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कोरिया@ पूर्व विधायक गुलाब कमरों ने वन मंडलाधिकारी बैकुंठपुर के विरुद्ध वन मंत्री को भेजा शिकायत पत्र

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  • वन मंत्री को भेजे शिकायत पत्र में लगाए कई आरोप एवं कार्रवाई की मांग
  • वन विभाग के कई मामलों ने पहले बटोरी हैं खूब सुर्खियां
  • चिरमिरी के छोटे कलुवा जंगलों की बेतहाशा कटाई पर भी उठाए सवाल
  • वन माफियाओं को कौन दे रहा संरक्षण: गुलाब कमरो

राजन पाण्डेय-
कोरिया,18 अगस्त 2025 (घटती-घटना)। भरतपुर-सोनहत विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक गुलाब कमरों ने वन मंत्री केदार कश्यप को पत्र लिखकर बैकुंठपुर वन मंडलाधिकारी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। गुलाब कमरों ने अपने पत्र के माध्यम से ग्रामीणों को लगातार परेशान करने, मजदूरी भुगतान में विलंब करने और किसानों की फसल बर्बाद करने जैसे कई आरोप लगाते हुए मामलों की जांच सहित संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्यवाही करते हुए कोरिया से स्थानांतरण किये जाने की मांग किया है।
वन विभाग की कार्यप्रणाली पर लगातार उठ रहे सवाल
वन विभाग ने अपने नियमो कानूनों का हवाला देते हुए गरीब ग्रामीणों द्वारा वन भूमि पर किये गए अतिक्रमण को तो हटा दिया गया, ग्रामीणों के घर मकान जमीदोज कर दिए गए लेकिन सबसे अहम सवाल यह भी है कि क्या वन विभाग सत्ता धारी दल के लोगो के द्वारा वन भूमि पर जो भारी भरकम क्षेत्र में कब्ज़ा किया गया है उसे हटाने की हिम्मत दिखायेगा? क्या सत्ता धारी दल के लोगो के द्वारा आस पास के क्षेत्र जंगलों में कई एकड़ जमीन में किये गए कब्जे सहित उसमें अवैध रूप से किये गए निर्माण कार्य को जमीदोज करने की हिमाकत वन विभाग कर सकेगा? यह सवाल अहम होता जा रहा है,सोनहत विकासखंड के अधिकांश वन भूमि पर लोगो लंबे समय से काबिज हैं लेकिन विभाग की कार्यवाही सिर्फ गरीबों के आशियाने पर ही हुई,क्या सत्ताधारी दल के लोगों पर विभाग का नियम कानून काम नहीं करता, क्या सत्ताधारी दल के लोगों द्वारा वन भूमि पर किये गए अवैध कब्जे कार्यवाही के नाम पर विभाग का बुलडोजर पंचर हो जाता है? क्या विभाग की अपनी ही भूमि का ज्ञान नहीं जो राजस्व भूमि पर बुलडोजर चलाया जा रहा है? इस तरह के सवाल क्षेत्र में चर्चा का विषय बने हुए हैं।
मजदूरों का शोषण और भुगतान में देरी
पूर्व विधायक ने मजदूरी भुगतान सम्बन्धी भी आरोप लगाते हुए अपने शिकायत पत्र में उल्लेख किया है कि वन विभाग में कार्यरत मजदूरों को अनावश्यक रूप से परेशान किया जाता है और उनके मेहनताने का भुगतान समय पर नहीं किया जाता। भुगतान हमेशा लंबी देरी के बाद किया जाता है। जिससे मजदूर आवश्यक रूप से परेशान होते हैं।
मजदूरी भुगतान में बड़ा झोल : सूत्र
कोरिया वनमण्डल के कई परिक्षेत्रों में मजदूरी भुगतान में व्यापक गड़बड़ी की जानकारी सूत्रों से मिली है। सूत्र बताते हैं कि यदि विभागीय योजनाओं एवं मनरेगा के तहत कराए गए कार्यो के मजदूरी भुगतान की जांच कराई जाए तो बड़े खुलासे हो सकते हैं , और बड़े बड़े हाई प्रोफाइल मजदूरों के नाम भी सामने आ सकते हैं।
पूर्व विधायक ने लगाया आरोप

पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने आरोप लगाया कि ग्रामीणों की जमीन और फसल खराब कर दी गई ग्राम चकड (तहसील सोनहत, जिला कोरिया) के ग्रामीण राम लखन, देवी दयाल, छोटे लाल, रामचंद्र और मानमती की राजस्व पट्टे की भूमि खसरा नं. 336 (रकबा 2.400, पट्टा धारक रामलाल पिता दुईयां) पर वन मंडल अधिकारी के आदेशानुसार बुलडोजर चलवा दिया गया। पूर्व विधायक ने आरोप लगाते हुए कहा कि ग्रामीणों ने मुझे अवगत कराया कि सोनहत विकासखण्ड के ग्राम चकदण्ड देवगढ़ वनपरिक्षेत्र का अमला अतिक्रमण हटाने गया हुआ था जहां पर लखन लाल एवं अन्य 5 लोगो की सम्मिलित खाते की राजस्व भूमि खसरा नम्बर 336 पर वन विभाग ने अतिक्रमण हटाने के नाम पर बुलडोजर चलना प्रारम्भ कर दिया , जमीन मालिको के देवीदयाल, निर्मला मुन्ना लाल रामचंद्र सहित अन्य ने बताया कि उनके द्वारा मना करने पर वन विभाग ने अमले ने उन्हें धमकाया और फटकार लगाई, जिस पर जमीन मालिक ने उन्हें जमीन का पट्टा दिखाया और जमीन के सभी दस्तावेज पट्टा बी1 खसरा सहित पुराना अभिलेख भी दिखाया लेकिन जमीन मालिक का आरोप है कि वन कर्मियों ने कागज फेक दिया और कार्यवाही जारी रखी, और खसरा नम्बर 336 में बने खेत के मेड़ो को तोड़ दिया और बोई गई फसल पर पूरा बुलडोजर चला दिया जिससे ग्रामीणों और जमीन मालिक में भारी आक्रोश है।
साल भर की खेती पर चला बुलडोजर परिवार में है 30 लोग
पूर्व विधायक गुलाब कमरो से ग्रामीण महिला निर्मला ने बताया कि खेत पर बुलडोजर चला देने से इस साल खेती नही हो पाएगी बहुत नुकसान कर दिया गया हम क्या खाएंगे, क्या बेचेंगे पूरे परिवार पर आर्थिक संकट आ गया है, 2023 में 70 मि्ंटल धान इसी भूमि पर उगा कर बेचे थे, हमारा तो परिवार ही सड़क पर आ गया, निर्मला ने बताया कि हमने प्रशासन को लिखित में शिकायत देकर जांच एवं कार्यवाही के साथ उचित मुवाबजे की भी मांग किया है, लेकिन कोई कार्यवाही नही हुई है। पीडि़त परिवार ने बताया कि वन विभाग द्वारा वन भूमि में कब्जे के सम्बंध में अतिक्रमण हटाने का नोटिस दिया था,लेकिन कार्यवाही पट्टे की राजस्व भूमि पर कर दी और ग्रामीणों का आरोप है कि वन अमले ने राजस्व भूमि पर बुलडोजर चलाने के दौरान पीडि़त परिवार को काफी डराया और धमकाया भी जिसकी चौतरफी निंदा हो रही है।
पूर्व विधायक ने कहा वन विभाग के विरुद्ध जल्द होगा बड़ा आंदोलन
पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार पर सवालिया निशान उठाते हुए कहा कि क्या यही विष्णुदेव जी का सुशासन है? पहले गरीबों के घर तोड़े गए अब वन भूमि का अतिक्रमण बता कर राजस्व भूमि पर बुलडोजर चला दिया गया गरीब ग्रामीणों के घर और खेतों सहित फसलों को जमीदोज किया गया,कमरो ने कहा कि पूर्व सरकार में एक भी घर नही तोड़े गए यहां तो गांव गांव में गरीब आदिवासियों पिछड़ा वर्ग और सामान्य वर्गों के लोगो को घर तोड़ बरसात में बेघर किया जा रहा है,सुशासन का वादा करके सबको घर देने के नाम पर आई सरकार घर तोड़ने का कार्य कर रही है,यह सब कुछ वन मंडकाधिकारी बैकुण्ठपुर कोरिया के इशारे पर किया गया। गुलाब कमरो ने कहा कि यदि सम्बंधित को न्याय नही मिला तो उन्हें न्याय दिलाने सड़क पर उतर कर लड़ाई लड़ी जाएगी,और सम्बंधित परिवार को हुए नुकसान की क्षति पूर्ति की सहित वनमण्डलाधिकारी पर कार्यवाही की मांग शासन से करता हूँ।
चिरमिरी छोटे कलुवा के जंगलों की बेतहाशा कटाई पर उठाए सवाल
भरतपुर सोनहत के पूर्व विधायक गुलाब कमरों ने मनेन्द्रगढ़ वनमण्डल अंतर्गत चिरमिरी के छोटे कलुवा के जंगलों की बेतहाशा कटाई पर सवाल उठाते हुए कई आरोप भी लगाए हैं। उल्लेखनीय है कि चिरमिरी छोटे कलुवा में साल व अन्य पेड़ो की मोटी मोटी बल्लियों की तस्वीरों के सोशल मीडिया में आने के बाद तरह तरह की चर्चाएं शुरू हो गई। पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने कहा कि क्षेत्र में वन माफिया सक्रिय…आखिर किसका संरक्षण? और इसका जिम्मेदार कौन है? पूर्व विधायक ने कहा कि चिरमिरी वन परिक्षेत्र के छोटे कलुआ के जंगलों में लकड़ी तस्कर बेखौफ सक्रिय हो कर अपने कार्य को अंजाम दे रहे हैं इसका अर्थ है कि कही न कही विभागीय मिलीभगत की भी संभावना है। हरे भरे पुराने विशाल वृक्षों को निर्दयता से काटा जा रहा, वन विभाग और राजस्व विभाग की चुप्पी काफी कुछ इशारे कर रही है पूर्व विधायक ने कहा क्या एक पेड़ मां के नाम सिर्फ नारा, कहावतों तक सीमित आखिर वन माफियाओं को संरक्षण कौन दे रहा है? इसकी जांच और कार्यवाही होनी चाहिए।


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