Breaking News

कोरिया@तत्कालीन प्राचार्य की लापरवाही से अग्रणी महाविद्यालय रामानुज प्रताप सिंहदेव के हक की जमीन पुलिस अधीक्षक कार्यालय के लिए हुई आवंटित

Share

-जिला प्रतिनिधि-
कोरिया,27अगस्त 2025(घटती-घटना)। कोरिया जिले में 27 साल बाद खुद का साथ ही हाईटेक पुलिस अधीक्षक कार्यालय पुलिस विभाग को मिलेगा यह 27 अगस्त 2025 को नए निर्मित होने जा रहे पुलिस अधीक्षक कार्यालय के भूमिपूजन के बाद तय हो गया,जिला गठन से लेकर आज तक यह कार्यालय राजस्व विभाग के एक भवन में संचालित था और वहीं से 27 सालों तक जिले की कानून व्यवस्था संचालित होती रही,नए पुलिस अधीक्षक कार्यालय के भूमिपूजन को ऐतिहासिक एक उपलब्धि बताते हुए जिले के आला अधिकारियों सहित जनप्रतिनिधियों ने अपनी पीठ थपथपाई वहीं इस बीच एक विषय इस भूमिपूजन आयोजन के दौरान हाशिए पर चला गया जो जिले की उच्च शिक्षा और उच्च शिक्षा विभाग की सहूलियत और उसके विस्तार का विषय था। नया पुलिस अधीक्षक कार्यालय जिस भूमि पर बनने जा रहा है वह भूमि उच्च शिक्षा विभाग या जिले के अग्रणी महाविद्यालय के लिए उपयोगी भूमि थी और जिसमें पहले जिले का आदर्श विद्यालय संचालित था जिसके जमनीपारा गांव में स्थानांतरित किए जाने के बाद यह भूमि जिस पर भवन बने हुए थे वहां भवन हटाकर पुलिस अधीक्षक कार्यालय बनाए जाने की अब तैयारी है,जिस भवन में मरम्मत उपरांत कक्षाएं संचालित किए जाने और संकाय और कई अन्य कक्षाओं के विस्तार की संभावना थी जो संभावनाएं अब शून्य हो गईं। नए पुलिस अधीक्षक कार्यालय निर्माण की उपलब्धि तो नेता अधिकारी बता गए लेकिन उन्होंने यह बात नहीं बताई कि भविष्य में जब छात्र संख्या संकाय और कक्षाएं बढ़ेगी महाविद्यालय में तब भवन की आवश्यकता होने पर उनका निर्माण कहां होगा और कैसे महाविद्यालय का विस्तार हो सकेगा। वहीं महाविद्यालय के अधिकारियों कर्मचारियों के आवास जो वहां बने हुए थे वह भी अब वहां से हटाए जाएंगे और महाविद्यालय के अधिकारी कर्मचारी अब कहां रहेंगे यह भी ध्यान नहीं रखा गया। कुल मिलाकर नए पुलिस अधीक्षक कार्यालय के लिए भूमि उपलब्ध कराने महाविद्यालय के समीप की वह जमीन अधिग्रहण की गई जो कहीं न कहीं शिक्षा हब बन सकने वाले जिले के अग्रणी महाविद्यालय के हिसाब से सही नहीं है। वैसे ऐसा नहीं है कि महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य ने प्रयास नहीं किया जमीन पुलिस अधीक्षक कार्यालय के लिए आवंटित होने से रोकने के लिए उन्होंने पत्राचार किया लेकिन उनके पत्र विलंब से प्रयास साबित हुए और पूर्व प्राचार्य की उदासीनता के कारण महाविद्यालय के बगल की उक्त भूमि अब पुलिस अधीक्षक कार्यालय के लिए आवंटित हो गई। 26 साल तक जिले के अग्रणी महाविद्यालय के प्राचार्य रहे प्रभारी प्राचार्य ने दूरदर्शिता दिखाई होती आज महाविद्यालय के समीप की उक्त भूमि पर पुलिस अधीक्षक कार्यालय नहीं बनता ऐसा लोगों का मानना है। 26 सालों तक अपनी जमीनी संपत्ति में वृद्धि करने में जुटे रहे प्रभारी प्राचार्य ने अपनी उदासीनता से महाविद्यालय का भविष्य में होने वाला विस्तार प्रभावित किया ऐसा कहना गलत नहीं होगा। वैसे पुलिस अधीक्षक कार्यालय के निर्माण के लिए राशि बहुत पहले आवंटित हुई थी और इस बीच चेर में भूमि आबंटित भी हुई थी लेकिन चेर में आवंटित हुई जमीन पर या तो विवाद का मामला सामने आया या फिर वह पसंद नहीं आया और फिर नए जमीन की तलाश शुरू हुई जो महाविद्यालय के पास मिल गई और वहां नए कार्यालय के लिए भूमिपूजन किया गया।

अग्रणीय महाविद्यालय रामानुज प्रताप सिंह देव का इतिहास पर भरी पड़ा हाईटेक पुलिस अधीक्षक कार्यालय
अग्रणीय महाविद्यालय रामानुज प्रताप सिंह देव की शुरुआत 1982 में हुई थी, जिस समय अभिभाजित मध्य प्रदेश राज्य था? और जिला सरगुजा था। इस महाविद्यालय को लगभग 43 वर्ष हो चुके हैं, यह महाविद्यालय अक्टूबर 1982 में बीटीआई बिल्डिंग में संचालित हो रहा था। 1999 तक यह महाविद्यालय इस भवन में संचालित होता रहा। इसके बाद उस भवन में मॉडल स्कूल संचालित होने लगा,क्योंकि उस समय महाविद्यालय की अपनी खुद की भवन बन गई थी,जब मॉडल स्कूल वहां से बंद हुआ,फिर वह भवन महाविद्यालय के पास उसी के प्रांगण में रही और वहां पर महाविद्यालय की कुछ कक्षा लगती रही,जो आज भी लग रही है। उस भवन में मरम्मत कार्य भी समय समय पर होती रही महाविद्यालय के पैसे से। उस भवन का कई बार मरम्मत कार्य किया गया। वह भवन महाविद्यालय के अधीन थी और उस जमीन को भी महाविद्यालय के नाम करने के लिए 1986-87 में प्रक्रिया शुरू हो गई थी। अंतिम दौर में वह सिर्फ महाविद्यालय के नाम होना था पर महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य जिन्होंने 26 साल तक इस महाविद्यालय की कुर्सी पर सुशोभित रहे,उन्होंने इस जमीन को महाविद्यालय के नाम नहीं करा पाए और अब वर्तमान प्राचार्य भी उस जमीन को महाविद्यालय के नाम कराने में दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। जिस वजह से महाविद्यालय के नाम पर जो जमीन हस्तांतरित होनी थी,वह जमीन अब दूसरे विभाग के नाम हस्तांतरित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। जिससे महाविद्यालय को काफी नुकसान होगा। जहां सभी जिले के महाविद्यालय के पास जमीन पर्याप्त है, वहीं इस जमीन के दूसरे विभाग को हस्तांतरण होने से कोरिया जिले के इकलौते अग्रणी महाविद्यालय की जमीन कम हो जाएगी और आने वाले समय में मिलने वाले सुविधा भी महाविद्यालय से छीन ली जाएगी। पर इस बात पर किसी का भी ध्यान नहीं है, और महाविद्यालय की जमीन किसी और विभाग को देने में मौन स्वीकृति दी जा रही है। जिसके लिए उच्च शिक्षा विभाग व अग्रणी महाविद्यालय के वर्तमान प्राचार्य को विचार करना होगा,क्योंकि आगामी समय में महाविद्यालय को जमीन की आवश्यकता होगी और महाविद्यालय की जमीन कम पड़ेगी। महाविद्यालय में कई कक्षाएं और बढ़ानी है उसके लिए भी जमीन की आवश्यकता होगी। ऑडिटोरियम से लेकर कई सुविधाएं महाविद्यालय में और आवश्यक है,जो वहां पर होना है। यदि यह जमीन नियम विरुद्ध तरीके से किसी और विभाग को हस्तांतरित की जाएगी तो महाविद्यालय को नुकसान होगा। क्योंकि यह जमीन पहले से ही महाविद्यालय को हस्तांतरित करने की प्रक्रिया हो रही थी।

महाविद्यालय की भूमि अन्य विभाग को आवंटित,आने वाले समय में अन्य संकायों के खुलने से भवन के लिए भूमि कहां से आएगी
स्वर्गीय रामानुज प्रताप सिंह देव महाविद्यालय कोरिया जिले का अग्रणी महाविद्यालय है,और कोरिया जिले के छात्र-छात्राओं और युवाओं की प्रारंभिक स्कूली शिक्षा के बाद एकमात्र उच्च शिक्षा का शासकीय केंद्र है। अविभाजित मध्य प्रदेश के समय से ही और अविभाजित सरगुजा जिले के समय से वर्तमान तक हजारों क्षेत्र वासियों ने इस महाविद्यालय से शिक्षा ग्रहण की है। बावजूद इसके अभी तक यह महाविद्यालय कई मायनों में अपूर्ण है। अभी भी कई विभिन्न विषयों की स्नातकोत्तर कक्षाओं का यहां अभाव है, जिसके लिए भविष्य में संभावना बनी हुई है। यदि इन कक्षाओं का संचालन प्रारंभ होगा तो महाविद्यालय को इनके संचालन के लिए अतिरिक्त कक्ष और भवन की आवश्यकता पड़ेगी। इसके साथ ही विज्ञान संकाय के कक्षाओं के विस्तार में प्रयोगशाला भवन, विभिन्न गतिविधियों को संचालित करने के लिए ऑडिटोरियम वगैरह के निर्माण की आवश्यकता पड़ेगी। इस दशा में अन्य जिलों के शासकीय अग्रणी महाविद्यालयों की तुलना में वैसे भी बैकुंठपुर महाविद्यालय में भूमि की पर्याप्तता नहीं है,यदि पूर्व में पदस्थ रहे यहां के प्राचार्यों की गलती के कारण महाविद्यालय से संबंधित भूमि अन्य विभाग को आवंटित कर दी जाती है, तो निश्चय ही महाविद्यालय प्रशासन को भविष्य में बेहद कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है।
एक प्रभारी प्राचार्य ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय को किए जा रहे भूमि आबंटन का किया था विरोध, विरोध नहीं आया काम
26 साल तक प्रभारी प्राचार्य रहे सेवानिवृत्त प्राचार्य ने भले ही महाविद्यालय के लिए दूरदर्शी सोच नहीं रखी लेकिन एक प्रभारी प्राचार्य ने अपने अल्प कार्यकाल में इस मामले में अपनी दूरदर्शिता दिखाई थी और उन्होंने एक पत्र लिखकर इसका विरोध इस तरह किया था कि ऐसा किया जाना महाविद्यालय के विस्तार को कक्षाओं और संकाय के विस्तार को प्रभावित करेगा। उक्त प्रभारी प्राचार्य के निवेदन पत्र पर भले ही जिला प्रशासन ने विचार नहीं किया लेकिन उक्त प्राचार्य ने अपनी दूरदर्शिता अवश्य दिखाई थी और उन्होंने यह साबित किया था कि वह उच्च शिक्षा और जिले के अग्रणी महाविद्यालय के लिए कितने गंभीर हैं और उन्हें आभास है कि महाविद्यालय परिसर की भूमि का पुलिस अधीक्षक कार्यालय के लिए आबंटन भविष्य में महाविद्यालय के लिए उसके विस्तार के लिए भूमि समस्या उत्पन्न करेगा तब भूमि की उपलब्धता नहीं हो सकेगी। वैसे विधि संकाय सहित कई संकाय प्रस्तावित हैं महाविद्यालय के लिए और कई स्नातकोत्तर कक्षाएं भी जारी हो सकती हैं वहीं भविष्य में छात्र संख्या बढ़ने पर भी भवन की समस्या हो सकती है।
आदर्श विद्यालय था भवन में संचालित जिस भवन को हटाकर बनेगा पुलिस अधीक्षक कार्यालय
जिस भवन को हटाकर या जिस भूमि पर अब पुलिस अधीक्षक कार्यालय बनेगा उक्त भूमि पर बने भवन में पहले आदर्श विद्यालय संचालित था,आदर्श विद्यालय चूंकि अब अन्य पिछड़ा वर्ग छात्र छात्राओं के लिए बने छात्रावास भवन में संचालित किया जा रहा है इसलिए यह भवन खाली था और जिस भूमि का आबंटन अब पुलिस अधीक्षक कार्यालय के लिए किया गया है,वैसे सवाल यह भी है कि यदि अन्य पिछड़ा वर्ग से आने वाले छात्र छात्राएं कभी अपने लिए बने छात्रावास भवन की मांग की वहां रहने की मंशा जताई तब आदर्श आवासीय विद्यालय के छात्र छात्राओं को कहां रखा जाएगा और उनकी कक्षाएं कहां संचालित की जाएगी?

26 साल महाविद्यालय के प्राचार्य रहे प्रभारी प्राचार्य की उदासीनता आज महाविद्यालय के भविष्य के विस्तार को हाशिए पर डाल गई
महाविद्यालय के 26 साल तक प्राचार्य रहे सेवानिवृत्त हो चुके प्रभारी प्राचार्य ने महाविद्यालय के लिए उसके विस्तार के लिए कोई व्यक्तिगत प्रयास नहीं किए,उन्होंने महाविद्यालय के विस्तार या उसके भूमि जो भविष्य में विस्तार के लिए काम आता को लेकर उदासीनता ही बरती जिसका परिणाम यह हुआ कि महाविद्यालय से लगी हुई जमीन पुलिस अधीक्षक कार्यालय के लिए आबंटित हो गई, महाविद्यालय के विस्तार और महाविद्यालय के अधिकारी कर्मचारी आवास के लिए अब भूमि की उपलब्धता कम से कम महाविद्यालय परिसर में नहीं है, कुल मिलाकर एक उदासीनता के कारण महाविद्यालय के अपने हिस्से की जमीन अब पुलिस अधीक्षक कार्यालय के लिए आवंटित हुई जिस पर भूमिपूजन हो गया जो मामला ऐतिहासिक भी घोषित किया जा चुका।वैसे तत्कालीन प्रभारी प्राचार्य को इसका अवसर मिला था कि वह उक्त भूमि को महाविद्यालय के लिए आबंटित करा लें लेकिन उन्हें शायद फुर्सत नहीं मिली और आज परिणाम सामने है जमीन पुलिस अधीक्षक कार्यालय के लिए आबंटित हो गया।
महाविद्यालय के नाम से करने के लिए आदेश भी जारी किया गया था,लेकिन प्राचार्य की लापरवाही के कारण यह नही हो सका
1982 से बीटीआई के नाम से संचालित महाविद्यालय परिसर की वर्तमान भूमि को महाविद्यालय के नाम से राजस्व दस्तावेजों में अंकित करने के लिए तत्कालीन सरगुजा अपर कलेक्टर के न्यायालय में सन 1985 में प्रकरण दर्ज हुआ था। विधि सम्मत कार्यवाही के बाद 1986-87 में इस भूमि को महाविद्यालय के नाम अंकित करने संबंधी अपर कलेक्टर न्यायालय से आदेश भी जारी हुआ था। इस आदेश के जारी होने के उपरांत केवल औपचारिकता शेष बाकी रह गई थी, भूमि को महाविद्यालय के नाम राजस्व दस्तावेजों में अंकित करने के लिए। परंतु इसे विडंबना कहें या घोर लापरवाही की तत्कालीन प्राचार्य ने और सबसे लंबे समय तक इस महाविद्यालय के प्राचार्य बने रहने के रिकॉर्ड धारी व्यक्ति ने इस महत्वपूर्ण कार्य पर अपनी कोई संवेदनशीलता नहीं दिखाई। परिणाम स्वरूप आज आलम यह है कि इस भूमि को पुलिस विभाग को आवंटित करने के लिए लगभग सारी औपचारिकताएं पूर्ण कर ली गई हैं। और यदि यह भूमि अन्य विभाग को आवंटित हो जाता है तो निश्चित है कि महाविद्यालय प्रशासन पर यह स्वयं के द्वारा किया गया कुठाराघात होगा।
अग्रणी महाविद्यालय के इस गंभीर मसले पर अभी तक किसी समाजसेवी या राजनीतिज्ञ की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है सामने
कोरिया जिला के बैकुंठपुर और उसके आसपास के कई किलोमीटर के दायरे में रचे बसे लोगों की शिक्षा दीक्षा का एकमात्र समीपस्थ माध्यम रहा स्वर्गीय रामानुज सिंहदेव अग्रणी महाविद्यालय बैकुंठपुर से संबंधित भूमि के इस प्रकरण को लेकर अभी तक क्षेत्र के किसी भी समाजसेवी, शिक्षाविद और राजनीतिज्ञों की किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इस मामले में अभी तक सभी उदासीन बने हुए हैं, जो की आश्चर्य का विषय है। क्योंकि अधिकांश समाजसेवी, शिक्षाविद, और राजनीतिज्ञ इसी महाविद्यालय की शिक्षा दीक्षा का परिणाम हैं। इनके द्वारा तो उस व्यक्ति से भी सवाल पूछे जाने चाहिए, जिसने सबसे लंबे समय तक प्राचार्य और प्रभारी प्राचार्य का दायित्व इस महाविद्यालय में संभाल रखा था। आखिर क्यों इतने लंबे समय तक उनके द्वारा इस भूमि को महाविद्यालय के नाम अंकित करने के लिए कोई पहल नहीं की गई। यह तो हो ही नहीं सकता कि यह मामला उनके संज्ञान में ना रहा हो।


Share

Check Also

अम्बिकापुर@यूजीसी नियमों के खिलाफ स्वर्ण समाज का ऐलान,1 फरवरी को अंबिकापुर बंद

Share अम्बिकापुर,29 जनवरी 2026 (घटती-घटना)। यूजीसी के नए नियमों के विरोध में प्रस्तावित 1 फरवरी …

Leave a Reply