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कोरिया@जिला खनिज न्यास शाखा का लिपिक वर्षों से एक ही जगह है जमा हुआ, हटाने की हिम्मत किसी अधिकारी में नहीं?

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करोड़ों की संपत्ति का मालिक,चोरी की एफआईआर भी नहीं कराई थी दर्ज,जांच हुई तो खुल सकता है बड़ा राज

धन्ना सेठ बन चुका लिपिक? आय से अधिक संपत्ति का बड़ा मामला हो सकता है उजागर


-रवि सिंह-
कोरिया,05 नवंबर 2025
(घटती-घटना)।

कोरिया जिला मुख्यालय में पदस्थ जिला खनिज न्यास शाखा का एक लिपिक टेकचंद साहू चर्चाओं के केंद्र में है। सूत्रों के अनुसार,वर्षों से एक ही पद पर जमे इस लिपिक ने अब तक करोड़ों की संपत्ति अर्जित कर ली है। हैरानी की बात यह है कि कोई भी अधिकारी इसे हटाने या स्थानांतरित करने का साहस नहीं जुटा पाया है। लिपिक सभी का चहेता बनने का हुनर रखता है और वह सभी को प्रभाव में लेने की कला जानता है ऐसा बताया जाता है।
घर में चोरी, पर पुलिस प्राथमिकी दर्ज नहीं…!
कुछ माह पहले लिपिक के आवास में चोरी की एक घटना हुई थी,सूत्रों के मुताबिक, चोरी के बाद भी टेकचंद साहू ने पुलिस में कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं कराई, सूत्र बताते हैं कि चोरी में लाखों रुपए नकद और कीमती सामान चोरी हुए, परंतु पुलिस प्राथमिकी दर्ज करने से अवैध संपत्ति का खुलासा हो जाने के डर से उसने चुप्पी साध ली।
लिपिक होकर भी आलीशान जीवनशैली सहकर्मियों में चर्चा
जिला कार्यालय के कई कर्मचारियों का कहना है कि टेकचंद साहू और कुछ अन्य लिपिकों का रहन-सहन उच्च वर्गीय लोगों जैसा है, सिर्फ वेतन से इतनी संपत्ति और वैभव संभव नहीं। जिले के प्रशासनिक अधिकारियों का संरक्षण भी शायद इन्हें मिलता रहा है, — एक वरिष्ठ कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि लिपिक का ऐशो आराम और उसकी जीवनशैली किसी बड़े व्यक्ति से कम नहीं,ऐसा ऐशो आराम ईमानदारी से मिलने वाले वेतन से संभव नहीं है,यह अन्य आय से मिल पाने वाला वैभव है।
विशेष टिप्पणी…
यह रिपोर्ट प्राप्त सूत्रों और दस्तावेज़ीय संकेतों पर आधारित है, ‘दैनिक घटती-घटना’ इस खबर के प्रत्येक बिंदु की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता,यदि प्रशासन इस पर जांच आरंभ करता है तो वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
सूत्रों का दावा,खनिज न्यास की पूरी राशि पर नियंत्रण
जिला खनिज न्यास शाखा से मिलने वाली राशि की प्रक्रिया पर इस लिपिक का मजबूत नियंत्रण बताया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, फाइलों से लेकर राशि के उपयोग तक सबकुछ इसी के माध्यम से गुजरता है,सूत्रों का यह भी कहना है कि इस लिपिक ने वर्षों में जो संपत्ति जुटाई है, वह उसके वेतन के अनुपात में कहीं अधिक है। इसके बावजूद विभागीय स्तर पर न तो जांच की गई और न ही जिम्मेदारी बदली गई।
2014 की भर्ती परीक्षा से भी जुड़ा नाम
जिला संयुक्त भर्ती परीक्षा 2014 में भी टेकचंद साहू का नाम सामने आया था। बताया जाता है कि उस भर्ती में कई अनियमितताएं हुईं, जिनका मामला अब भी न्यायालय में लंबित है, उस समय यह लिपिक परीक्षा संचालन में सक्रिय भूमिका में था, इसने अपने ही पारिवारिक सदस्यों को भर्ती दिलाने का प्रयास किया था जैसा सूत्रों का कहना है।
पाठक क्या सोचते हैं?
क्या जिला खनिज न्यास शाखा की पूरी व्यवस्था की जांच आवश्यक है? अपनी राय हमारे संपादक को भेजें सकते है।
जांच हुई तो आय से अधिक संपत्ति का मामला उजागर हो सकता है…
सूत्रों का कहना है कि यदि इस लिपिक की संपत्ति की निष्पक्ष जांच कराई जाए, तो आय से अधिक संपत्ति का बड़ा मामला सामने आ सकता है, कई स्थानीय लोगों ने मांग की है कि राज्य सरकार और जिला प्रशासन को इसकी जांच लोकायुक्त या आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा से करानी चाहिए ताकि सच सामने आ सके।
अधिकारियों की चुप्पी पर भी सवाल
वर्षों से एक ही जगह पदस्थ इस लिपिक का तबादला न होना, उसकी जिम्मेदारी में बदलाव न होना, और लगातार संरक्षण मिलना, प्रशासनिक तंत्र की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता है, क्या यह इसलिए है कि यह लिपिक अधिकारियों के लिए सुविधाजनक साबित हो रहा है? यह सवाल अब जिले में खुलकर चर्चा का विषय बन चुका है।


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