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कोरिया@जगदलपुर में आयोजित 28वां ठाकुर पूरन सिंह स्मृति ‘सूत्र सम्मान’

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कोरिया के कवि पद्मनाभ गौतम के गजल संग्रह ‘मिट्टी में जड़ जितना हूँ’ का हुआ औपचारिक विमोचन


-संवाददाता-
कोरिया,04 नवंबर 2025
(घटती-घटना)।

समकालीन सूत्र और कोंडागांव ककसाड़ के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुए 28 वें ठाकुर पूरन सिंह स्मृति सूत्र सम्मान 2025 के दो दिवसीय आयोजन में देशभर के प्रमुख साहित्यकारों, आलोचकों और कवियों ने भाग लिया। आयोजन के दूसरे दिन हुए विमोचन समारोह में उत्तर छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले के कवि-पत्रकार पद्मनाभ गौतम के चर्चित ग़ज़ल संग्रह मिट्टी में जड़ जितना हूँ का औपचारिक विमोचन किया गया।
विमोचन डॉ. संजय अलंग और डॉ. सुधीर सक्सेना के कर-कमलों से संपन्न हुआ, मंच पर उपस्थित कवि की धर्मपत्नी श्वेता मिश्रा भी इस अवसर पर सहभागी रहीं, इस अवसर पर मुख्य अतिथि आलोचक जयप्रकाश, कथाकार भालचंद्र चंद जोशी, चिंतक-संपादक सुभाष मिश्र, लेखिका-अनुवादक अमृता बेरा, इतिहासकार डॉ. संजय अलंग, तथा कवि-संपादक सुधीर सक्सेना की उपस्थिति में प्रथम सत्र में डॉ. सुनील कुमार शर्मा को राष्ट्रीय सूत्र सम्मान से सम्मानित किया गया, दूसरे सत्र में अध्यक्षता डॉ. राजाराम त्रिपाठी ने की, इस अवसर पर पाँच अन्य साहित्यकारों की पुस्तकों का भी विमोचन किया गया और कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ, पद्मनाभ गौतम ने अपने ग़ज़ल संग्रह से प्रतिनिधि रचनाओं का पाठ किया। उनकी प्रस्तुति ने पूरे सभागार को मंत्रमुग्ध कर दिया। दर्शक बार-बार तालियों और ‘वाह-वाह’ से गूंज उठे। उन्होंने समकालीन दृष्टि और मानवीय भावों से ओत-प्रोत अशआर सुनाए, जिनमें से एक शेर ने विशेष रूप से ध्यान आकर्षित किया…देखती है राख जब भी, खोजती चिंगारियां, आग से ज़्यादा है पागल आग की खातिर हवा। स्त्री मन की संवेदना पर आधारित उनका एक अन्य शेर…अकेली बैठती है, हौले-हौले गुनगुनाती है, वो अपने मन की लड़की को ज़माने से छुपाती है। उन्होंने यह शेर संचालन कर रही उत्तर अंचल की कवयित्री अनामिका चक्रवर्ती को समर्पित किया, जिनकी कविता से प्रेरणा लेकर यह रचना हुई। यह ग़ज़ल संग्रह न्यू वर्ल्ड पब्लिकेशन, नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित किया गया है और अमेज़न पर लगातार दो माह तक ‘शीर्ष 50 नवीन कविता पुस्तकों’ में शामिल रहा। पद्मनाभ गौतम पिछले तीन दशकों से लोकसंवेदना से जुड़ा साहित्य रच रहे हैं। उनकी रचनाएँ हंस, कथाक्रम,कृति ओर, प्रगतिशील वसुधा, अक्षर पर्व जैसी प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही हैं। वर्ष 2004 में उनका पहला ग़ज़ल संग्रह कुछ विषम सा प्रकाशित हुआ था, हाल ही में उनका नया कविता संग्रह भी न्यू वर्ल्ड पब्लिकेशन से प्रकाशित हुआ है, जिसका लोकार्पण आगामी विश्व पुस्तक मेले (दिसंबर 2026) में प्रस्तावित है, आयोजन के सूत्रधार विजय सिंह और सरिता सिंह ने कार्यक्रम की रूपरेखा और संचालन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। आयोजन के पहले दिन साहित्यिक विमर्श और दूसरे दिन बस्तर भ्रमण का भी कार्यक्रम रखा गया।


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