- महाविद्यालय में बच्चे बेहतर शिक्षा के लिए जाते हैं या फिर यूरिन इन्फेक्शन जैसी बीमारियों से ग्रसित होने?
- उधार के भवन में संचालित हो रहा महाविद्यालय और समस्या हो रही वहां पर अध्ययनरत विद्यार्थियों को
- शौचालय साफ करने के लिए महाविद्यालय के पास फिनाइल की व्यवस्था तक नहीं पर महाविद्यालय हर साल फिनाइल खरीदी का लगाता है बिल कैसे?
- बीमारी की चपेट से बचने नवीन महाविद्यालय से विद्यार्थी टीसी कटवा रहे और अन्य जगह पढ़ने के लिए जा रहे हैं।
- छात्राओं ने अपनी समस्या बताने दैनिक घटती-घटना को लगाया फोन और अपनी बताई परेशानी कहा यूरिन इन्फेक्शन जैसी बीमारियों से यहां पर पढ़ने वाले हो रहे हैं ग्रसित।
- शिकायतों के बावजूद अध्यनरत छात्राओं को समस्या से नहीं मिली निजात।


-रवि सिंह-
कोरिया,25 अगस्त 2025 (घटती-घटना)। सही कहा गया है कि नेता नेता ही होते हैं सिर्फ घोषणाएं और काम हो न हो उसकी उपलब्धि उन्हें चाहिए, बाकी जमीनी स्तर पर देखा जाए तो सब कुछ वैसा होता नहीं है जैसा नेता बताते हैं, इस समय बात हो रही है कोरिया जिले के पोड़ी बचरा नवीन महाविद्यालय की जहां अव्यवस्था का ऐसा आलम है कि वहां के विद्यार्थी इतने परेशान हैं महाविद्यालय की व्यवस्था से प्रभारी प्राचार्य की आदत से सहायक प्राध्यापकों की हठधर्मिता से की वह एक राय होकर कॉन्फ्रेंस में घटती-घटना कार्यालय में फोन लगाते हैं और अपनी समस्या बताते हैं और दैनिक घटती-घटना से निराकरण की उम्मीद जाहिर करते हैं और इस दौरान वह दैनिक घटती घटना की जनसरोकार क्षवि की प्रशंसा भी करते हैं और सभी छात्र-छात्राएं बारी बारी से महाविद्यालय की उन परेशानियों को जिससे वह प्रतिदिन जूझ रहे हैं उससे अवगत कराते हैं, छात्र छात्राओं ने जिस तरह से बताया उसे सुनकर तो यही लगता है कि छात्र छात्राएं वहां पर महाविद्यालय से उच्च शिक्षा लेने नहीं परेशानियों से रूबरू होने जा रहे हैं, उनकी परेशानियां इतनी जटिल हैं और छात्र छात्राओं द्वारा बताई गई परेशानियों में इतनी गंभीरता थी कि उसे सुनकर दैनिक घटती-घटना ने अब उनकी आवाज बनने का निर्णय लिया है और उनकी आवाज प्रशासन तक पहुंचाने के लिए इस खबर को प्रकाशित कर रहा है क्योंकि बच्चों का दर्द उनकी समस्या सुनकर घटती-घटना परिवार भी भावुक हो गया और उनकी परेशानियों की खबर लिखने के लिए अपने दायित्व को निभाने के लिए वह सामने आ रहा है, और ऐसा करना ज्यादा उचित समझा,अध्यनरत विद्यार्थियों ने बताया कि सैकड़ो आवेदन उन्होंने उच्च स्तर पर दिए हैं, कलेक्टर महोदय से भी विनती कर चुके हैं, प्राचार्य से तो विनती हो ही रही है पर समस्या का समाधान नहीं हो रहा है, आखिर इस समस्या का समाधान करेगा कौन जब उन्होंने समस्या गिनवानी शुरू की तो सुनकर ऐसा लगा कि वहां महाविद्यालय की शिक्षा नहीं सिर्फ समस्या ही दिख रही है स्थिति यह है कि तीन कमरे में महाविद्यालय के सारे विषय की पढ़ाई कैसे हो रही है पढ़ाई करने वाले वहां के विद्यार्थी आखिर शौचालय के लिए कहां जा रहे हैं बिना पानी वह कैसे वहां रह रहे हैं तीन कमरे क्या उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए पर्याप्त है? क्या बिना पानी के शौचालय किसी काम का है? वहां की गंदगी बच्चों का जीना मुहाल कर रही है, प्राचार्य आती नहीं हैं और बाकी जो है वह सिर्फ अपने स्वार्थ में ही व्यस्त हैं बच्चों ने यह भी बताया की शौचालय साफ करने के लिए फिनाइल तक महाविद्यालय के पास नहीं है, इन सब समस्याओं को सुनने के बाद इस बात पर सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर उच्च शिक्षा के लिए आने वाला पैसा क्या वहां के प्राचार्य व प्रबंधन डकार जाते हैं? और जिनके लिए सुविधाएं मिलनी चाहिए उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया जाता है बिना शौचालय के बच्चों में यूरिन इन्फेक्शन होने का खतरा बढ़ता जा रहा है यह बात बच्चों ने ही बताई और बताया कि कई बच्चे यूरिन इन्फेक्शन से ग्रसित हो गए हैं जिस वजह से कई टीसी कटवाकर इस महाविद्यालय से अन्यत्र जाकर अपनी जान बचा रहे हैं।

प्रभारी प्राचार्य नहीं आती महाविद्यालय हमारी समस्या सुनने वाला कोई नहीं… छात्राओं ने बताई पीड़ा…
महाविद्यालय में अध्यनरत छात्राओं ने दैनिक घटती-घटना का नंबर तलाशा और उन्होंने सीधे प्रधान कार्यालय से संपर्क किया और वहां से उन्होंने संवाददाता का नंबर प्राप्त कर कॉन्फ्रेंस कॉल में बात की, छात्राओं ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि महाविद्यालय केवल भगवान भरोसे संचालित हो रहा है, महाविद्यालय में पदस्थ प्रभारी प्राचार्य नहीं आती महाविद्यालय यह भी छात्राओं ने बतलाया, उन्होंने बताया कि छात्राओं की समस्या सुनने वाला कोई नहीं है महाविद्यालय में,खुले में छात्राएं लघु,दीर्घ शंका आवश्यकता पड़ने पर जाने मजबूर हैं,महाविद्यालय में जो शौचालय है वह इतना गंदा रहता है कि वहां जाने से यूरिन इन्फेक्शन का खतरा रहता है और कई छात्राएं इस संक्रमण से ग्रसित भी हुई हैं,छात्राओं का कहना है कि उनकी समस्या सुनने वाला कोई नहीं है महाविद्यालय में वह अब शायद महाविद्यालय से अलग होकर अन्य माध्यम से पढ़ाई आगे जारी करने का निर्णय लेंगी ऐसा उनका अब अगला निर्णय हो सकता है जैसा उन्होंने बतलाया।
महाविद्यालय में शौचालय के लिए फिनायल तक की व्यवस्था नहीं,छात्राओं ने बतलाया
छात्राओं ने फोन पर अपनी समस्या बताते हुए कहा की महाविद्यालय की व्यवस्था के बारे में वह क्या कहें,उन्हें अब समस्या बताने में भी शर्म आ रही है, छात्राओं ने अनुसार महाविद्यालय में शौचालय की साफ सफाई नहीं होती वहीं महाविद्यालय में फिनायल तक की व्यवस्था नहीं है जिससे शौचालय की दुर्गंध दूर की जा सके और संक्रमण से बचाव का कोई रास्ता निकल सके। छात्राओं के अनुसार महाविद्यालय में पदस्थ अधिकारी कर्मचारी केवल अपने कक्ष तक ही सीमित रहते हैं उन्हें अन्य समस्याओं जिसमें छात्र छात्राओं की समस्या है से कोई लेना देना नहीं रहता।
उधार का भवन और तीन संकाय की कक्षाएं, कैसे मिलेगी गुणवत्तायुक्त उच्च शिक्षा?
पोड़ी बचरा महाविद्यालय की छात्राओं का फोन कॉल काफी मार्मिक एक अपील समझ में आया,वह जिस तरह अपनी बात बतला रही थीं उससे अंदाजा लगाया जाना आसान है कि वह किस कठिनाई से महाविद्यालय में उच्च शिक्षा ग्रहण करने पहुंच रही हैं,तीन कमरे में तीन संकाय का अध्यापन कार्य संपादित किया जाता है,कुछ छात्र बरामदे में भी बैठते हैं, हल्ला गुल्ला होता रहता है और सभी छात्र उसी माहौल में अपनी पढ़ाई करते हैं,भवन भी उधार का है जैसा उन्होंने बतलाया,शासकीय विद्यालय के भवन में यह महाविद्यालय संचालित है जहां सुविधाओं के नाम पर शून्य जैसी स्थिति है,यह महाविद्यालय अब अपनी अव्यवस्था का रोना खुद रो रहा है जहां छात्र छात्राएं अब मुखर होकर अव्यवस्था की पोल खोलने सामने आ रहे हैं।
कलेक्टर से भी कई बार लगाया गया गुहार
छात्र छात्राओं की माने तो कलेक्टर से भी महाविद्यालय की अव्यवस्थाओं को लेकर कई बार उन्होंने गुहार लगाई है,वैसे उनका कहना है कि इसका कोई लाभ उन्हें नहीं मिला और महाविद्यालय की व्यवस्था जस की तस वैसी ही है जैसी आरंभ से है, छात्र छात्राओं के अनुसार महाविद्यालय नाममात्र के लिए संचा लित है और वहां उन्हें मजबूरी में अध्ययन हेतु जाना पड़ता है,कई छात्राओं ने अलग हटकर महाविद्यालय छोड़कर भी पढ़ाई शुरू की है और जिसकी वजह है अव्यस्था जिसमें सुधार की गुंजाइश नजर नहीं आ रही है।
महाविद्यालय में पदस्थ अधिकारियों कर्मचारियों के लिए
साफ सुथरा शौचालय,छात्र छात्राओं के शौचालय की स्थिति ऐसी की खुद छात्र फोटो लेने की हिम्मत नहीं जुटा सके
महाविद्यालय में अध्यनरत छात्र-छात्राओं ने शिकायत के साथ कुछ तस्वीरें भी साझा की हैं,उनके द्वारा जो तस्वीर साझा की गई है वह महाविद्यालय के उन शौचालयों की तस्वीरें हैं जिसका उपयोग महाविद्यालय में पदस्थ अधिकारी कर्मचारी करते हैं, अधिकारी कर्मचारी के लिए जो शौचालय हैं वह काफी साफ सुथरे हैं वहीं छात्र छात्राओं के लिए उपलध शौचालयों की स्थिति ऐसी है कि छात्र उसकी तस्वीर लेकर उपलब्ध करा पाने में खुद को असमर्थ पा रहे हैं,छात्रों के अनुसार महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं के लिए उपलब्ध शौचालयों की स्थिति ही ऐसी है कि वहां तक जाना ही मुश्किल है तो तस्वीर खींचना कितना मुश्किल होगा समझा जा सकता है। वैसे यह भी अजीब स्थिति है,खुद के लिए साफ सुथरा शौचालय और जिनके भरोसे नौकरी है उन छात्रों के लिए बदबूदार गंदा शौचालय। यह व्यवस्था का कौन सा स्वरूप है यह बड़ा सवाल है।
प्रभारी प्राचार्य के लिए सहयोगी बनकर संलग्न भरतपुर के सहायक प्राध्यापक बेचुलाल सोनवानी भी
नहीं देते व्यवस्था सुधारने में ध्यान
छात्राओं ने बताया कि प्रभारी प्राचार्य महाविद्यालय आती नहीं हैं और उन्होंने अपनी सुविधा के लिए ही भरतपुर के एक सहायक प्राध्यापक बेचू लाल सोनवानी को संलग्न करवा रखा है जो बैकुंठपुर निवासी हैं और वह सहायक प्राध्यापक भी जो प्रभारी प्राचार्य के एक तरह से सहयोगी हैं वह भी व्यवस्था सुधारने में ध्यान नहीं देते। छात्राओं के अनुसार वह केवल अपनी सुविधा के लिए यहां संलग्न हैं शेष उन्हें महाविद्यालय में व्याप्त अव्यवस्था मामले से कोई लेना देना नहीं है।
महाविद्यालय का वार्षिक फंड आखिर कहां होता है उपयोग?
महाविद्यालय को प्रतिवर्ष संचालन राशि प्राप्त होने की बात भी पता चली है,अब जब छात्राओं के अनुसार महाविद्यालय में फिनायल तक नहीं उपलब्ध है तो संचालन राशि कहां खर्च की जा रही है यह बड़ा सवाल है,वैसे इस राशि का उपयोग कहीं निजी रूप से तो नहीं कर लिया जा रहा है सवाल यह भी है।
शिकायतकर्ता छात्र-छात्राओं ने कहा नाम नहीं प्रकाशित कीजिएगा वरना हमें किया जाएगा परेशान
महाविद्यालय के विषय में विभिन्न शिकायत दैनिक घटती-घटना को प्रदान करने वाले छात्र छात्राओं ने एक निवेदन भी किया है,उन्होंने कहा है कि हम हांथ जोड़कर प्रार्थना करते हैं कि पूरे मामले में हमारा नाम प्रकाशित न किया जाए, उन्होंने ऐसा इसलिए कहा है क्योंकि उन्हें भय है कि उनका नाम सामने आते ही महाविद्यालय प्रबंधन उन्हें अनावश्यक परेशान करेगा। वैसे अब देखना है कि क्या पूरे मामले में जिम्मेदार ध्यान देते हैं या वह फिर आंख मूंदकर कुंभकर्णी निद्रा में सो जाते हैं।
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