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कोरिया/पटना@मुख्य नगरपालिका अधिकारी पटना प्रधानमंत्री आवास के लिए मांग रहे हैं पैसा?

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दस हजार में स्वीकृत होगा आवास,पैसा देने से ही मिलेगा आवास ऐसी चर्चा नगर में हुई आम


-रवि सिंह-
कोरिया/पटना, 21 अगस्त 2025 (घटती-घटना)। कोरिया जिले के नवगठित नगर पंचायत पटना से एक बड़ी खबर निकलकर सामने आ रही है जो जन चर्चा से सुनने को मिली है और जिसके अनुसार मुख्य नगरपालिका अधिकारी पटना प्रधानमंत्री आवास के हितग्राहियों से पैसे की मांग कर रहे हैं जो नगर में जन चर्चा का विषय बना हुआ है। मामला जन चर्चा से सामने आया है और ऐसी जानकारी भी सामने आई है कि शिकायत अध्यक्ष से की गई जिसमें अध्यक्ष भी मौन हैं,वैसे यह जन चर्चा कितनी सही है यह तो स्पष्ट नहीं है लेकिन शिकायत अध्यक्ष तक हुई है यह चर्चा आम है। वैसे क्या यह सही है कि मुख्य नगरपालिका अधिकारी पटना प्रधानमंत्री आवास की स्वीकृति के लिए पैसे की मांग कर रहे हैं हितग्राहियों से? सूत्रों के अनुसार दस हजार की राशि ऐसे हितग्राहियों से मांगी जा रही है जिनका नाम पंचायत समय वाली आवास सूची में दर्ज है। नगर पंचायत गठन पश्चात चूंकि आवास स्वीकृति के नियमों में बदलाव हुआ है और कई पात्र पंचायत समय के हितग्राही अपात्र होंगे इसी विषय का भय दिखाकर पैसे की मांग की जा रही है जो जन चर्चा का विषय है।
पटना नगर पंचायत का गठन आवास मामले में वैसे भी आवास विहीन नगर निवासियों के लिए एक रोड़ा बन गया है जो नियमों में बदलाव के कारण हुआ है वहीं यदि पैसे की मांग की बात सही है तो ऐसे में यह तय है कि आवास विहीन लोगों के लिए अब पैसे से ही आवास की उपलधता सुनिश्चित होगी जो मांगी जा रही है जैसी जनचर्चा है। मुख्य नगर पालिका अधिकारी पटना को लेकर वैसे भी बताया जाता है कि वह एकला चलो नीति वाले हैं और वह निर्णय स्वयं लेने के लिए विख्यात हैं जिसमें वह निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की सहमति लेना आवश्यक नहीं समझते ऐसे में आवास के लिए पैसे की मांग वाली सूचना सही ही होगा ऐसा मानना गलत नहीं होगा। नगर निवासियों की माने तो आम लोगों से अधिकारी का व्यवहार भी ऐसा है जैसे वह नगर के नागरिक नहीं अधिकारी के अधीनस्थ छोटे कर्मचारी हैं जिन्हें उपेक्षित करना या जिन्हें तवज्जो न देना अधिकारी की आदत बनी हुई है। नगर पंचायत का गठन नगर वासियों को बेहतर सुविधाओं की प्रदायता के लिए किया गया था लेकिन मुख्य नगर पालिका अधिकारी द्वारा जब नगर वासियों से व्यवहार ही सही नहीं किया जाएगा और किसी भी मामले में पैसे की ही मांग की जायेगी तब ऐसे में सुविधाओं की प्रदायता उद्देश्य कैसे सफल होगा बड़ा सवाल है। वैसे यदि अध्यक्ष के पास पैसे की मांग की कोई शिकायत पहुंची है तो उन्होंने क्यों नहीं इस मामले में कोई कार्यवाही की है यह एक विचारात्मक विषय है।
नगर निवासियों को सुविधाओं का जो निशुल्क मिलने वाली सुविधाएं हैं के लिए यदि मूल्य चुकाना पड़ेगा तो फिर पंचायत से नगर पंचायत गठन का औचित्य ही शून्य माना जाएगा। नगर पंचायत पटना में वैसे भी प्रदेश के सत्ताधारी दल भाजपा की ही सरकार है केंद्र में भी भाजपा सरकार है और इस तरह ट्रिपल इंजन की सरकार पटना में काम कर रही है और ऐसे में प्रधानमंत्री आवास मामले में ही यदि कोई उगाही कर ले जाएगा तो फिर ट्रिपल इंजन सरकार का क्या औचित्य रह जाएगा यह भी बड़ा प्रश्न है। नगर की जनता ने ट्रिपल इंजन के नाम पर ही नगर की जिम्मेदारी भाजपा प्रत्याशियों को दी थी और अब नगर के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी होनी चाहिए कि वह ऐसे अधिकारियों पर उनकी दोषपूर्ण कार्यप्रणाली पर लगाम लगाएं और नगर की जनता को उनका वाजिब हक दिलाएं , मुख्य नगरपालिका अधिकारी पर लग रहे आरोप जो जनचर्चा है यह कहीं से एक नगर नवगठित नगर इकाई के हिसाब से सही नहीं। नगर पालिका अधिकारी के विषय में अब अध्यक्ष सहित अन्य नेताओं को निर्णय लेना होगा।


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