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बैकुंठपुर@ऐसी क्या हड़बड़ी थी कि प्रभारी प्राचार्य अपने सेवानिवृत्त होने व अपने जन्मदिन के बीच मात्र 15 दिन में 38 लाख महाविद्यालय का खर्च कर दिया?

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-रवि सिंह-
बैकुंठपुर,13 अगस्त 2025 (घटती-घटना)। छत्तीसगढ़ में 337 महाविद्यालय हैं यदि सरगुजा संभाग की बात की जाए तो 57 महाविद्यालय हैं जिसमें से कोरिया का बैकुंठपुर अग्रणी महाविद्यालय रामानुज प्रताप सिंहदेव भी शामिल है,हमने पूरे छत्तीसगढ़ के महाविद्यालय का फंड का अवलोकन किया देखा तो सबसे अधिक फंड बैकुंठपुर अग्रणी महाविद्यालय को मिला, ऐसा क्या था कि इस महाविद्यालय में जिस वजह से सबसे अधिक फंड मिलता था? इस बार भी 2024-25 में 38 लाख रुपए सिर्फ 15 दिन में सेवानिवृत्ति प्रभारी प्राचार्य अखिलेश चंद्र गुप्ता ने खर्च करके चलते बने, वही पुरे साल में इन्होने 43 लाख 61 खर्च किए वो भी सिर्फ 10 महीने में, इस महाविद्यालय के लिए उन्होंने फर्नीचर ख़रीदा और मरम्मत करवाया पर ना तो फर्नीचर ही दिख रहा है और ना ही मरम्मत ही दिख रहा है, फिर आखिर 38 लख रुपए खर्च हुए कहा यह बड़ा सवाल है,सेवानिवृत्ति प्रभारी प्राचार्य अखिलेश चंद्र गुप्ता इतने सुर्खियों में तब भी नहीं थे जब वह सेवानिवृत्ति नहीं हुए थे जैसे ही वह सेवानिवृत्त हुए अब सुर्खियों में आ गए हैं, उनकी कमियां अब दिखने लगी है लोगों तक पहुंचने लगी है, 26 साल में इन्होंने क्या किया यह कोई नहीं जान पा रहा था पर जैसे ही सेवानिवृत हुए सारी जानकारियां अब परत-दर-परत खुलकर सामने आ रही है, सेवानिवृत्ति प्रभारी प्राचार्य अखिलेश चंद्र गुप्ता सबसे भ्रष्ट प्रभारी प्राचार्य में सुमार हो सकते हैं यदि जांच हो गई तो। आपको बता दें कि पूरे छत्तीसगढ़ में इकलौता ऐसा नाम है अखिलेश चंद्र गुप्ता जो किसी महाविद्यालय में 26 साल अपनी सेवा खाली प्रभारी प्राचार्य होते हुए दिया है, यह छत्तीसगढ़ के महाविद्यालय के मामले में एक अनूठा रिकॉर्ड माना जा रहा है जो शायद ही कोई तोड़ पाएगा,यह रिकॉर्ड पूरे छत्तीसगढ़ के लिए शायद दर्ज हो गया है,क्योंकि अभी तक जो जानकारी आई है उसके मुताबिक इतना लंबा कार्यकाल किसी भी प्रभारी प्राचार्य का एक महाविद्यालय में नहीं रहा है,अब ऐसी क्या मजबूरी थी की इतना लंबा कार्यकाल एक ही महाविद्यालय में पूरा करने के लिए उनका विभाग मजबूर रहा अखिलेश चंद्र गुप्ता पर क्या भ्रष्टाचार को महाविद्यालय की शिक्षा के नाम पर बढ़ावा दिया जा रहा था? जो अब उनके सेवानिवृत होने के बाद दिखने लगा है गजब का इत्तेफाक है कि जिस महीने में सेवानिवृत हुए उसी महीने में उनका जन्म दिवस भी पड़ा 16 जनवरी 2025 को उनका जन्मदिन था और 31 जनवरी को वह सेवानिवृत हो गए,इस 15 दिन में उन्होंने जाते-जाते भी वह कारनामा कर गए जो शायद कोई भी प्रभारी प्राचार्य नहीं कर पाता, क्योंकि वह इतने रसूखदार व्यक्ति थे अखिलेश चंद गुप्ता कि जाते-जाते पूरा महाविद्यालय का पैसा 38 लाख रुपए खर्च कर दिए आने वाले के लिए कुछ भी नहीं छोड़ा, ऐसा लगा कि वह जाते-जाते उस पैसे को भी अपने जेब में भरते चले गए हो, उस पैसे से उन्होंने बताया है कि फर्नीचर ख़रीदा है और मरम्मत कार्य करवाया है पर यह दोनों चीज महाविद्यालय में नहीं दिख रही है, पर उनके बिल महाविद्यालय में सुशोभित है अब ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर यह 38 लाख रुपए अखिलेश चंद्र गुप्ता क्या अपने घर ले गए इसकी जांच क्या उच्च शिक्षा विभाग के आयुक्त कर पाएंगे? क्या सचिव इस पर जांच बैठाएंगे वैसे कोरिया के कलेक्टर महोदय भी इस मामले में अब शांत पड़ते जा रहे हैं।
कितनी भी शिकायत कर लो सरकार में बैठे लोग ही इन्हें संरक्षण देते हैं कुछ नहीं होगा?
अखिलेश चंद्र गुप्ता को लेकर अब पूरे जिले सहित महाविद्यालय में एक धारणा बन गई है कि अखिलेश चंद्र गुप्ता एक ऐसे व्यक्ति हैं जिनके पास पैसे के साथ अटूट पावर है यानी कि उनके पास राजनीतिक संरक्षण से लेकर शासकीय संरक्षण तक मौजूद है,यही वजह है कि उनके विरुद्ध शिकायत होती है जानकारी ऊपर तक पहुंचती है पर किसी में हिम्मत नहीं है कि उनके ऊपर जांच बैठा सके और उनके ऊपर कार्यवाही कर सके,यहां तक की 26 साल में प्रभारी प्राचार्य से हटाने की भी हिम्मत किसी में नहीं थी, इसी वजह से उन्होंने एक अनूठा रिकॉर्ड छत्तीसगढ़ में बना दिया जो कभी टूटने वाला नहीं है, वही यह भी जानकारी आ रही है कि उच्च शिक्षा विभाग के आयुक्त संतोष देवांगन व डॉ. एस. भारतीदासन काफी ईमानदार अधिकारी हैं और उनके पास शिकायत चली गई है और यह उम्मीद जताया जा रहा है कि इस बार जांच भी होगी। सूत्रों का यह भी कहना है कि इस मामले को लेकर कोरिया कलेक्टर श्रीमती चंदन त्रिपाठी ने भी उच्च शिक्षा विभाग के सचिव को इस पूरे मामले से अवगत कराया है।
जांच हो गई तो बहुत बड़ा घोटाला आ सकता है सामने
अखिलेश चंद्र गुप्ता बहुत बड़े घोटालेबाज निकल सकते हैं ऐसा अब दावा किया जा रहा है सिर्फ जांच बस उनकी निष्पक्षता के साथ करवा दी जाए, क्योंकि इन्होंने सिर्फ 26 साल में किसी को पढ़ाया नहीं सिर्फ प्रभारी प्राचार्य होकर खाली पैसा बनाया और यही पैसा आज उनके संपत्ति में शुमार है यह कोरिया जिले के सबसे अमीरों में अब गिने जाने लगे, उनकी जमीन से लेकर तमाम तरह की संपत्तियों की चर्चा अब तेज हो चुकी है और जैसे-जैसे यह बात सामने आ रही है वैसे-वैसे अब लोगों को लगने लगा है कि प्रभारी प्राचार्य सिर्फ महाविद्यालय में बच्चों की शिक्षा के बीच एक नया ही शिक्षा ग्रहण कर रहे थे, वह शिक्षा थी अटूट संपत्ति जुटाने की और महाविद्यालय के पैसे का वारा न्यारा करने की जो इन्होंने किया है पर जांच में आज भी विभाग कतरा रहा है यह सबसे बड़ा सवाल है।
महाविद्यालय में चोरी करने वाले बाबू को भी दिया था… अखिलेश चंद्र गुप्ता ने संरक्षण
राहुल सेन,पूर्व में कार्यरत पी.जी. कॉलेज के सहायक ग्रेड- 01 पन्ना लाल सेन के पुत्र है। जो शासकीय लाहिड़ी स्नातकोत्तर महाविद्यालय चिरमिरी से प्रयोगशाला तकनीशियन के पद पर पदोन्नत होकर शासकीय नवीन महाविद्यालय नागपुर दिनांक 21.10.2021 को कार्यभार ग्रहण किए थे। दिनांक 08.08.2022 को शासकीय उ.मा. विद्यालय नागपुर में चोरी कर एक सप्ताह जेल में निरुद्ध रहे। जिसका समाचार भी प्रकाशित हुआ। न्यायालय से जमानत पर रिहा होने के पश्चात् डॉ. ए.सी. गुप्ता द्वारा नियम विरूद्ध तरीके से राहुल सेन को कार्यभार ग्रहण करवा दिया गया। शासन स्तर पर शिकायत होने पर राहुल सेन को हटाया गया एवं दिनांक 09.08.2022 से निलंबित माना गया, डॉ. ए.सी. गुप्ता की पहुंच के कारण आज लगभग 03 वर्ष व्यतीत होने के पश्चात् भी राहुल सेन का मुख्यालय निर्धारित नहीं किया गया है। निलंबन के पश्चात् उसी महाविद्यालय में कार्य करना न्याय संगत नहीं है। जबकि उस समय कांग्रेस की सरकार में कांग्रेस के नेता ने ही शिकायत किया था पर यह भी मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
छत्तीसगढ़ शासन भंडार क्रय नियम 2002 यथा संशोधन 2022 को भी खरीदी में दिखाया गया ठेंगा?
छत्तीसगढ़ शासन भंडार क्रय नियम 2002 यथा संशोधित 2022 में छत्तीसगढ़ शासन वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के द्वारा नियम बनाया गया था जिसमें जिसमें 50000 से अधिक की राशि में निविदा निकल जाना था,एकल वस्तु की वार्षिक आवश्यकता 50000 से अधिक नहीं होने की बात कही गई थी, क्रय के लिए 50000 से 3 लाख की राशि निर्धारित की गई थी जिस वजह से कम पैसे का अलग-अलग बिल लगाकर राशि निकाली गई और यह बताया गया की राशि निर्धारित दर से काम है यानी कि पैसा गमन करने के लिए इस पद्धति का उपयोग किया गया निविदा से बच गया,क्या निविदा से बचने के लिए बिल को निर्धारित दर से काम किया गया और एक ही समान के कई अलग-अलग बिल लगाए गए यह भी सवाल है, सवाल के साथ जांच का मुद्दा भी क्या निविदा इसलिए नहीं निकल गई ताकि भ्रष्टाचार करते बन सके शासन के पैसे को जेब में डाला जा सके? इतने बड़े महाविद्यालय में जहां लाखों रुपए खर्च हो गए वहां पर कई सालों में एक भी निविदा नहीं निकल गई, खरीदी में जेम गवर्नमेंट मार्केटिंग के माध्यम से क्रय में भी जमकर भ्रष्टाचार किया गया है क्या जैम गवर्नमेंट मार्केट पोर्टल भ्रष्टाचार कम करने के लिए है या पर बढ़ाने के लिए यह भी अब सवाल उठने लगा है?
15 दिन दे दो सब पूरे खाली कर दूंगा
जिस तरह से 15 दिनों मे महाविद्यालय के खजाना को खाली किया है उसे देखकर तो ऐसा ही लगता है कि 15 दिन उनके लिए बहुत महत्वपूर्ण दिन थे जिसमें उन्होंने पूरा खजाना ही महाविद्यालय का खाली कर दिया, डॉ. ए.सी. गुप्ता द्वारा 16 जनवरी 2025 को जन्म दिन से लेकर 31 जनवरी 2025 को सेवानिवृत्त होने तक मात्र 15 दिनों में बैकुण्ठपुर महाविद्यालय में शासन से प्राप्त राशि रू. 14.00 लाख के फर्जी बिल लगाकर खरीदी की गई। सेवानिवृत्त होने के 15 दिन पहले महाविद्यालय को ऐसी क्या आवश्यकता थी कि 38.00 लाख की राशि खर्च की गई। राशि व्यय करने के लिए 02 माह और शेष थे, आने वाले प्राचार्य महाविद्यालय की आवश्यकतानुसार खर्च कर सकते थे? लेकिन इनको फर्जी बिल लगाकर राशि निकालना था,इसलिए सम्पूर्ण राशि खर्च कर दी गई। दिनांक 29 जनवरी 2025 अर्थात् सेवानिवृत्त के दो दिन पहले तक 13 लाख की खरीदी की गई। डॉ. ए.सी. गुप्ता द्वारा वर्तमान प्राचार्य को बिल एवं कैश बुक में हस्ताक्षर छूटे की बात कहकर बिल पूर्ण करना चाह रहे है, जबकि सबसे आश्चर्यजनक बात यह है कि बिना पास फार पेमेन्ट, बिना स्टॉक और पेड एण्ड कैसिंल्ड के हस्ताक्षर के बिना बिल का भुगतान कैसे हो गया।? यदि हस्ताक्षर है तो फिर हस्ताक्षर छूटा कहां है? क्या डॉ. गुप्ता बिलों को बदलने के लिए बिल मांग रहे है ताकि उसी राशि के दूसरे बिल लगाया जा सके। सेवानिवृत्ति तक खरीदी करना याद था लेकिन पीडी कैश बुक का टोटल करना शायद भूल गए थे जो विगत् 05 वर्षो से लम्बित है। डॉ. गुप्ता को सिर्फ अपना जेब भरना याद था कैश बुक का टोटल एवं ऑडिट कराना ध्यान नहीं था। डॉ. गुप्ता, उनकी पत्नी डॉ. प्रीति गुप्ता एवं उनके बच्चे के पीपीएफ खाते में है करोड़ो रूपये, सेविंग खाते एवं एफडी, व पोस्ट ऑफिस के एमआईएस खाते में भी है बड़ी राशि। शहर के दो बड़े बैंकों में गोपनीय लॉकर है ऐसा विशेष सूत्रों का माना है।

अखिलेश गुप्ता के रिटायरमेन्ट के आखिरी माह में निकले बिलों का विवरण:-

क्र.सं.विवरणभुकतान दिनांक  भुकतान माह वर्ष सकल राशिशुद्ध राशि
1गैर कार्यालयीन29-Jan-25Jan-25295480295480
2गैर कार्यालयीन29-Jan-25Jan-25299630299630
3सूचना प्रौद्योबिकी29-Jan-25Jan-25299800299800
4पुस्तक29-Jan-25Jan-257450074500
5भण्डार एवं कच्चा माल29-Jan-25Jan-25299943299943
6गैर कार्यालयीन24-Jan-25Jan-25199970199970
7विशेष सेवाएं24-Jan-25Jan-25249998249998
8औजार संयंत्र23-Jan-25Jan-25300000300000
9विशेष सेवाएं 23-Jan-25Jan-25200000200000
10पुस्तक23-Jan-25Jan-25125500125500
11विशेष सेवाएं 23-Jan-25Jan-25300000300000
12रिपेयरिंग23-Jan-25Jan-259995799957
13रिपेयरिंग16-Jan-25Jan-25200000200000
14रिपेयरिंग16-Jan-25Jan-25100000100000
15गैर कार्यालयीन16-Jan-25Jan-25299956299956
16फर्नीचर एवं कार्यालयीन16-Jan-25Jan-25299850299850
17मजदूरी16-Jan-25Jan-25100000100000
    37445843744584

शासकीय रामानुज प्रताप सिंहदेव स्नातकोत्तर महाविद्यालय बैकुण्ठपुर के पांच वर्षो के क्रय की जानकारी:-


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