क्या सीएमओ ने अपने कार्यकाल में किए हैं भ्रष्टाचार जिस वजह से जांच से वह घबरा रहे हैं?
पटना नगर पंचायत में दो बार जांच दल पहुंच चुका पर दोनों बार चुपके से सीएमओ भाग निकले?
आखिर जांच से कब तक भागते रहेंगे पटना नगर पंचायत के सीएमओ?
क्या जांच दल के सामने नहीं आने और बार बार जांचदल से भागने मामले में कलेक्टर कोरिया सीएमओ पर करेंगी अनुशासनात्मक कार्यवाही?
-रवि सिंह-
बैकुंठपुर 29 अगस्त 2025 (घटती-घटना)। कोरिया जिले का नवगठित नगर पंचायत अपने पहले मुख्य नगर पालिका अधिकारी से सुर्खियों में आ गया है, बताया जाता है कि यह ऐसे अधिकारी हैं जिन्हें इंसान पसंद नहीं और यह इंसान देखकर उन्हें खुद से दूर ही रखना ज्यादा पसंद करते हैं भले ही वह आम जनता हो नगर की, निर्वाचित जनप्रतिनिधि हों नगर पंचायत के या फिर वरिष्ठ अधिकारी, मुख्य नगर पालिका अधिकारी को एकाकी व्यवस्था पसंद इंसान माना जा रहा है और अब वह अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को भी उसी अनुरूप ढलने सीख देते सुने जा रहे हैं जो इंसान नाम की आहट उन तक पहुंचाते हैं और आहट की खबर सुनकर मुख्य नगर पालिका अधिकारी कार्यालय से फुर्र हो जाते हैं। वैसे ऐसा कतई हम नहीं कह रहे हैं यह आम चर्चा का विषय है नगर पंचायत पटना में की मुख्य नगर पालिका अधिकारी इंसानों से दूरी बनाकर चलते हैं और उन्हें इंसानों में केवल वही इंसान पसंद हैं जिनसे उन्हें लाभ की उम्मीद होती है जिनमें ठेकेदारों सप्लायरों के नाम शामिल हैं।
नगर पंचायत गठन उपरांत प्रथम निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को तो मुख्य नगर पालिका अधिकारी इस तरह उपेक्षित करते हैं कि उन्हें वह बैठकों में भी वही जानकारी उपलब्ध कराते हैं जो वह खुद देना चाहते हैं कुछ यदि किसी ने पूछ लिया साहब उठकर बिना बताए बैठक से चले जाते हैं और निर्वाचित जनप्रतिनिधि उनका कुछ देर इंतजार करते हैं और फिर वह भी अपने अपने घर चले जाते हैं। मुख्य नगर पालिका अधिकारी नगर पंचायत गठन से लेकर चुनाव प्रथम संपन्न होने तक काफी निश्चिंत थे और अकेले नगर पंचायत के कर्ताधर्ता थे और वहीं संपन्न हुए चुनाव के बाद से जैसे ही निर्वाचित जनप्रतिनिधि नगर पंचायत में शामिल हुए साहब को वह खटकने लगे और उनकी आजादी एकला चलो वाली नीति जब प्रभावित होने लगी उन्होंने भागने की नीति नई बनाई और बस तभी से वह भागते रहते हैं और जनता,नेता, पत्रकार सहित अधिकारी उनके पीछे दौड़कर उन्हें पकड़ने प्रयासरत हैं। नगर पंचायत के गठन से लेकर अब तक नगर पंचायत में किए गए निर्माण कार्य, विभिन्न खरीदी, अलाव जलाने के किए गए खर्च सहित अन्य विविध व्यय में भ्रष्टाचार एवम प्रधानमंत्री आवास मामले में भी स्वीकृति के नाम पर पैसे की मांग जैसी शिकायतें होने के बाद जब कलेक्टर कोरिया ने शिकायतों की जांच के लिए जांच दल का गठन किया और जांच अधिकारी नियुक्त किए गए तबसे साहब और भाग रहे हैं और अब जांच अधिकारी उनका कार्यालय आकर इंतजार करके लौट जा रहे हैं जबकि साहब होते तो कार्यालय में हैं जब जांच दल जांच के लिए रवाना होने वाला होता है लेकिन साहब को उनके सूत्रों से पता चल जाता है और साहब नगर पंचायत के पिछले दरवाजे से भाग निकलते हैं और फिर वह दिनभर नहीं लौटते हैं और जांच अधिकरियों के पूछने पर कर्मचारी साहब के द्वारा सिखाया गया जवाब दे देते हैं कि साहब यहां गए हैं वहां गए हैं जबकि साहब सीधे घर में जाकर दरवाजा बंद कर सो जाते हैं।
साहब इतने होशियार और सतर्क रहते हैं कि वह जांच दल के आने से एक मिनट पहले ही कार्यालय छोड़कर रफूचक्कर हो जाते हैं
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कलेक्टर कोरिया के समक्ष हुई मुख्य नगर पालिका अधिकारी पटना की शिकायत के बाद और कलेक्टर कोरिया द्वारा गठित जांच दल के बाद जांच दल दो बार नगर पंचायत पटना आ चुका है लेकिन साहब इतने होशियार और सतर्क रहते हैं कि वह जांच दल के आने से एक मिनट पहले ही कार्यालय छोड़कर रफूचक्कर हो जाते हैं,जांच दल आकर कुछ देर बैठता है और फिर चला जाता है और साहब से फोन पर पूछे जाने पर वह यहां वहां की कहानी बताकर अपनी व्यस्तता साबित कर देते हैं। वैसे जांच दल 28 अगस्त को दूसरी बार नगर पंचायत पटना जांच के लिए पहुंचा जिसमें जिला कोषालय अधिकारी और तहसीलदार पटना शामिल थे लेकिन दोनों के पहुंचने के एक मिनट पहले सूत्रों द्वारा सतर्क किए जाने का लाभ उठाकर साहब भाग जाते हैं कार्यालय से और जब उनसे फोन पर पूछा जाता है तो वह जिला मुख्यालय के एक कार्यालय जाने की बात बताते हैं जबकि वहां पूछने पर वहां भी नहीं पहुंचने की जानकारी जांच दल के सामने आती है। मुख्य नगर पालिका अधिकारी को लेकर ऐसे उनके व्यवहार को लेकर यह कहना कतई अनुचित नहीं होगा कि वह स्वेच्छाचारिता अनुसार नगर पंचायत पटना में अपनी मनमानी चाहते हैं और उन्हें इस उनकी मनमानी में किसी की रोकटोक स्वीकार नहीं भले ही शिकायतों अनुसार जांच और मनमानी पर अंकुश लगाए जाने का आदेश खुद जिलाधीश का हो।
सीएमओ साहब ने ठंड में अलाव जलाकर भी अपनी जेब खूब गर्म की है?
वैसे शिकायतों के अनुसार जिसके लिए जांच दल गठित की गई है, साहब ने ठंड में अलाव जलाकर भी अपनी जेब खूब गर्म की है, अलाव एक से दो दिन वह भी एक दो जगह जलाकर साहब ने भ्रष्टाचार को अंजाम दिया है वहीं विभिन्न आयोजनों सहित अन्य व्यय बताकर राशि आहरण मनमाने तरीके से करना, प्रधानमंत्री आवास स्वीकृति के नाम पर भी राशि की मांग करना जैसी शिकायतें शामिल हैं। भ्रष्टाचार को लेकर ही शिकायतें की गईं हैं और शिकायत करने वालों का कहना है कि यदि विभिन्न पंजीयों का यदि परीक्षण सही तरीके से किया जाए जांच यदि की जाए सच्चाई सामने आ जाएगी और साहब का भ्रष्टाचार उजागर हो जाएगा,वहीं पंजीयों की जांच से ही साहब भाग रहे हैं और वह इससे बचना चाह रहे हैं जिससे उनकी पोल न खुलने पाए। शिकायतों अनुसार और कार्यालय में चल रही चर्चा अनुसार सुशासन तिहार के दौरान भी साहब ने कार्यालय का पैसा खर्च किया जो खर्च से कहीं अधिक दर्शाया गया पंजीयों में जबकि खर्च जो व्यवस्था की गई उसके अनुरूप कहीं ज्यादा है।
क्या मुख्य नगर पालिका अधिकारी पटना को मनमानी के लिए मिली हुई है छूट इसलिए वह कर रहे हैं मनमानी?
मुख्य नगर पालिका अधिकारी पटना के ऊपर लगातार आरोप लग रहे हैं, उनकी स्वीक्षाचारिता पूर्ण कार्यप्रणाली की शिकायत भी हुई है लेकिन वह मनमानी से बाज नहीं आ रहे हैं,वह आम लोगों सहित जनप्रतिनिधियों की लगातार उपेक्षा कर रहे हैं वहीं कलेक्टर कोरिया द्वारा गठित जांच दल को भी वह छका रहे हैं,दो बार जांच दल उनसे बिना मिले लौट चुका है जबकि वह मुख्यालय में होकर भी बहाना बनाते रहे,अब सवाल यह उठता है कि उन्हें मनमानी के लिए छूट देकर पटना भेजा गया है जिससे जनता और जनप्रतिनिधि परेशान रहे, यदि मनमानी की छूट मिली हुई है तब तो जांच दल का गठन भी केवल एक छलावा ही माना जाएगा क्योंकि कलेक्टर द्वारा गठित जांच दल को छकाना आम अधिकारी के लिए आसान काम नहीं।
किसी मंत्री के रिश्तेदार हैं साहब,मंत्री जी का आशीर्वाद है बने रहेंगे पद पर ऐसी बातें भी आ रही हैं सामने
मुख्य नगर पालिका अधिकारी पटना को किसी मंत्री जी का आशीर्वाद प्राप्त है और वह मनमानियों के बाद भी पद पर बने रहेंगे ऐसा उन्हें आश्वासन है ऐसी बातें भी सामने आ रही हैं,अब बताया जाता है यह बातें साहब खुद कहते रहते हैं वैसे इसकी सच्चाई की पुष्टि हम नहीं करते लेकिन यह बात चर्चा में जरूर है कि साहब की पहुंच मंत्री जी तक है और वह जबतक चाहेंगे मनमानी करते हुए पटना में डटे रहेंगे, वैसे इन बातों में यदि सच्चाई है तब तो स्थिति बड़ी विचित्र है क्योंकि पटना में साहब का रुतबा ऐसा है कि आम इंसान उनसे बहुत दूर है वहीं जनप्रतिनिधियों की वह इज्जत करना जानते नहीं और यदि ऐसा ही रहने वाला है तो फिर पटना में निर्वाचन की जरूरत ही नहीं थी साहब को ही नगर का जिम्मा सौंपना था।
कलेक्टर द्वारा गठित जांच दल को दो बार छकाने पर क्या कलेक्टर कोरिया करेंगी अनुशासनात्मक कार्यवाही
मुख्य नगर पालिका अधिकारी पटना के संबंध में की गई विभिन्न शिकायतें जो कलेक्टर कोरिया से की गईं हैं जिसके बाद कलेक्टर कोरिया ने जांच दल का गठन किया है और वह जांच दल दो बार जांच के लिए नगर पंचायत पटना पहुंचा भी है लेकिन उन्हें दोनों बार साहब ने छकाया है नगर में रहते हुए भी सामने आने से जांच के लिए परहेज किया है मामले में क्या इस मामले में कलेक्टर कोरिया एकतरफा अनुशासनात्मक कार्यवाही करेंगी क्योंकि मामला उच्च अधिकारी के निर्देश की अवहेलना का है। अब पूरे मामले में कलेक्टर कोरिया के निर्णय का ही इंतजार है कि क्या वह एकतरफा अब कार्यवाही करती हैं या फिर साहब मंत्री जी के खास है इसलिए वह डटे रहने वाले हैं।
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