वन विभाग की लापरवाही पर ग्रामीणों का आक्रोश, कछोड़ में हाथियों का तांडव,बुजुर्ग की कुचलकर मौत,वन विभाग सोता रहा
मनेंद्रगढ़,20 अगस्त 2025 (घटती-घटना)। मनेंद्रगढ़ वन मंडल के केल्हारी परिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत कछौड़ टावरपारा में बीती रात हाथियों के हमले में एक ग्रामीण की दर्दनाक मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही क्षेत्र के पूर्व विधायक गुलाब कमरों पीडि़त परिवार से मिलने पहुंचे और शोक संवेदना व्यक्त की।
ग्रामीणों एवं परिजनों ने पूर्व विधायक को बताया कि बीती रात करीब 11 से 12 बजे के बीच 12 हाथियों का दल गांव में घुस आया। हाथियों ने मकानों को तोड़फोड़ कर क्षतिग्रस्त कर दिया और खेतों को भी नुकसान पहुँचाया। इसी दौरान हाथियों के हमले में एक ग्रामीण की मौत हो गई। ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग ने न तो हाथियों की गतिविधियों को लेकर पहले से मुनादी कराई, न ट्रैकिंग की कोई व्यवस्था की, और न ही गांव में हाथियों के मूवमेंट की जानकारी साझा की। उनका कहना है कि यदि विभाग समय रहते चेतावनी देता तो इस प्रकार की दर्दनाक घटना टल सकती थी। पीडि़त परिवार ने बताया कि घटना की जानकारी ग्रामीणों ने स्वयं फोन कर वन विभाग को दी, लेकिन विभागीय अधिकारी और कर्मचारी सुबह 3 बजे घटनास्थल पर पहुंचे। इससे पहले ग्रामीण पूरी रात दहशत में रहे और अपने स्तर पर हाथियों को भगाने की कोशिश करते रहे। पूर्व विधायक गुलाब कमरों वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि विभाग की लापरवाही से ग्रामीणों को जान-माल का नुकसान उठाना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने मांग की है कि पीडि़त परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए और हाथियों की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।
गांव हाथियों के आतंक से कराह रहे हैं तो जिम्मेदार अधिकारी कहां हैं?
जिले के मनेन्द्रगढ़ वन मंडल के केल्हारी परिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम कछोड़ में बीती रात हाथियों के झुंड ने दहशत फैला दी। गांव में घुसे करीब 12 हाथियों ने 70 वर्षीय बुजुर्ग धीरज लाल को कुचलकर मौत के घाट उतार दिया। ग्रामीणों के अनुसार,झुंड में मौजूद एक छोटा हाथी बुजुर्ग के घर से चावल निकाल रहा था। बुजुर्ग ने चावल वापस लेने की कोशिश की, तभी एक विशाल हाथी ने उन पर हमला कर दिया। कुछ ही क्षणों में गांव चीख-पुकार से गूंज उठा और बुजुर्ग की मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद हाथियों का दल घर से अनाज उठाकर जंगल की ओर चला गया। गांव में मातम का माहौल है। ग्रामीणों ने वन विभाग पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि लगातार हाथियों की मौजूदगी और तबाही की सूचना के बावजूद न तो अमला अलर्ट रहा और न ही गांवों में मुनादी करवाई गई। उनका कहना है कि विभागीय अधिकारी गहरी नींद में सोते रहे और इसकी कीमत एक निर्दोष बुजुर्ग को जान देकर चुकानी पड़ी। ग्रामीणों ने मांग की है कि हाथियों की गतिविधियों पर रोक लगाने और गांवों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तत्काल ठोस कदम उठाए जाएं। सूत्रों के मुताबिक, जिला वन मंडल अधिकारी मनीष कश्यप से न तो फोन पर संपर्क हो पा रहा है और न ही वे कार्यालय में मिलते हैं। 20 अगस्त को मीडिया कर्मियों ने उन्हें फोन से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कॉल रिसीव नहीं हुआ। दोपहर 12:00 से 12:50 बजे तक कार्यालय में इंतजार करने पर भी अधिकारी नदारद रहे। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि जब गांव हाथियों के आतंक से कराह रहे हैं तो जिम्मेदार अधिकारी कहां हैं? क्या यही मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार का सुशासन है? ग्रामवासियों ने मांग की है कि लापरवाही वन मंडल अधिकारी को तत्काल हटाया जाए, ताकि वन परिक्षेत्र सुरक्षित हो सके और ग्रामीणों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित हो।
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