- डॉ. रमन सिंह की निष्ठा की प्रशंसा करते हुए कहा,क्रिकेट की तरह राजनीति में भी टीम भावना ज़रूरी
- विधानसभा अध्यक्ष पूर्व मुख्यमंत्री डॉक्टर रमन सिंह को लेकर प्रधानमंत्री ने कही यह बात
- पार्टी का कार्यकर्ता अपने समर्पण और परिश्रम से लोकतंत्र को सशक्त बना सकता है,यह डॉक्टर रमन सिंह से सीखना चाहिए : प्रधानमंत्री
–रवि सिंह-
रायपुर,02 नवम्बर 2025 (घटती-घटना)। छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के 25 वें वर्ष (रजत जयंती वर्ष) के अवसर पर राजधानी रायपुर में आयोजित राज्योत्सव समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजनीति और संगठन जीवन पर गहरी सीख देने वाला वक्तव्य दिया, प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह का उदाहरण देते हुए कहा कि राजनीति में भी खिलाड़ी की भावना अपनाने की आवश्यकता है, प्रधानमंत्री ने कहा…‘क्रिकेट में खिलाड़ी कभी कप्तान होता है,तो कभी टीम की जीत के लिए खिलाड़ी बनकर खेलता है, राजनीति में ऐसा कम देखने को मिलता है, डॉ. रमन सिंह ने दिखाया है कि बिना पद की इच्छा के भी पार्टी और लोकतंत्र के प्रति समर्पण कैसे किया जा सकता है,’ प्रधानमंत्री के इस बयान को राजनीति के भीतर व्याप्त परिवारवाद और पदलोलुपता पर परोक्ष टिप्पणी माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंच से उद्बोधन के दौरान ऐसा कुछ कहा जो चर्चा का विषय बन गया और यह चर्चा इसलिए हो रही है क्योंकि उन्होंने कहीं न कहीं ऐसा कुछ कहा जो परिवारवादी राजनीति पर चोट थी और राजनीतिक महत्वाकांक्षा वाले राजनीति से जुड़े लोगों के लिए एक सीख थी जो पद लोलुपता की चाह में एक दूसरे को एक ही झंडे तले पराजित करने की सोच रखते हैं,प्रधानमंत्री ने प्रदेश गठन के रजत जयंती अवसर पर अपने उद्बोधन में पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान में विधानसभा अध्यक्ष का दायित्व निभा रहे डॉक्टर रमन सिंह का उदाहरण देते हुए कहा कि क्रिकेट में अक्सर देखने को मिलता है कि कोई खिलाड़ी कभी टीम का कप्तान होता है और जरूरत पड़ने पर टीम की जीत के लिए वह खिलाड़ी भी बनकर खेलता है और यह या ऐसा राजनीति में देखने को मिलता, प्रधानमंत्री ने कहा कि डॉक्टर रमन सिंह को कभी मुख्यमंत्री थे आज वह विधानसभा में सदस्य बनकर अपनी भूमिका निभा रहे हैं और वह ऐसा बिना किसी नाराजगी या शिकायत कर रहे हैं जो दुर्लभ है राजनीति में देखने को नहीं मिलता।
कार्यकर्ता ही लोकतंत्र की नींव
प्रधानमंत्री ने कहा कि पार्टी का सच्चा कार्यकर्ता वही होता है जो हर भूमिका में अपनी निष्ठा और ईमानदारी बनाए रखे,उन्होंने कहा कि किसी दल की मजबूती उसके कार्यकर्ताओं के समर्पण से तय होती है,न कि नेताओं की महत्वाकांक्षा से‘एक कार्यकर्ता का समर्पण और परिश्रम ही लोकतंत्र की सबसे मजबूत नींव है, राजनीति में अनुशासन और त्याग जरूरी है,’ : प्रधानमंत्री मोदी।
‘हर कार्यकर्ता को अवसर मिलना चाहिए ‘
प्रधानमंत्री ने कहा कि जैसे खेल में कप्तानी बदलती रहती है,वैसे ही राजनीति में भी नए चेहरों को आगे आने का मौका देना चाहिए, उन्होंने कहा कि मुख्य पद पर एक ही व्यक्ति का बने रहना स्वस्थ लोकतंत्र के लिए उचित नहीं। रायपुर से निकला राष्ट्रीय संदेश-प्रधानमंत्री मोदी के इस उद्बोधन को केवल छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे देश की भाजपा इकाइयों के लिए एक वैचारिक संदेश माना जा रहा है,कि पार्टी का बल सत्ता से नहीं, बल्कि संगठन की निष्ठा और कार्यकर्ताओं के त्याग से आता है।
क्या यह बिहार के लिए भी संदेश है?
प्रधानमंत्री मोदी का यह उद्बोधन ऐसे समय में आया है जब बिहार में विधानसभा चुनाव की सरगर्मियां चरम पर हैं और भाजपा वहां गठबंधन के साथ चुनाव मैदान में है, राजनीतिक हलकों में यह चर्चा जोरों पर है कि प्रधानमंत्री का यह बयान बिहार के नेताओं और गठबंधन सहयोगियों के लिए भी एक परोक्ष चेतावनी है, कि अनुशासन और समर्पण के बिना कोई भी दल या गठबंधन स्थिर नहीं रह सकता, यह भी माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री ने छत्तीसगढ़ की धरती से यह संदेश देकर न केवल कार्यकर्ताओं को प्रेरित किया, बल्कि बिहार सहित देशभर के भाजपा संगठनों को ‘टीम भावना’ और ‘अनुशासन’ का महत्व याद दिलाया।
डॉ. रमन सिंह के बहाने प्रधानमंत्री का बड़ा संदेश…
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने उद्बोधन में डॉ. रमन सिंह का उदाहरण देते हुए केवल एक व्यक्ति की प्रशंसा नहीं की,बल्कि राजनीति और संगठन जीवन को लेकर एक गहरा संदेश दिया, प्रधानमंत्री ने यह स्पष्ट किया कि राजनीति में परिवारवाद और अति महत्वाकांक्षा की जगह परिश्रम,अनुशासन और समर्पण को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जैसे खेल में कभी एक व्यक्ति कप्तान बनता है और कभी दूसरा,वैसे ही राजनीति में भी नेतृत्व का अवसर समय और परिस्थिति के अनुसार बदलना चाहिए, प्रधानमंत्री का यह संकेत साफ था कि किसी भी दल में एक ही व्यक्ति का लंबे समय तक शीर्ष पद पर बने रहना लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुकूल नहीं है,उन्होंने कहा कि मुख्य पद पर बैठे नेता को भी दूसरों को अवसर देना चाहिए,क्योंकि संगठन की ताकत तभी बढ़ती है जब हर कार्यकर्ता को जिम्मेदारी निभाने का मौका मिले। ‘डॉ. रमन सिंह कभी मुख्यमंत्री रहे, आज विधानसभा अध्यक्ष के रूप में सेवा कर रहे हैं। यह विनम्रता और समर्पण राजनीति में दुर्लभ है।- प्रधानमंत्री मोदी, प्रधानमंत्री का यह संदेश प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश के भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए एक सीख के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी में सफलता का मार्ग केवल अनुशासन,निष्ठा और ईमानदारी से दायित्व निभाने में है न कि गुटबाजी या दूसरों की योग्यता को दबाने की प्रवृत्ति में, राजनीतिक जानकारों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी का यह संदेश भाजपा के हर स्तर—बड़े नेताओं,पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं—के लिए समान रूप से लागू होता है,उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी में अपनी जगह बनाने या सुरक्षित रखने के लिए किसी अन्य की काबिलियत को असफल करने का प्रयास नहीं होना चाहिए।
भाजपा के लिए संदेश,दूसरों के लिए सीख…
प्रधानमंत्री का यह वक्तव्य न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए एक दिशा माना जा रहा है, उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी में अवसर और सम्मान मेहनत से मिलता है, न कि गुटबाजी से, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री ने यह संदेश देकर पार्टी के भीतर अनुशासन और एकता बनाए रखने की चेतावनी भी दी है। कांग्रेस के पतन का उदाहरण भी दिया संकेत में-प्रधानमंत्री ने बिना नाम लिए कहा कि जब राजनीति में पदलोलुपता और गुटबाजी हावी हो जाती है तो सत्ता का पतन निश्चित होता है, छत्तीसगढ़ की पिछली कांग्रेस सरकार के पतन को भी उन्होंने इसी प्रवृत्ति का परिणाम बताया।
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