- क्या सत्ताधारी दल के मुख्यमंत्री मंत्री और विधायक विपक्ष की मांगो पर विचार नहीं कर सकते?
- राजनीति में अचानक इस प्रकार का बदलाव क्या देश के लिए घातक साबित होगा?
- सदन में नेताओं के विचारों के सही गलत के फैसले अब सिर्फ राजनीतिक फैसला हो गए?

-रवि सिंह-
कोरिया,15 सितंबर 2025 (घटती-घटना)। किसी भी राज्य या देश में सरकार गठित होने के बाद वह सरकार सभी की हो जाती है हर किसी को सरकार से अपने अनुसार मांग करने का अधिकार होता है,यहां तक की राजनीतिक पार्टियां भी भले ही अलग-अलग विचारधाराओं की होती हैं पर जब सत्ता पर आसीन होती हैं तो सभी की बात सुनने की परम्परा होती है,पर क्या आजकल राजनीति की आबोहवा खराब हो रही है? यह सवाल इसलिए हो रहा है क्योंकि अब पूर्व मुख्यमंत्री व वर्तमान सांसद यदि राज्य के मुख्यमंत्री को पत्र लिख रहे हैं और कुछ मांग कर रहे हैं तो क्या उस पर सरकार को पुनर्विचार नहीं करना चाहिए क्या वह पत्र सिर्फ कागज के टुकड़े हैं या फिर विपक्षी पार्टी की मांग है,विपक्ष के पत्र है इसलिए उस पर विचार नहीं किया जा सकता क्या, अब सदन में या फिर संविधान में या फिर सुनने की क्षमता में कमी आ गई है,या फिर राजनीतिक दलों की सिर्फ अपनी ही सरकार के कार्यकाल में ही सुनवाई होगी,जिस दल की सरकार है वही उनकी बात सुनेगी, दूसरे दल की बात मौजूदा सरकार नहीं सुनेगी क्या यही अब नई संस्कृति होने वाली है अब सदन में वह गरिमा नहीं रह जाएगी जो पहले दिखा करती थी वर्तमान राजनीति में कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है यदि वर्तमान सत्ताधारी सरकार से विपक्ष कोई मांग करेगा तो वह पूरी नहीं होगी, उनके मांग पत्रों पर विचार नहीं किया जाएगा क्योंकि यह जीता जागता उदाहरण कोरिया जिले के महाविद्यालय के मामले में देखा गया है जब पूर्व मुख्यमंत्री वर्तमान सांसद ने मुख्यमंत्री से महाविद्यालय परिसर में पुलिस अधीक्षक कार्यालय ना बनाने की मांग की तो उस पर कोई भी विचार नहीं हुआ बल्कि निर्माण कार्य तेज कर दिया गया सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई।

मामला कोरिया जिले में नए पुलिस अधीक्षक कार्यालय भवन का है जो महाविद्यालय परिसर में बन रहा है और जिसका महाविद्यालय प्रबंधन,छात्र नागरिक सभी विरोध कर रहे हैं निर्माण अन्यत्र किए जाने की मांग कर रहे हैं। जन अपेक्षा महाविद्यालय परिसर में पुलिस अधीक्षक कार्यालय निर्माण के खिलाफ है जिसमें छात्र महाविद्यालय प्रबंधन की भी इसी तरह की मंशा शामिल है,जन अपेक्षा को देखते हुए विपक्ष जन अपेक्षा के पक्ष में है और वह लगातार अलग अलग स्तर से यह मांग कर रहा है कि पुलिस अधीक्षक कार्यालय अन्यत्र बनाया जाए महाविद्यालय परिसर में यह न बनाया जाए जिससे महाविद्यालय का विस्तार और छात्रों की स्वतंत्रता बाधित हो वहीं इसके विपरीत जिला प्रशासन और सत्ताधारी दल के नेता अडिग हैं निर्णय पर और वह हर हाल में निर्माण स्थल परिवर्तन का विचार त्याग चुके हैं। इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री, क्षेत्रीय सांसद जो विपक्षी दल के हैं ने भी जन अपेक्षा अनुसार मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है और जिसमे उन्होंने मांग की है कि महाविद्यालय परिसर से अन्यत्र बनाया जाए पुलिस अधीक्षक कार्यालय,वैसे इन पत्रों के बाद अब निर्माण कार्य में अतिरिक्त प्रगति नजर आने लगी है और सुरक्षा व्यवस्था भी तगड़ी नजर आने लगी है,जिला प्रशासन किसी भी स्थिति में निर्माण स्थल को लेकर समझौता करता नजर नहीं आ रहा है जिससे यह साफ होता जा रहा है कि मुख्यमंत्री को लिखे गए पत्र नाकाफी साबित हो चुके हैं और पत्र भले ही किसी ने लिखा हो। वैसे इस विषय में यह सवाल लाजमी है कि क्या अब विपक्ष की बातें अनसुनी ही होती ही रहने वाली हैं सरकार भले किसी की हो,वैसे यह वैसा ही अनुसरण भी है जैसा जिला विभाजन के समय नजर आया था तब भी तात्कालिक सत्ता ने विरोध को अनसुना किया था। वैसे यह नई परम्परा लोकतंत्र के लिए घातक साबित होगी यह तय है क्योंकि ऐसे में विपक्ष की भूमिका ही समाप्त हो जाएगी वह अप्रासंगिक होता चला जाएगा।

भाजपा विपक्ष में जिला नहीं बचा पाई और कांग्रेस विपक्ष में महाविद्यालय नहीं बचा पाएगी?
वैसे कोरिया जिले में लगातार जो देखने को मिलता चला आ रहा है उसके बाद एक सवाल जरूर खड़ा होता है कि क्या पुलिस अधीक्षक कार्यालय महाविद्यालय परिसर में बनकर रहेगा,क्या कांग्रेस इस निर्माण को अन्यत्र स्थापित करवा पाने में विफल हो चुकी है,वैसे यह वैसी ही पुनरावृत्ति है जैसा जिला विभाजन के दौरान नजर आया था,तब सरकार कांग्रेस की थी और जिला विभाजन का विरोध भाजपा के नेता कर रहे थे और तब भी निर्णय पर तब की सरकार अडिग थी और कोरिया जिले को एक तरह से अस्तित्वहीन अप्रासंगिक तब के विधायक के कार्यकाल में कर दिया गया था जो आज तक अप्रासंगिग ही चला आ रहा है,वैसे जिस तरह भाजपा जिला विभाजन नहीं रोक पाई उसी तरह कांग्रेस महाविद्यालय परिसर में पुलिस अधीक्षक कार्यालय का निर्माण नहीं रोक पाएगी क्या यह तय हो चुका है? पुलिस अधीक्षक कार्यालय निर्माण के पक्ष में स्थानीय विधायक सहित पूरी भाजपा खड़ी नजर आ रही है और एक तरफ जनविरोधी खड़ा है,कांग्रेस जनविरोधी को अपने पक्ष में साधने तैयार तो नजर आ रही है लेकिन अपनी ही जिला विभाजन वाली करनी उसके पैरों की जंजीर बनती नजर आ रही है जो उसे कदम बढ़ाने की बजाए वापस लेने विवश करती नजर आ रही है।
विपक्ष धरने से क्यों डर रहा है?
जिला विभाजन कोरिया जिले के लिए एक काला अध्याय माना जाएगा यह कहीं से संशय का विषय नहीं है और ऐसा माना भी जाता है,जिला विभाजन के निर्णय उपरांत तब का विपक्ष महीने भर के धरने पर बैठा था और जिसे अपार जन समर्थन मिला था,यह अलग बात है नेतृत्व भाजपा के एक शहर नेता ने किया था लेकिन समर्थन उन्हें पूरे जिले के लोगों का मिला था अपार समर्थन जिसे कहा जा सकता है,जिला विभाजन तय था जानते हुए क्योंकि यह तत्कालीन स्थानीय विधायक की मंशा भी थी आंदोलन धरना भाजपा ने दिया था गलत का विरोध किया था वहीं आज जब कांग्रेस महाविद्यालय परिसर में पुलिस अधीक्षक कार्यालय निर्माण का विरोध करती नजर आ रही है,लगातार पत्राचार और बयान जारी कर रही है क्यों धरना प्रदर्शन नहीं कर रही है बड़ा सवाल है। क्या वह केवल और केवल राजनीतिक लाभ लेने बयानबाजी तक ही सीमित रहकर श्रेय की राजनीति कर रही है,यदि गलत है निर्णय और कांग्रेस को लगता है उन्होंने एक भी धरना प्रदर्शन नहीं किया क्यों यह सवाल उठता रहेगा।
कोरिया बचाने के लिए संघर्ष समिति बनी थी महाविद्यालय बचाने के लिए कोई अतिरिक्त प्रयास नहीं…
जिला विभाजन हुआ जिला बचाओ संघर्ष समिति बनी,तब जिले के लोगों का समर्थन मिला और दलगत भावना से अलग जाकर जिलेवासियों ने संघर्ष समिति का साथ दिया था,आज महाविद्यालय परिसर में पुलिस अधीक्षक कार्यालय बन रहा है,इसे गलत निर्णय बतलाया जाया जा रहा है प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस भी इसे सही निर्णय नहीं बतला रही है फिर भी कोई समिति इसे बचाने नहीं बनाई गई और न ही कोई संघर्ष नजर आया। केवल बयान है बयान विरोध में सुनाई दिए पत्राचार की बातें सामने आई प्रत्यक्ष संघर्ष या किसी समिति का गठन भी नजर नहीं आया। विरोध मौखिक लिखित ही देखने सुनने मिलता रहा जो जारी है।
विपक्ष का विरोध और निर्माण कार्य में तेजी यह उदाहरण है कि सत्तापक्ष विपक्ष को पूर्व की उसकी गलती याद दिला रहा है?
महाविद्यालय परिसर में पुलिस अधीक्षक कार्यालय निर्माण का निर्णय गलत है इससे महाविद्यालय का विस्तार प्रभावित होगा इससे छात्रों की स्वतंत्रता बाधित होगी इस तथ्य के साथ सबसे पहले विरोध छात्र संघ,छात्र और महाविद्यालय प्रबंधन को करते देखा गया।जब तक विपक्ष कांग्रेस विरोध में सामने नजर नहीं आई तब तक निर्माण भी धीमी गति से जारी नजर आया। जैसे ही कांग्रेस ने विरोध में शामिल होने की घोषणा की सत्ता पक्ष का संगठन भी निर्माण के पक्ष में सामने आया और निर्माण और प्रगति के विरोध को गलत बताते हुए विकास को अवरुद्ध न करने की बात प्रसारित की,कुल मिलाकर देखा जाए तो कांग्रेस के विरोध में सामने आते ही सत्ता पक्ष ने यह जता दिया कि जिला विभाजन तब कांग्रेस का गलत निर्णय था जिस निर्णय के कारण जिला आज अपनी बदहाली के लिए जाना जा रहा है,कांग्रेस के विरोध में सामने आते ही निर्माण कार्य में तेजी आई और अब सुरक्षा के साथ निर्माण कार्य काफी तेजी से किया जा रहा है,यह विपक्ष कांग्रेस को एक सीख या संदेश देने जैसा मामला लगता है जिसमें उन्हें बताया जा रहा है कि अपने निर्णय पर तब आप अडिग नहीं रहे होते जिला संपूर्ण होता सम्पन्न होता और आज जिले की यह स्थिति नहीं होती,तब विपक्ष की आवाज आपने सुनी होती आज हम भी आपकी आवाज अनसुनी नहीं करते।
क्या कोरिया जिले की कलेक्टर पुलिस अधीक्षक कार्यालय के लिए निर्विवाद भूमि नहीं खोज सके?
कोरिया जिले में बन रहा पुलिस अधीक्षक कार्यालय आज सुर्खियों में है,ऐसा इसलिए है क्योंकि काफी मशक्कत के बाद पुलिस अधीक्षक कार्यालय के लिए भूमि की उपलब्धता हो सकी है और वह भी तब जब कई जगह चयनित भूमि पर निर्माण की सहमति नहीं बनाई जा सकी और अंत में महाविद्यालय परिसर को ही आसान स्थल माना गया,आज भवन निर्माण जारी है और एक तरफ जन विरोध भी खड़ा है,अब सवाल यह है कि क्या कलेक्टर कोरिया अथक प्रयास के बावजूद निर्विवाद भूमि नहीं ढूंढ पाईं। आज यह विषय छात्र,संगठन,महाविद्यालय प्रबंधन, विपक्ष के लिए विरोध का मुद्दा है और यह विरोध होगा क्या यह पूर्व अनुमान जिला प्रशासन नहीं लगा पाया।वैसे महाविद्यालय परिसर में निर्माण के दौरान विरोध होना तय है क्या यह जिला प्रशासन जानता था और इसलिए ही भूमिपूजन उपरांत ही निर्णय सामने आया।

अफवाह है कि पुलिस अधीक्षक कार्यालय के लिए दूसरी भूमि खोजी जा रही है, जब भूमि खोजी जा रहा है तो फिर निर्माण कार्य बंद क्यों नहीं है?
अफवाह है कि पुलिस अधीक्षक कार्यालय के निर्माण के लिए दूसरी भूमि तलाशी जा रही है,वैसे महाविद्यालय परिसर की भूमि पर कड़ी सुरक्षा में तेजी से नए भवन का निर्माण कार्य भी जारी है,ऐसे में यदि भूमि नई तलाशी जा रही है तो क्यों फिर तेजी से निर्माण कार्य जारी है यह बड़ा सवाल है।
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