंच में मुख्य न्यायाधीश रमेश कुमार सिन्हा और जस्टिस बी.डी. गुरु की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि ‘जब तक किसी अभ्यर्थी के खिलाफ आपराधिक चार्जशीट दाखिल नहीं होती, तब तक उसे केवल संदेह के आधार पर नियुक्ति से रोका जाना न्यायोचित नहीं माना जा सकता। ‘ मामला वर्ष 2021-22 की राज्य सेवा परीक्षा से जुड़ा है। इस परीक्षा के माध्यम से कुल 171 पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया चलाई गई थी।
प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह आरोप सामने आए कि चयन में राजनीतिक प्रभाव और प्रशासनिक अधिकारियों के रिश्तेदारों को प्राथमिकता दी गई। शिकायतों के बाद मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई। जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए और इस घोटाले में शामिल 7 लोगों को गिरफ्तार भी किया गया। सीबीआई जांच के बाद शासन ने उन अभ्यर्थियों की नियुक्ति पर रोक लगा दी जिनके नाम संदेहास्पद सूची में थे। इसके साथ ही शासन ने पूरी चयन प्रक्रिया को अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया था।
अभ्यर्थियों ने दायर की थी याचिका
सरकार के इस फैसले के खिलाफ चयनित अभ्यर्थियों ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका पर सुनवाई के दौरान सिंगल बेंच ने आदेश दिया था कि जिन अभ्यर्थियों के खिलाफ कोई चार्जशीट दाखिल नहीं हुई है, उन्हें नियुक्ति दी जाए। राज्य शासन ने इस फैसले को चुनौती देते हुए चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच में अपील दायर की थी। लेकिन डिवीजन बेंच ने अब सिंगल बेंच के आदेश को सही ठहराते हुए सरकार की अपील को खारिज कर दिया।
कोर्ट ने कही यह अहम बात
कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि, ‘केवल जांच लंबित होने के आधार पर किसी अभ्यर्थी को नियुक्ति से वंचित रखना उचित नहीं है। जब तक चार्जशीट दाखिल नहीं होती, किसी व्यक्ति को दोषी नहीं माना जा सकता। ‘
अभ्यर्थियों के लिए बड़ी राहत
इस निर्णय के बाद अब उन 37 चयनित उम्मीदवारों के लिए राहत का रास्ता खुल गया है, जो लंबे समय से अपनी नियुक्ति का इंतजार कर रहे थे। कोर्ट के इस फैसले को अभ्यर्थियों के लिए बड़ी जीत और न्यायपालिका द्वारा दी गई न्यायिक निष्पक्षता का उदाहरण बताया जा रहा है। माना जा रहा है कि शासन को अब जल्द ही 37 चयनित उम्मीदवारों की ज्वाइनिंग प्रक्रिया शुरू करनी होगी।


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