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एमसीबी@क्या बेलगाम डीएफओ को सरकार और विभाग के उच्च अधिकारियों का है संरक्षण?

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-संवाददाता-
एमसीबी,07 अगस्त 2025 (घटती-घटना)। गुरुवार की सुबह मनेंरगढ़ डीएफओ ऑफिस में नगर पालिका अध्यक्ष अपने कुछ जनप्रतिनिधियों के साथ ज्ञापन सौंपने पहुंची थी इसी दौरान डीएफओ और नगर पालिका अध्यक्ष के बीच किसी बात को लेकर कहां सुनी हो गई और मामला इतना बढ गया कि डीएफओ द्वारा महिला नगर पालिका अध्यक्ष समेत जनप्रतिनिधियों को बाहर निकालने की बात कह दी गई इसके बाद मामले ने काफी तूल पकड़ लिया और नगर पालिका अध्यक्ष अब जनप्रतिनिधियों के साथ डीएफओ कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गई है और डीएफओ को हटाने की मांग को लेकर वहां जमकर नारेबाजी की गई।
मिली जानकारी के अनुसार नगर पालिका मनेन्द्रगढ़ वार्ड में पिछले कुछ दिनों से लगातार एक भालू के घूमने की खबरों से नागरिकों में भय का माहौल बना हुआ है। स्थानीय जनता की सुरक्षा और शीघ्र वन विभाग की कार्रवाई की मांग को लेकर नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिभा यादव,उपाध्यक्ष धर्मेंद्र पटवा, विधायक प्रतिनिधि सरजू यादव और पार्षदगण आज वन मंडल अधिकारी मनेंदरगढ़ के कार्यालय पहँच थे। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि वे डी एफ ओ मनीष कश्यप को एक ज्ञापन सौपने गए थे, ताकि भालू को पकड़कर सुरक्षित स्थान पर भेजने की कार्रवाई जल्द शुरू की जाए। लेकिन नगर पालिका अध्यक्ष का आरोप है कि वनमण्डलाधिकारी अमित कश्यप ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया और जन प्रतिनिधियों को कार्यालय से बाहर निकालने की बात कह दी। इस घटना के बाद जनप्रतिनिधियों ने मनीष कश्यप के व्यवहार कीकड़ी निंदा करते हुए इसे लोकतंत्र का अपमान बताया। जन प्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन से मामले में संज्जान लेने और संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की हैं और विधायक प्रतिनिधि सरजू यादव ने छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल से तत्काल बात करते हुए वनमण्डलाधिकारी मनीष कश्यप को तत्काल हटाने की मांग की हैं।
कांग्रेसियों ने भी किया प्रदर्शन… पूर्व विधायक गुलाब कमरों ने दी कड़ी प्रतिक्रिया
घटना की जानकारी मिलने के बाद युवा कॉंग्रेस अध्यक्ष हाफिज मेमन राज कुमार केशरवानी प्रवक्ता सौरभ मिश्रा,सहित पूरी टीम डीएफओ कार्यालय पहुची और वन मंडकाधिकारी के व्यवहार की कड़ी निंदा करते हुए जम कर नारे बाजी की और उन्हें हटाये जाने की मांग किया। इस दौरान भाजपा और कांग्रेस के पदाधिकारियों का साथ मे नारेबाजी करते देखा गया वही पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने कहा कि यह बेहद शर्मनाक है कि छत्तीसगढ़ में भाजपा के राज में जनप्रतिनिधियों का कोई सम्मान नहीं रह गया है। वनमण्डल अधिकारी किस अधिकार से जनता के प्रतिनिधियों को इस तरह अपमानित कर सकता है? यह कृत्य लोकतंत्र के मुंह पर गहरा आघात है। पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने मांग की कि डीएफओ मनीष कश्यप के खिलाफ तत्काल उच्च स्तरीय जांच हो और उन्हें पद से हटाया जाए। गुलाब कमरों ने यह भी बताया कि यह पहली बार नहीं है, पूर्व में भी उन्होंने डी एफओ के व्यवहार और कार्यशैली को लेकर शिकायतें की थीं, लेकिन सत्ता पक्ष के संरक्षण में उन्हें हर बार बचा लिया गया।
क्या जनप्रतिनिधि अब चुप रहेंगे?
अब बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या इस पूरे प्रकरण पर शासन-प्रशासन आंखें मूंदे बैठा रहेगा? जनता के प्रतिनिधियों का इस तरह निरंतर लोकतंत्र के बुनियादी सिद्धांतों पर सीधा प्रहार है। यदि दोषी अधिकारी पर शीघ्र कार्रवाई नहीं होती, तो जनाक्रोश और गहरा हो सकता है। डीएफओ का यह व्यवहार न केवल सेवा नियमों के खिलाफ है, बल्कि जनभावनाओं का अपमान भी है। अब देखना यह है कि क्या सरकार इस मामले को गंभीरता से लेकर कार्रवाई करती है, या फिर अफसरशाही के अहंकार को खुली छूट दी जाती है।
पत्रकार भी विरोध में आये धरने पर बैठे
मनेंद्रगढ़ वनमंडल में डीएफओ मनीष कश्यप के खिलाफ चल रहा विरोध अब और व्यापक हो गया है। कांग्रेस और भाजपा के पार्षदों के बाद अब पत्रकार भी डीएफओ के व्यवहार के खेलाफ धरने पर बैठ गए हैं। बवाल के बीच भरतपुर-सोनहत की विधायक रेणुका सिंह और भाजपा जिला अध्यक्ष चंपा देवी पावले जब डीएफओ चेम्बर में पहुंचीं, तो उनके साथ कुछ पत्रकार भी अंदर जाना चाह रहे थे सूत्र बताते हैं की डीएफओ ने चेंबर का गेट बंद करवा दिया और पत्रकारों को बाहर निकालने के निर्देश दिए। डीएफओ के इस बर्ताव से नाराज होकर पत्रकारों ने कार्यालय परिसर में ही धरना शुरू कर दिया। उनका कहना है कि लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों और मीडिया के साथ ऐसा व्यवहार निंदनीय है। इधर कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दलों के पार्षद पहले से ही डीएफओ को हटाने की मांग को लेकर धरने पर बैठे हुए हैं। अब डीएफओ को हटाने की मांग को लेकर धरने पर बैठे हुए हैं। अब मीडिया का समर्थन मिलने से यह आंदोलन और भी मजबूत होता दिख रहा है। बताया जा रहा है कि पूरे घटनाक्रम पर न केवल स्थानीय प्रशासन बल्कि मुख्यमंत्री कार्यालय औरपीसीसीएफ तक की नजर बनी हुई है राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी तेज है कि एक अधिकारी के व्यवहार के कारण सरकार की छवि धूमिल हो रही है। हालांकि विधायक रेणुका सिंह और भाजपा जिला अध्यक्ष चंपा देवी पावले की डीएफओ से मुलाकात हुई. लेकिन अभी तक किसी समाधान की स्थिति सामने नहीं आई है। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि पिछले एक साल से डीएफओ की कार्य प्रणाली को लेकर शिकायते मिल रही थीं, जिन्हेंकई बार वरिछ नेताओंतक भी पहुंचाया गया लेकिन अब असंतोष सड़कों पर आ चुका है।
पार्षदों सहित अध्यक्ष उपाध्यक्ष ने सामुहिक इस्तीफा की दी चेतावनी
नगर पालिका अध्यक्ष,उपाध्यक्ष और पार्षदों के साथ डीएफओ द्वारा अभद्रता व अपमानजनक व्यवहार किए जाने को लेकर पूरा नगर पालिका परिषद आक्रोशित है। इस गंभीर घटनाक्रम को लेकर नपाध्यक्ष श्रीमती प्रतिमा यादव के नेतृत्व में सभी 22 पार्षदों ने छत्तीसगढ़ शासन के लोक स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल को सामूहिक इस्तीफे की चेतावनी देते हुए ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में जनप्रतिनिधियों ने स्पष्ट लिखा है कि 7 अगस्त को डीएफओ से मुलाकात के दौरान उन्होंने केवल दो पार्षदों को चेंबर में बुलाया और बात समाप्त होते ही कर्मचारियों को बुलाकर अन्य जनप्रतिनिधियों को धक्का देकर बाहर निकलवाने के आदेश दिए। इसके साथ ही डीएफओ द्वारा अपशदों का प्रयोग किया गया, जिससे आहत होकर सभी जनप्रतिनिधि डीएफओ के चेंबर में ही धरने पर बैठ गए। जनप्रतिनिधियों ने इस पूरे घटनाक्रम को मुख्यमंत्री, कलेक्टर और मंत्री तक पहुंचाते हुए कहा है कि यदि डीएफओ को तत्काल प्रभाव से नहीं हटाया गया,तो वे सभी अपने-अपने पद से सामूहिक रूप से इस्तीफा देने के लिए बाध्य होंगे।


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