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रायपुर@भूपेश कैबिनेट ने एफएल-10 लाइसेंस को दी मंजूरी ईओडल्यू चालान में हुआ जिक्र,रमन बोले…राजनीति का सबसे बड़ा क्राइम

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रायपुर,28 अगस्त 2025 छत्तीसगढ़ शराब घोटाले मामले में ईओडल्यू की ओर से दो दिन पहले पेश किए गए पूरक चालान में भूपेश कैबिनेट की बैठक का जिक्र है। कैबिनेट में नई लाइसेंस प्रणाली (एफएल10ए/10बी) को फरवरी 2020 में स्वीकृति मिली, फिर आदेश भी जारी किया गया। इसे लेकर विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह ने कहा कि, शुरू से लेकर अंत तक कांग्रेस सरकार ने सरकारी खजाने में डाका डालने का काम किया है। इससे बड़ा अपराध हिंदुस्तान की राजनीति में कभी नहीं हुआ है। वहीं, पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज ने इसे कांग्रेस को बदनाम करने का षड्यंत्र बताया है। उन्होंने कहा कि, भाजपा सरकार में 3 प्रतिशत कमीशन की जांच कौन करेगा। जांच एजेंसी केवल कांग्रेस के लिए है क्या ?
कैबिनेट में (एफएल-10ए/10बी) लाइसेंस लागू करने मिली थी स्वीकृति
द्द ईओडल्यू ने अपने चालान में लिखा है कि,1 अप्रैल 2020 से नई आबकारी नीति लागू की गई। इस नीति का तर्क दिया गया कि दुकानों में कई ब्रांड्स की कमी की शिकायतों को दूर करने के लिए विदेशी शराब के सप्लाई और भंडारण के लिए नई लाइसेंस प्रणाली (एफएल-10ए/10बी) लाई जाए।
द्द प्रस्ताव के अनुसार, विदेशी शराब के लाइसेंसधारी (एफएल-10ए/10बी) अपने पंजीकृत सप्लायर की मदिरा सीएसबीसीएल के गोदामों में भंडारित करेंगे। वहीं से सीएसएमसीएल को सप्लाई करेंगे।
द्द यदि बिक्री न हो,तो सीएसबीसीएल और सीएसएमसीएल को शास्ति अधिरोपित करने का अधिकार होगा। इस प्रस्ताव को मंत्री परिषद ने 8 फरवरी 2020 को स्वीकृति दी गई। 11 फरवरी 2020 को आदेश जारी हुआ।
भाजपा सरकार पर भी क्यों नहीं हो रही
बैज ने जांच एजेंसियों को घेरते हुए कहा कि, कांग्रेस के लिए एक तरफा कार्रवाई क्यों हो रही है। भाजपा सरकार में हो रही गड़बडि़यों पर एजेंसी जांच क्यों नहीं कर रही है। ऐसा दोहरा चरित्र नहीं चलेगा। कांग्रेस पर एक तरफा कार्रवाई नहीं चलेगी। हम गलत नहीं है कार्रवाई से नहीं डरेंगे। लेकिन भाजपा सरकार में गड़बड़ी हो रही है, तो उसकी भी जांच होनी चाहिए। चूहा और बिल्ली का खेल नहीं चलेगा।

इससे बड़ा अपराध हिंदुस्तान की राजनीति में कभी नहीं हुआ : रमन
रमन सिंह ने कहा कि, इससे बड़ा अपराध हिंदुस्तान की राजनीति में कभी नहीं हुआ जो छत्तीसगढ़ के शराब घोटाले के रूप में हुआ है। पैसा आ रहा और दो हिस्सों में बट रहा है। यह बात प्रामाणिकता के साथ है। उन्होंने कहा कि,राजनीति के क्षेत्र में हम काम करते हैं। बड़ी-बड़ी बातें करते हैं। लेकिन खुले किताब की तरह करप्शन भी हिम्मत का काम है। ऐसे हिम्मत वाले लोगों को सोचता हूं कि ये लोग बहुत अद्भुत हैं।
3 प्रतिशत कमीशन की जांच कौन करेगा : बैज
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि, ईओडल्यू-ईडी कांग्रेस को बदनाम करने और नेताओं को टारगेट करने के लिए तरह-तरह के षड्यंत्र अपना रही है। हमारे नेताओं को जेल भेज दिया गया है। उसके बाद भी तसल्ली नहीं हुई। फिर से तलाश कर रही है। बैज ने कहा कि, भाजपा सरकार में 3 प्रतिशत कमीशन की जांच कौन करेगा। एक जग 32 हज़ार में खरीदा जाता है,1 लाख का टीवी 10 लाख में खरीदा जाता है।
विजय भाटिया को 14 करोड़,
संजय-मनीष-अभिषेक को 11 करोड़ मिले
बता दें कि, ईओडल्यू ने मंगलवार को रायपुर के विशेष कोर्ट में 6 वां चालान पेश किया। चालान के अनुसार ओम साई बेवरेज से जुड़े विजय कुमार भाटिया को 14 करोड़ मिले हैं। विजय भाटिया ने अलग-अलग अकाउंट और डमी डायरेक्टरों के जरिए रुपए निकाले। ईओडल्यू की जांच के मुताबिक नेक्सजेन पावर इंजिटेक से जुड़े संजय मिश्रा, मनीष मिश्रा और अभिषेक सिंह को 11 करोड़ मिले। एफएल-10 /ख् लाइसेंस व्यवस्था लागू कर सिंडिकेट ने घोटाला किया था। इस अभियोग पत्र में ईओडल्यू ने कांग्रेस सरकार में घोटाला होने और घोटाले के पैटर्न का उल्लेख किया है। ओम साई ब्रेवरेज से जुड़े विजय कुमार भाटिया को छुपा लाभार्थी बताया गया है। जिसने अलग-अलग खातों और डमी डायरेक्टरों के जरिए करोड़ों रुपए निकाले। वहीं, नेक्सजेन पावर इंजिटेक से संजय मिश्रा, मनीष मिश्रा और अभिषेक सिंह को 11 करोड़ मिले।

एफएल-10 लाइसेंस क्या है ?
एफएल-10 का फुल फॉर्म है, फॉरेन लिकर-10। इस लाइसेंस को छत्तीसगढ़ में विदेशी शराब की खरीदी के लिए राज्य सरकार ने ही जारी किया था। जिन कंपनियों को ये लाइसेंस मिला है, वे मैन्युफैक्चरर्स यानी निर्माताओं से शराब लेकर सरकार को सप्लाई करते थे। इन्हें थर्ड पार्टी भी कह सकते हैं। खरीदी के अलावा भंडारण और ट्रांसपोर्टेशन का काम भी इसी लाइसेंस के तहत मिलता है। हालांकि, इन कंपनियों ने भंडारण और ट्रांसपोर्टेशन का काम नहीं किया। इसे बेवरेज कॉर्पोरेशन को ही दिया गया था। इस लाइसेंस में भी ए और बी कैटेगरी के लाइसेंस धारक होते थे।
सिंडिकेट बनाकर किया गया घोटाला
ईओडल्यू के अफसरों ने न्यायालय को बताया कि,जांच में सामने आया कि तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारी अनिल टुटेजा, अरुणपति त्रिपाठी, निरंजन दास, अनवर ढेबर, विकास अग्रवाल और अरविंद सिंह ने मिलकर सिंडिकेट बनाया और शराब घोटाला किया। इस सिंडिकेट के नियंत्रण में शासकीय शराब दुकानों में सप्लाई पर कमीशन, डिस्टलरी से अतिरिक्त शराब निर्माण कर अवैध बिक्री और विदेशी शराब की सप्लाई पर भी अवैध वसूली की व्यवस्था बनाई गई थी।

सरकार को 248 करोड़ का नुकसान हुआ

ईओडल्यू के जांच अधिकारियों के अनुसार, साल 2020-21 में नई आबकारी नीति लागू कर विदेशी शराब सप्लाई का ठेका तीन प्राइवेट कंपनियों को दिया गया। इनमें ओम साई ब्रेवरेज प्रा.लि., नेक्सजेन पावर इंजिटेक प्रा.लि. और दिशिता वेंचर्स प्रा.लि. शामिल थीं। ईओडल्यू का कहना है कि इन कंपनियों को लाइसेंस देने से सरकार को करीब 248 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।
क्या है छत्तीसगढ़ का शराब घोटाला

छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में ईडी जांच कर रही है। ईडी ने एसीबी में एफआईआर दर्ज कराई है। दर्ज एफआईआर में 3200 करोड़ रुपए से ज्यादा के घोटाले की बात कही गई है। इस घोटाले में राजनेता, आबकारी विभाग के अधिकारी, कारोबारी सहित कई लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज है।
ईडी ने अपनी जांच में पाया कि तत्कालीन भूपेश सरकार के कार्यकाल में ढ्ढ्रस् अफसर अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी ्रक्क त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के सिंडिकेट के जरिए घोटाले को अंजाम दिया गया था।


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