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कोरिया@सेवानिवृत्त प्रभारी प्राचार्य शासकीय रामानुज प्रताप सिंहदेव बैकुंठपुर अखिलेश चंद्र गुप्ता के विरुद्ध पीएमओ में हुई शिकायत की जांच अब आयुक्त उच्च शिक्षा रायपुर के जिम्मे…क्या होगी जांच?

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-रवि सिंह-
कोरिया,18 सितंबर 2025 (घटती-घटना)। अंततः अब दो दशकों से भी ज्यादा समय तक हुए जिले के अग्रणी महाविद्यालय शासकीय रामानुज प्रताप सिंहदेव महाविद्यालय के भ्रष्टाचार की जांच होने की उम्मीद जगी है और लगता है इस बार की जांच में भ्रष्टाचार का मामला उजागर होगा और दोषी सेवानिवृत्त प्रभारी प्राचार्य अखिलेश चंद्र गुप्ता के स्वत्व भुगतान से पहले जांच पूर्ण कर ली जाएगी। यह जांच आयुक्त उच्च शिक्षा रायपुर के द्वारा की जाए इस आशय का एक अनुरोध पत्र कलेक्टर कोरिया द्वारा आयुक्त उच्च शिक्षा रायपुर को भेजा जा चुका है जिसमें शिकायत जो 12 बिंदुओं अनुसार की गई है के जांच की मांग की गई है।
बता दें कि कोरिया जिले के अग्रणी महाविद्यालय शासकीय रामानुज प्रताप सिंहदेव महाविद्यालय में दो दशकों से ज्यादा समय तक एक ही व्यक्ति जुगाड और प्रभाव से प्रभारी प्राचार्य पद संभालता रहा और उसके द्वारा महाविद्यालय में महाविद्यालय के विभिन्न मदो में जमकर भ्रष्टाचार किया गया ऐसा बताया जाता है,जब उक्त प्रभारी प्राचार्य के सेवानिवृत्ति का समय आया और अन्य को महाविद्यालय का प्रभार मिला तब भी सेवानिवृत्त होकर भी अखिलेश चंद्र गुप्ता ने सम्पूर्ण प्रभार नहीं दिया बल्कि महाविद्यालय के कई कक्षों में ताला बंद कर सील कर कई महीनों तक उनके द्वारा रखा गया,वहीं जब अखिलेश चंद्र गुप्ता को यह एहसास हो गया कि प्रभार देना ही पड़ेगा तब उन्होंने चुपके से महाविद्यालय पहुंचकर कई महत्वपूर्ण दस्तावेज को आग के हवाले कर दिया और तब जाकर उन्होंने बंद कमरों को खोल दिया, दस्तावेज जो जलाए गए वह बड़े भ्रष्टाचार के सबूत थे जिसे दो दशकों से ज्यादा समय तक प्रभारी प्राचार्य रहे अखिलेश चंद्र गुप्ता ने मिटाने का काम किया ऐसा माना जा रहा है। वैसे महाविद्यालय के कैसबुक,लेजर,स्टॉक पंजी सहित विभिन्न पंजीयों को देखकर सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस तरह अखिलेश चंद्र गुप्ता भ्रष्टाचार को अंजाम दे रहे थे और किस तरह वह उच्च शिक्षा प्राप्त करने महाविद्यालय आने वाले छात्रों के शिक्षा उद्देश्य से प्रदान राशि का दुरुपयोग कर रहे थे। अग्रणी महाविद्यालय के 26 वर्षों तक साथ ही जिले के अन्य महाविद्यालयों के भी प्रभार में समय समय पर रहे सेवानिवृत्त प्रभारी प्राचार्य अखिलेश चंद्र गुप्ता के सम्पूर्ण कार्यकाल की जांच संबधी आवेदन सह शिकायत पत्र प्रधानमंत्री कार्यालय भारत सरकार को शिकायतकर्ता द्वारा भेजी गई थी जिसके बाद उक्त जांच कार्यवाही के लिए कलेक्टर कोरिया द्वारा पत्र आयुक्त उच्च शिक्षा रायपुर को भेजा गया है।
अखिलेश चंद्र गुप्ता की सहायक प्राध्यापक धर्मपत्नी के कार्यकाल की भी जांच की हुई है मांग
शिकायतकर्ता ने अखिलेश चंद्र गुप्ता की सहायक प्राध्यापक पत्नी डॉक्टर प्रीति गुप्ता के कार्यकाल की भी जांच की मांग की है,अभी वह पोड़ी बचरा नवीन महाविद्यालय की प्रभारी प्राचार्य हैं,बताया जाता है कि वहां भी उधार के भवन में जमकर खरीदी की गई है जो अखिलेश चंद्र गुप्ता ने ही की है,पत्नी को प्रभारी प्राचार्य बनाकर एक अलग महाविद्यालय के नवीन अस्तित्व को खोखला करने का पूरा दिमाग अखिलेश चंद्र गुप्ता ने लगाया था ऐसा बताया जाता है और महाविद्यालय उनकी पत्नी गाहे बगाहे ही जाती हैं शेष वह अग्रणी महाविद्यालय में ही आ जाकर अपना समय व्यतीत कर रही हैं,शिकायत में पोड़ी बचरा नवीन महाविद्यालय की सम्पूर्ण खरीदी और उसके भौतिक सत्यापन की मांग की गई है। पोड़ी बचरा नवीन महाविद्यालय आज अपनी बदहाली के लिए जाना जा रहा है जहां छात्र और छात्रा महाविद्यालय त्यागने के विचार के साथ किसी तरह अध्ययन करने पहुंच रहे हैं ऐसा छात्रों का ही कहना है।
जांच से साबित होगा जिले की उच्च शिक्षा संस्थान को एक व्यक्ति ने निजी हितों के लिए जमकर लुटा
शिकायतकर्ता के अनुसार यदि शिकायत की जांच ठीक ढंग से हुई और जांच में शिकायत की प्रत्येक बिंदु को आधार मानकर जांच हुई एक बड़े भ्रष्टाचार का पर्दाफाश होगा,कैसे एक व्यक्ति निजी हित साधने उच्च शिक्षा संस्थान को लूटता रहा और अपनी जेब भरता रहा यह सामने होगा,संपत्तियों में इजाफा और बैंक बैलेंस में अथाह वृद्धि भी भ्रष्टाचार बताने काफी होगा। शिकायतकर्ता के अनुसार अब जांच उच्च शिक्षा विभाग के पास है जिसे जांच करनी चाहिए और जांच में दोषी पाए जाने पर अखिलेश चंद्र गुप्ता की सेवानिवृत्ति स्वत्व भुगतान जो शेष है से वसूली होनी चाहिए।वैसे देखना है कि अब जांच कब तक सम्पन्न की जाती है और कब सत्य सामने आएगा।
लैब सहित खेल शाखा की जांच से भी सामने आएगा अखिलेश चंद्र गुप्ता का भ्रष्टाचार,शिकायत में यह भी उल्लेखित है…
शिकायतकर्ता ने अपने शिकायत पत्र में उल्लेखित किया है कि अखिलेश चन्द्र गुप्ता ने प्रभारी प्राचार्य रहते हुए महाविद्यालय में जितनी भी खेल सामग्रियां या लैब से सम्बन्धित सामग्रियां खरीदी हैं सभी जांच का विषय हैं,अखिलेश चंद्र गुप्ता ने इन खरीदियों में भी अपनी जेब गर्म जमकर की है, शिकायतकर्ता के अनुसार अखिलेश चंद्र गुप्ता खरीदी करके जल्द अपलेखन में विश्वास करते थे और लैब और खेल सामग्रियां ऐसे ही खरीदी और अपलेखित की जाती थीं,यह अलग तरह का भ्रष्टाचार था जिसमें पकड़े जाने की संभावना कम हुआ करती थी, अखिलेश चंद्र गुप्ता महाविद्यालय को दीमक की तरह खोखला करते गए शिकायत की मूल भावना यही मानी जा सकती है और इसी के जांच की मांग की गई है जिसके बाद प्रधानमंत्री कार्यालय ने शिकायत को जांच योग्य माना है।
खाते में राशि प्राप्त कर महाविद्यालय व्यय का भुगतान किया जाना अनुचित,क्रय नियम की अवहेलना
अखिलेश चंद्र गुप्ता की शिकायत जो प्रधानमंत्री कार्यालय भारत सरकार को की गई है उसमें इस विषय के जांच की भी मांग की गई है कि अखिलेश चन्द्र गुप्ता जो प्रभारी प्राचार्य थे कभी नियमानुसार या क्रय नियम के अनुसार भुगतान महाविद्यालय संबधी व्ययों नहीं किया करते थे,शिकायत अनुसार पांच हजार से अधिक राशि की खरीदी कोटेशन मंगाकर किए जाने का प्रावधान शासकीय है जबकि अखिलेश चंद्र गुप्ता डेढ़ लाख तक की खरीदी में भी क्रय नियम का पालन नहीं किया करते थे सीधे भुगतान किया करते थे अपने हाथों से,इसी तरह मजदूरी भुगतान भी वह स्वयं किया करते थे जबकि मनरेगा मजदूर को भी दैनिक मजदूरी का भुगतान उसके खाते में किया जाता था। बताया जाता है ऐसा वह केवल भ्रष्टाचार के लिए किया करते थे और पैसा अपनी जेब में डाला करते थे,इन विषयों की जांच होने पर अखिलेश चंद्र गुप्ता दोषी साबित होंगे और बड़े भ्रष्टाचार से पर्दा उठ सकेगा ऐसा शिकायतकर्ता का शिकायत में कहना है।
प्रधानमंत्री कार्यालय में की गई शिकायत,जांच के लिए आयुक्त उच्च शिक्षा रायपुर को लिखा गया पत्र
जिले के शासकीय रामानुज प्रताप सिंहदेव महाविद्यालय के सेवा निवृत्त प्राचार्य साथ ही महाविद्यालय या जिले के अन्य महाविद्यालयों के क्रमशः साथ ही साथ 26 सालों तक प्रभारी प्राचार्य बनने का सौभाग्य प्राप्त करने वाले जिला मुख्यालय निवासी अखिलेश चंद्र गुप्ता की सम्पूर्ण कार्यकाल की कार्यप्रणाली दोषपूर्ण और भ्रष्टाचार से जुड़ी हुई थी इस आशय की शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय भारत सरकार को की गई है,शिकायत में बताया गया है कि किस तरफ अखिलेश चंद्र गुप्ता ने पद का दुरुपयोग कर महाविद्यालय को आर्थिक नुकसान पहुंचाया है और महाविद्यालय की राशि का दो दशकों से ज्यादा समय तक बंदरबांट किया है। शिकायतकर्ता ने शिकायत पत्र में मांग की है कि सेवानिवृत्त प्रभारी प्राचार्य अखिलेश चंद्र गुप्ता के सम्पूर्ण सेवाकाल को लेकर जांच की आवश्यकता है और जिसके बाद बहुत बड़े भ्रष्टाचार से पर्दा उठना तय है।
कैशबुक सहित अन्य कार्यालय उपयोग में आने वाली आर्थिक आय व्यय संबधी पंजीयों में है भारी अनियमितता
शिकायतकर्ता ने प्रधानमंत्री कार्यालय को लिखे गए शिकायत पत्र में उल्लेख किया है कि अखिलेश चन्द्र गुप्ता सेवानिवृत्त प्रभारी प्राचार्य शासकीय रामानुज प्रताप सिंहदेव महाविद्यालय बैकुंठपुर ने महाविद्यालय में अपने 26 वर्षों के कार्यकाल में काफी अनियमितताएं प्रभारी प्राचार्य बतौर की है,शिकायतकर्ता के अनुसार अखिलेश चंद्र गुप्ता ने कैशबुक का प्रभार खुद के पास रखा था और जिसमे आय व्यय का लेखन कार्य वह खुद किया करते थे,ऐसा वह अपने भ्रष्टाचार को उजागर होने से बचाने के लिए किया करते थे,अखिलेश चंद्र गुप्ता कैशबुक किसी लिपिक को लेखन कार्य के लिए नहीं सौंपते थे जिससे किसी गलती पर वह वोकार्यवाही कर सकें या किसी लिपिक पर त्रुटि होने पर कभी भी जवाबदेही तय की जा सके। इन सबके पीछे की मंशा केवल भ्रष्टाचार था,शिकायतकर्ता के अनुसार अखिलेश चंद्र गुप्ता द्वारा कैशबुक में चार सालों का योग ही नहीं किया गया है जो गम्भीर श्रेणी की अनियमितता और भ्रष्टाचार है। कैशबुक में कहीं पर भी कैंसिल कहीं भी कटपिट कई बार है जिसकी सत्यापित छायाप्रति शिकायतकर्ता के पास है और जो साबित करती है कि किस तरह स्वेच्छाचारिता पूर्ण कार्यप्रणाली के साथ चलकर बड़े भ्रष्टाचार को उच्च शिक्षा संस्थान में अंजाम दिया गया है।
सेवाकाल के अंतिम माह में अखिलेश चंद्र गुप्ता ने महाविद्यालय के 40 लाख किए खर्च
अखिलेश चंद्र गुप्ता के कार्यकाल की जांच की मांग के साथ प्रधानमंत्री कार्यालय भारत सरकार को लिखे गए शिकायत पत्र में शिकायतकर्ता ने उल्लेखित किया है कि अखिलेश चंद्र गुप्ता जो 26 वर्षों तक अग्रणी महाविद्यालय कोरिया के प्रभारी प्राचार्य रहे ने अपने पूरे कार्यकाल में जमकर भ्रष्टाचार किया है,उन्होंने भ्रष्टाचार की अपनी आदत को सेवाकाल के अंतिम समय तक बरकरार रखा था और सेवानिवृत्ति वाले माह भी उन्होंने महाविद्यालय के 40 लाख का आहरण किया। वह चाहते यह आहरण अन्य अगले प्राचार्य के जिम्मे छोड़ सकते थे लेकिन ऐसा न करते हुए उन्होंने 40 लाख रुपए निकाले और जिसे वह बंदरबांट कर ले गए,वैसे अखिलेश चंद्र गुप्ता ने अपने सेवाकाल के अंतिम माह के अंतिम दिन भी महाविद्यालय से राशि आहरित की है जिसका उपयोग खुद की ही विदाई पार्टी आयोजन में किया गया उनके द्वारा यह भी एक जांच का तथ्य है, इस तरह के भ्रष्टाचार से उच्च शिक्षा का मंदिर दूषित हुआ है और इसकी जांच होनी चाहिए अखिलेश चंद्र गुप्ता के स्वत्व भुगतान पर रोक लगाकर वसूली होनी चाहिए यह शिकायतकर्ता की मांग है।


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