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एमसीबी@क्या डॉक्टर अपनी शक्तियों का गलत उपयोग कर सरकार को भी झुकने मजबूर करने का रखते हैं माद्दा?

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-रवि सिंह-
एमसीबी,31 अगस्त 2025 (घटती-घटना)।
प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी कई खामियां लगातार सामने आ रही हैं,खामियों का सीधा आरोप भी सरकार सहित स्वास्थ्य विभाग पर लग रहा है और इस बीच स्वास्थ्य मंत्री आरोप से बरी हैं ऐसा नहीं है लोग उन्हें भी स्वास्थ्य व्यवस्था की खामियों का जिम्मेदार बताने से पीछे नहीं हट रहे हैं और यह सब कुछ लगातार जारी है, इस बीच स्वास्थ्य मंत्री ने सभी सरकारी अस्पतालों में यह निर्देशित किया है कि वहां कार्यरत साथ ही जिम्मेदार लोगों के मोबाइल नम्बर अस्पताल के सामने चस्पा किए जाएं, जिससे मरीज और उसके साथ इलाज में सहयोगी बनकर आए किसी परिजन को दिक्कत परेशानी कम से कम इलाज संबंधी न हो। सभी जगह आदेश जारी होने उपरांत उसका पालन भी होने लगा है और स्वास्थ्य मंत्री के गृह जिले में भी इसका पालन हो रहा है लेकिन सवाल यह है कि क्या ऐसा करने से मोबाइल नंबर जारी हो जाने मात्र से ही सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था सुदृढ़ हो जाएगी और सबकुछ सुधर जाएगा? मरीजों को और उसके साथ आए सहयोगी परिजनों को दिक्कतों से छुटकारा मिल जाएगा? यदि इस सवाल पर विचार किया जाए तो यह संभव नहीं? क्योंकि सरकारी अस्पतालों के डॉक्टर जबतक निष्ठावान नहीं होंगे अपने कर्तव्य के प्रति कोई निर्देश कोई कड़ाई कोई आदेश व्यवस्था सुधार के लिए कारगर नहीं होगा और सब कुछ पहले जैसा ही नजर आएगा और जो जैसा चल रहा है वह जारी रहेगा।
बता दें की सरकारी अस्पतालों में पदस्थ कार्यरत डॉक्टर समय अनुसार केवल अस्पताल में आना जाना मात्र करते हैं कुछ डॉक्टरों को छोड़ दें जिन्हें अपवाद कहा जा सकता है तो अधिकाशं को अपनी निजी प्रेक्टिस के बाद जो समय बच जाता है उसी हिसाब से वह अस्पतालों में पहुंचते हैं,समय उपरांत जो अस्पताल में डॉक्टरों के आने का डॉक्टर निजी प्रेक्टिस को ज्यादा या यह कहें केवल तवज्जो देते हैं और वह किसी भी परिस्थिति में अस्पताल कार्यविधि के बाद अस्पताल जाकर सेवा प्रदान करने की मंशा नहीं रखते, हां किसी प्रभावशाली की बात को यदि छोड़ दिया जाए तो। डॉक्टरों को लेकर सरकार और विभाग भी काफी संयम से काम लेता है क्योंकि डॉक्टर ज्यादा दबाव में काम करने की परिस्थितियों में सरकार पर काम छोड़कर जाने जैसा भी दबाव बनाते हैं चूंकि ऐसे में लोगों की जान का सवाल खड़ा हो जाता है सरकार को भी कहीं न कहीं झुकाना पड़ जाता है। देखा जाए तो सरकारी अस्पताल भले ही सरकार के स्वास्थ्य विभाग द्वारा शासकीय रूप से संचालित है लेकिन यह ऐसा विभाग है जहां दबाव डालकर काम ले पाना काफी कठिन काम है। किसी भी प्रदेश की बात करें यह हर जगह सामने आता है कि स्वास्थ्य विभाग और स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं कठिनाइयों से जुड़ी खबरें सामने आती रहती हैं और ऐसा केवल इसलिए है क्योंकि चिकित्सा क्षेत्र में लाभ उद्देश्य ज्यादा होता है सेवा उद्देश्य कम,निजी अस्पतालों में चूंकि चिकित्सक ही संचालक होता है और वह हर स्थिति में अपने अस्पताल को तैयार रखता है जिससे सरकारी और निजी अस्पतालों की तुलना में निजी हमेशा बेहतर पाए जाते हैं, सरकारी स्वास्थ्य विभाग में डॉक्टर जिस दिन अस्पताल को अपना मान लेगा अस्पतालों की व्यवस्था बेहतर हो जाएगी यह कहना कहीं से गलत नहीं होगा।
वेतन सरकार से और सेवा निजी क्लिनिक में,यह व्यवस्था ही सरकारी अस्पतालों की दुर्दशा का कारण
सरकारी अस्पतालों की दुर्दशा का सबसे बड़ा कारण यह है कि वहां कार्यरत डॉक्टर सरकारी अस्पताल से ज्यादा निजी क्लिनिक में समय देते हैं वहां समर्पित नजर आते हैं,सरकारी अस्पताल में वह इतना ही जाना पसंद करते हैं जिससे उनका महीने का वेतन प्राप्त हो सके। इन डॉक्टरों का मनोबल बढ़ने के पीछे का कारण भी ज्यादातर यह है कि जो लोग व्यवस्था सुधार के लिए आवाज उठा सकते हैं वह ऐसे डॉक्टरों से घर में जाकर निःशुल्क इलाज करा लेते हैं और डॉक्टरों को यह आभास हो जाता है कि उनकी आलोचनाओं और उनके विरोध को वह इस तरह रोक चुके हैं जिसमें वह विरोध करने वाले और आलोचना कर सकने वाले लोगों का वह इलाज घर पर निशुल्क कर रहे हैं जिससे वह विरुद्ध नहीं जायेंगे उनके।
मोबाइल नंबर जारी होने मात्र से क्या होगा व्यवस्था में सुधार,क्या शिकायत नंबर की आवश्यकता नहीं पड़ने वाली?
प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री ने सरकारी अस्पतालों में अब नंबर चस्पा करना अनिवार्य कर दिया है,यह उनके नंबर होंगे जो जिम्मेदार हैं किसी अस्पताल के,अब इन नंबरों से मरीज और उसके साथ सहयोगी बनकर गए परिजन सीधा संपर्क कर पाएंगे जिम्मेदार से अस्पताल के जिनसे उन्हें उचित चिकित्सा या सुविधा मिल सके। वैसे सवाल यह है कि संपर्क नंबर तो उपलब्ध करा दिया गया है लेकिन यदि संपर्क नंबर वाले ने संपर्क के दौरान फोन नहीं उठाया मदद नहीं की तो ऐसे में ऐसा करने वाले पर जिम्मेदारी कैसे तय होगी, क्या इसके लिए यह आवश्यक नहीं हो जाता कि एक शिकायत नंबर भी जारी किया जाए जिस पर वह लोग शिकायत करें जिनको सुविधा जिम्मेदारों ने प्रदान नहीं की। कुल मिलाकर केवल नंबर जिम्मेदार का उपलब्ध कराया जाना ही काफी नहीं होगा,स्वास्थ्य मंत्री इसके अतिरिक्त शिकायत नंबर भी जारी करें जो जिम्मेदारी तय करे और एक भय भी जिम्मेदार महसूस करें। अभी तो मोबाइल नंबर अस्पताल के बाहर चस्पा किए जा चुके हैं अब शिकायत नंबर भी जारी किया जाए तो निश्चित ही सुविधा में सुधार नजर आएगा।
क्या डॉक्टर सरकार को खुद के सामने झुकाने का रखते हैं माद्दा,उनकी काबिलियत सरकार को झुकने करती है मजबूर?
लगातार यह देखने को मिलता है और ऐसी शिकायत सामने आती है कि सरकारी अस्पतालों की स्थिति अच्छी नहीं है और कई बार इलाज के अभाव में गंभीर बीमारी या दुर्घटना में घायल मरीज की मृत्यु हो जाती है या उन्हें रेफर किया जाता है, ऐसा होने के पीछे की वजह यह होती है कि अस्पतालों में सुविधा का आभाव है यह कहना हर मामले में सही है ऐसा नहीं है, अधिकांश बार ऐसा होने के पीछे की वजह डॉक्टरों की और अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही होती है, लापरवाही पर विभाग कार्यवाही भी करता है लेकिन ऐसी कार्यवाही नहीं हो पाती जो नजीर बन सके और व्यवस्था हमेशा के लिए सुधर सके। किसी बड़ी कार्यवाही के नहीं होने के पीछे का कारण यह माना जाता है कि डॉक्टरों खासकर विशेषज्ञ डॉक्टरों की नाराजगी विभाग और सरकार नहीं लेना चाहते क्योंकि यदि वह नाराज हुए किसी तरह जारी स्वास्थ्य सुविधाएं प्रभावित हो जाएंगी और स्वास्थ्य व्यवस्था का बुरा हाल हो जाएगा। अब सवाल यह है कि क्या सच में डॉक्टर सरकार और विभाग को खुद के सामने झुकाने का माद्दा रखते हैं और उनकी काबिलियत इसकी वजह है? वैसे यह कहना गलत नहीं है कि डॉक्टरों के मामले में सरकार और विभाग कुछ नरम पड़ती है क्योंकि उनकी नाराजगी स्वास्थ्य विभाग के लिए उचित नहीं होगी।
गलतियां अस्पताल के डॉक्टरों और कर्मचारियों की आलोचना सरकार और मंत्री की,यह परंपरा…
स्वास्थ्य विषयों में सरकारी अस्पतालों की बदत्तर हालत विषय में हमेशा आलोचना सरकार और विभागीय मंत्री की होती है जबकि हर सुविधा उपलब्ध होने उपरांत भी ऐसी स्थिति के लिए सीधे सरकार और मंत्री जिम्मेदार नहीं कहे जा सकते। सरकार और मंत्री केवल सुविधाओं की प्रदायता तय कर सकते हैं कड़े निर्देश वह अस्पताल संचालन के लिए जारी कर सकते हैं। अस्पताल में मरीजों को और उनके साथ आए सहयोगी साथी को कोई दिक्कत इलाज में न हो यह जिम्मेदारी डॉक्टरों सहित कर्मचारियों की होती है। वैसे आलोचना एक परम्परा है और एक तरह से यह एक चुनी सरकार के प्रति विपक्ष का एक जन आक्रोश उत्पन्न करने का हथियार भी है जिसका इस्तेमाल होता रहता है, व्यवस्था सुधारने केवल आलोचना ही कारगर साबित होने वाला है ऐसा नहीं है इसके लिए अस्पताल में कार्यरत डॉक्टरों सहित कमर्चारियों के अंदर सेवाभाव का होना ज्यादा आवश्यक है जिसके लिए उन्हें प्रेरित करने का काम आलोचक भी कर सकते हैं।


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