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सोनहत@पहाडों की खाई में बसा मझगवां गांव विकास की बयार से कोसों दूर

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-राजन पाण्डेय-
सोनहत,04 नवंबर 2025 (घटती-घटना)। विकासखंड सोनहत का ग्राम मझगवां चारों ओर से पहाड़ों के बीच खाई में बसा हुआ है,इस गांव के लोग आज भी विकास की बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं, सड़क, बिजली,स्वास्थ्य और पेयजल जैसी मूलभूत आवश्यकताओं के लिए ग्रामीणों को रोजाना संघर्ष करना पड़ता है,ग्रामीणों की मानें तो वर्षों से वे विकास की राह ताक रहे हैं, लेकिन स्थिति जस की तस है।
बता दे की विकासखंड सोनहत में एक ऐसा ग्राम भी है जो चारो ओर से पहाड़ो के बीच खाई में बसा है इस ग्राम के रहवासी पिछले कई वर्षों से अपने क्षेत्र में विकास की बाट जोह रहे है लेकिन अभी तक विकास की दशा में कोई खास पहल नही हो पाया है, आलम है कि अब यहां के रहवासी विकास एवं मूल भूत सुविधा के आभाव में कुंठित होकर अपनी नियती को कोसने लगे है, जी हां हम बात कर रहे है सोनहत विकासखंड के ग्राम मझगवां की जहां न तो सड़क न ही बिजली और न ही कोई स्वास्थ्य सुविधा ग्रामीणों ने जानकारी देते हुए बताया की ग्राम स्तर पर बिजली का विकल्प सौर ऊर्जा भी खराब हो गया था जिसे अभी एक सप्ताह पहले ही बनाया गया है जो चालू हो गया है।
राशन लेने लंबी दूरी,कंधे पर ढो कर लाना मजबूरी
कुछ ग्रामीणों ने बताया उन्हे पहाड़ चढ़ कर ग्राम कछाड़ी राशन लेने जाना पड़ता है जिसके कारण भारी परेशानी होती है, ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों पर भी उदासीनता का आरोप लगाते हुए कहा की चुनाव समय वोट मांगने जन प्रतिनिधि जरूर आते है वादे भी करते है लेकिन चुनाव के बाद कोई भी हमारा हाल जानने नही आता है। इस बात से उन्हे काफी दुख होता है ग्रामीणों ने बताया कि पिछली सरकार में घाट कटिंग का काम हुआ था उससे थोड़ी राहत मिली, विधायक भी गांव में आये थे उन्होंने शेड आदि बनवाया और मोबाइल टावर लगवाया लेकिन वह आज तक चालू ही नही हो सका बस शो पीस बन कर पड़ा हुआ है।
जल जीवन मिशन की पाइप बिछी नल का ठीहा लगा पर पानी नही मिला
ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम स्तर पर दो सोलर प्लांट पिछली सरकार के समय से संचालित है जिनसे पानी मिल जाता है लेकिन सबको यहां पानी भरने आना पड़ता है। घर घर नल कनेक्शन के तहत पाइप लाइन बिछाए 2 साल हो गए लेकिन आज तक कनेक्शन कम्प्लीट नही हुआ पानी भी नही आया,नल के ठीहे गाड़े गए लेकिन उसमें कनेक्शन ही नही किया गया और पानी भी नही आता जिससे पानी लेने सभी को प्लांट के पास आना पड़ता है। ग्राम में घरों व मुहल्लों की दूरी ज्यादा होने के कारण ग्रामीण महिलाओं को सर पानी ढो कर एवं पुरूषों को कंधो पर पानी ढो कर लाना मजबूरी सा बन गया है।
ग्रामीणों ने पहाड़ पर बनाया रास्ता
सड़क निर्माण के संबंध में कई बार मांग किए जाने के बाद भी कोई सकारात्मक पहल नही होने के कारण ग्रामीणों ने पहाड़ पर ही रास्ता बना लिया है हलाकी एक और रास्ता भी है लेकिन वह भी बहुत जर्जर है और इतना भयावह की लोग दुर्घटना ग्रस्त हो जाते हैं, इस लिए उस पर चलना मुशकिल सहित जोखिम भरा है। ग्रामीणों की माने तो जर्जर रास्ते पर चार पहिया वाहन ग्राम स्तर तक नही पहुच पाते महज ट्रैक्टर एवं अन्य बड़े पहिए वाले वाहन ही किसी तरह ग्राम स्तर पर पहुच पाते है। ग्रामीणों ने प्रशासन से लोलकी से मझगवां तक सुलभ पहुच मार्ग बनाए जाने की मांग किया है।
हाथी प्रभावित क्षेत्र है मझगवां
मझगवां ग्राम हाथी प्रभावित क्षेत्र है इस ग्राम में अक्सर हाथियों की आवाजाही होती रहती है कई बार हाथियों के द्वारा ग्रामीणों के घरो एवं फसलों को नुकसान पहुचा दिया जाता है। एक ग्रामीण महिला ने बताया हाथियों के द्वारा उसका घर एवं फसलों को नुकसान पहुचाया गया था।
मझगवां में राशन दुकान की हो अस्थाई व्यवस्था: पुष्पेंद्र
कोरिया जन सहयोग समिति के अध्यक्ष पुष्पेंद्र राजवाड़े ने मझगवां ग्राम का दौरा किया उन्होंने ग्रामीणों की समस्याएं सुनी और निराकरण हेतु प्रशासन को ज्ञापन सौंपे जाने की बात कही, पुष्पेंद्र ने बताया कि सड़क की समस्या व्यापक है सुधार होना चाहिए, कम से कम मिट्ठी मुरुम डाल कर थोड़ा ठीक किया जा सकता है। पुष्पेंद्र ने कहा कि मझगवां वालो को अस्थाई रुप से कछाड़ी की जगह नई दुकान मझगवां में ही खुले और राशन मिले इसके लिए मांग करंगे। साथ ही मोबाइल सेवा भी जल्द शुरू हो इसके लिए महाप्रबंधक भारत संचार निगम को मांग पत्र भेजेंगे।


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