कभी यहां से ग्रामीण क्षेत्रो की महिला समूहों को मिलता था रोजगार…

- फ्लाई ऐश ईंट,टेराकोटा,बांस गुड़ी काष्ट गुड़ी,दोनापत्तल,गोबर पेंट,आलू चिप्स,जैसे कई उपयोगी वस्तुओं का होता था निर्माण
- सरकार बदलने के बाद ठप्प हुआ रिपा प्रोजेक्ट,मशीन और भवन हो रहे कबाड़

-राजन पाण्डेय-
कोरिया/एमसीबी 18 अक्टूबर 2025 (घटती-घटना)। कोरिया एवं एम सी बी जिले में महात्मा गांधी ग्रामीण औद्योगिक पार्क यानी रिपा प्रोजेक्ट ठप पड़ा है। रिपा में स्वीकृत निर्माण कार्यों से लेकर जितने भी काम हो रहे थे वो सभी बंद हैं। आपको बता दें कि कोरिया और एमसीबी जिले में लगभग 10 रिपा प्रोजेक्ट शुरू हुए थे। लेकिन प्रोजेक्ट का कोई खास फायदा नहीं मिल सका। इन प्रोजेक्ट पर लगभग 20 करोड़ रुपए से अधिक की राशि खर्च की गई। अब हालात ये हैं कि ग्रामीण औद्योगिक पार्क वीरान पड़े हैं। इसमें महीनों से ताला लगा है,दरअसल रीपा प्रदेश में कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में ड्रीम प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किए गए थे,जहां गोबर पेंट इकाई, पेबर ब्लाक,फ्लाई एस ब्रिक्स,पेपर कप,बोरी बैग समेत अन्य उत्पादों का निर्माण स्व सहायता समूहों की मदद से कराया जाता था,लेकिन सरकार बदलने के बाद ग्रामीण औद्योगिक पार्क अब सफेद हाथी बने हुए हैं।
करोड़ों की मशीनें बन रही कबाड़
कोरिया और एमसीबी में जिन ग्रामीण औद्योगिक पार्कों की स्थापना की गई थी,वो बन्द मिले इन पार्कों के प्रोडक्शन यूनिट भी बंद मिले। आसपास के ग्रामीणों ने बताया कि रिपा केंद्रों में प्रोडक्शन का काम ठप है। सरकार बदलने के बाद से कोई काम नहीं हुआ। रिपा केंद्रों में काम करने वाली गांव की स्व सहायता समूह की महिलाओं ने नाम ना बताने की शर्त पर कहा कि उन्होंने शुरू के दिनों में काम किया काम अच्छा चला भी लेकिन अब अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। कोरिया जिले की आनी पिपरिया मझगवां कुशहा घुघरा पुश्ला में अलग-अलग युनिटो की स्थापना की गई कही पर ब्रेड यूनिट, पेबर ब्लॉक,फ्लाई ऐश ब्रिक्स शुरू हुआ तो कही दोना पत्तल टेराकोटा कही मिट्टी गुड़ी काष्ट गुड़ी बांस गुड़ी,कही घेरा जाली तो कही आलू चिप्स इस तरह से की कार्य शुरू हुए कुछ दिन चले भी लेकिन बाद में बन्द हो गए । एम सी बी की बात करें तो ग्राम पंचायत दुबछोला में रिपा प्रोजेक्ट शुरू ही नहीं हुआ। यहां लगी मशीनें इसी तरह पड़ीं रहीं तो धीरे-धीरे कबाड़ में तब्दील हो रही हैं। आनी गांव के रिपा केंद्र में मसाला उत्पादन यूनिट, दूध, बेकरी और मिलेट यूनिट अब बन्द है.ग्रामीणों ने कहा कि यहां क्या होता है,क्या बनता है,उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। जानवरों के लिए बने नाद खाली पड़े थे। स्व सहायता समूह मशरूम शेड, मुर्गी,बकरी पालन शेड बंद हैं, बकरी शेड में कबाड़ रखा हुआ था। केवीके दुग्ध यूनिट भी शिफ्ट नहीं हो सका।
पुश्ला में कई समान नदारत हो चुकी चोरी
पुश्ला गौठान में संचालित रिपा केंद्र में कई समान चोरी हो चुके हैं जिसकी रिपोर्ट पँचायत द्वारा थाने एवं विभाग में दी जा चुकी है,सामानों के अभाव में यह केंद्र भी बन्द पड़ा हुआ है यहां भी कई प्रकार के ग्रामीण उद्योगों का संचालन किया जाता रहा लेकिन आज वीरानी छाई हुई है।
वीरान गौठानो के पौधे अब फल देने लगे हैं…
जिले के गौठान तो अब वीरान हो गए कभी लेमन और अन्य ग्रास से आच्छादित गौठान की शोभा देखते बनती थी,बर्मी कम्पोस्ट बनना बन्द हुआ तो बनाई गई टँकी और अन्य संसाधन धीरे-धीरे खराब होने लगे और भवन के भी छप्पर की स्थानों पर उड़ गए हैं तो कही भवन जर्जर हो गया है। कुल मिला कर यह कहा जाए कि गौठान अब पुरी तरह वीरान हो गए तो गलत नही होगा, लेकिन गौठान में जो फल दार पेड़ लगाए गए थे वो अब फल देने लगे हैं गौठानो में लगे अमरूद के पेड़ इन दिनों फलों से लदे हुए हैं और बच्चे अमरूद का आनंद जरूर ले रहे हैं।
पिपरिया कुशहा के रिपा केंद्र में ताला
ग्राम पंचायत कुशहा एवं पिपरिया के रीपा प्रोजेक्ट में सभी यूनिट में ताला लगा हुआ है. फ्लाई ऐश, ईंट, गोबर पेंट से लेकर हर तरह का निर्माण बंद पड़ा है, अन्य उत्पाद भी तैयार नहीं हो रहे हैं. देखने पर लगा कि यहां लंबे समय से कार्य नहीं चल रहा है, ग्राम पंचायत घुघरा ,मझगवां में रीपा प्रोजेक्ट के तहत गोबर पेंट इकाई, पेबर ब्लाक, फ्लाई एस ब्रिक्स, पेपर कप, बोरी बैग समेत अन्य उत्पाद शुरू किए गए थे, लेकिन यहां भी सब कुछ बंद पड़ा है. यहां सभी कक्षों में ताला लगा हुआ है, पार्क का मुख्य गेट तो खुला था, लेकिन अंदर सुरक्षा के लिए कोई नहीं है.यहां स्वीकृत निर्माण भी अधूरे पड़े है,आपको बता दें कि रिपा केंद्रों को लेकर खण्ड स्तर के अफसरों के दावे कुछ और ही हैं, अफसर का कहना है कि जब डिमांड आती है तो रिपा केंद्र में काम करवाया जाता है, लेकिन मीडिया ने जिन केंद्रों का दौरा किया, वहां की मौजूदा हालत देखकर बिल्कुल भी नहीं लगता कि रिपा केंद्रों में कहीं से भी उत्पादन हो रहा है, बहरहाल करोड़ों रुपए खर्च करके जिस सपने के साथ इन केंद्रों को खोला गया था, वो सपना अब भी अधूरा है।
एमसीबी के भरतपुर में भी बन्द सभी प्रोजेक्ट
एमसीबी जिले के भरतपुर जनकपुर मुख्यालय में भी रिपा के तहत कई प्रोजेक्ट लगाए गए और काम भी शुरू हुआ समूह की महिलाओं ने अच्छी खासी आय अर्जित कर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम भी बढ़ाया लेकिन सरकार बढलने के बाद यहां भी प्रोजेक्ट बन्द हो गए और मशीनें धूल खा रही हैं, जनकपुर क्षेत्र के अधिकांश रिपा केंद्रों का यही हाल है साथ ही गौठानो में भी वीरानी छाई हुई है, भवन जर्जर हो रहे हैं गेट टूट चुके हैं कोई देखने वाला नही है।
इको फ्रेंडली गोबर पेंट का काम भी बन्द
गोबर से इकोफ्रेंडली पेंट बनाने की शुरुआत छत्तीसगढ़ में भी हुई, प्रदेश का पहला इकोफ्रेंडली पेंट बनाने की यूनिट राजधानी रायपुर से लगे एक गौठान में लगाई गई. जहां गाय के गोबर से पेंट निर्माण होना शुरू हुआ, इसके बाद कई जिलों में काम शुरू हुआ रिपा प्रोजेक्ट के तहत अविभाजित कोरिया जिले में भी इसकी शुरुवात हुई लेकिन अब स्थिति ये है कि पेंट बनाने का सिस्टम धूल खा रहा है, पेंट मशीनें हालात ऐसे हैं कि पेंट बनना लगभग बंद हो गया है. बता दें कि सरकार के द्वारा ग्रामीणों के आय बढ़ाने के उद्देश्य से गाय के गोबर से प्राकृतिक पेंट बनाने के लिए प्लांट खोला गया, जहां गोबर से इकोफ्रेंडली पेंट का निर्माण किया जाता रहा, सरकार का लक्ष्य था कि गोबर से पेंट बनाने की योजना से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, साथ ही गोबर से तैयार होने वाला पेंट जैविक और सस्ता होगा, साथ ही पर्यावरण को नुकसान भी नहीं पहुंचाएगा।
सरकार बदलने से रिपा के कार्य हुए बन्द:ज्योत्स्ना राजवाड़े
सोनहत की पूर्व जिला पंचायत सदस्य ज्योत्स्ना राजवाड़े ने कहा की रिपा पूर्व सरकार की महत्वकांक्षी योजना थी, जिससे ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को जोड़ा गया था, महिला समूहों को काम भी मिला कई समूहों ने बहुत अच्छा काम भी किया, ईंट निर्माण से लेकर राइस मिलिंग, टेराकोटा के कार्यो से महिलाएं आत्म निर्भर बनने लगी थी लेकिन प्रदेश में जब से सरकार बदली योजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया, अब सुन सान पड़े रिपा केंद्रों में मशीनों और रिपा केंद्रों को अराजक तत्व नुकसान पहुंचा रहे हैं।
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