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सरगुजा/कोरिया@क्या चर्चित प्रधान आरक्षक कोरिया या एमसीबी जिले में आने के लिए लगातार करवा रहे हैं पैरवी?कोरिया नहीं तो एमसीबी ही भेज दीजिए पर भेज दीजिए…लगा रहे हैं गुहार…

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-न्यूज डेस्क-
सरगुजा/कोरिया,31 जुलाई 2025 (घटती-घटना)। संभाग के कोरिया जिले में पदस्थ रहे एक प्रधान आरक्षक जिसे सुपर कॉप व एनडीटीवी के नाम से जाना जाता था यह इतने शातिर हैं कि उनकी व्याख्या करना शायद काफी मुश्किल हो सकता है,इन्हें बिल्कुल भी इस बात की उम्मीद नहीं थी कि उनका स्थानांतरण कभी भी कोरिया जिले से बाहर होगा पर शुक्र हो उन आईपीएस अधिकारी का जिन्होंने सरगुजा से जाते-जाते इनको आईना दिखाया और उन्हें जिले से बाहर भगाया,स्थानांतरण जिले से बाहर जशपुर कर दिया, स्थानांतरण होने के बाद ऐसा लग रहा है कि यह अपना मानसिक संतुलन खो बैठे हैं तमाम तरीके से वापस आने के लिए हाथ-पांव मार रहे हैं,तत्कालीन सरगुजा आईजी अंकित गर्ग ने उनकी कार्य प्रणाली को काफी लंबे समय तक अवलोकन किया और जाते-जाते इनका स्थानांतरण उन्होंने करना पुलिस हित और छवि के हित में जरूरी समझा,पर यह प्रधान आरक्षक को बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि कोई ऐसा भी अधिकारी आएगा जो इन्हें जिले से बाहर का रास्ता दिखाएगा, इनका स्थानांतरण होने के बाद इनकी मानसिक स्थिति विचित्र जैसी हो गई है, स्थानांतरण का दोषी यह आईजी ऑफिस, एसपी ऑफिस में बैठे लोगों को मान रहे हैं,जिस वजह से उन लोगों की शिकायत भी तमाम तरीके से झूठी करवाने का षड्यंत्र रच रहे हैं ऐसा सूत्रों का दावा है, कोरिया नहीं तो एमसीबी ही भेज दें,इसे लेकर तमाम अधिकारी व नेताओं से यह फोन करवा रहे हैं,इनकी पैरवी के फोन से शायद आईजी भी परेशान है,सूत्रों का यह भी कहना है कि उनके काफी सारे साथी एमसीबी जिले में है अब जिनके साथ वह उस जिले में तांडव मचाएंगे,इसलिए कोरिया नहीं तो एमसीबी ही वापसी कर दें पर जो करना है जल्द कर दें,क्योंकि जशपुर जिले में उन्हें काम करने में काफी दिक्कत आ रही है,उनकी आमदनी कम हो गई है और बाकी उनके व्यापार भी प्रभावित हो रहे हैं,जमीन से संबंधित कारोबार व जेसीबी का कारोबार सब प्रभावित हो रहा है,इसलिए उनका कोरिया जिले आना जल्द से जल्द जरूरी है और वह ऐसा चाह रहे हैं। अपने स्थानांतरण का दोषी आईजी ऑफिस व एसपी ऑफिस में बैठे कर्मचारियों को मान रहे हैं पर अपने दोषपूर्ण कार्यप्रणाली को वह इसकी वजह क्यों नहीं मान रहे? इनका स्थानांतरण सिर्फ इनकी दोषपूर्ण कार्य प्रणाली की वजह से हुआ था,जो भी इनकी कार्य प्रणाली को समझ जाता है वह इन्हें दंडित करना चाहता है,इससे पूर्व में भी कोरिया में एक एसपी आए थे जो इन्हें दंडित करने को तैयार थे पर कुछ नेताओं की वजह से यह बच गए थे,बताया जाता है कि कोरिया के पूर्व एसपी बीएस ध्रुव इन पर एफआईआर दर्ज करने तक को तैयार थे क्योंकि इनकी कार्यप्रणाली ही इतनी खराब थी,इनके विरुद्ध आय से ज्यादा संपत्ति की भी शिकायत हो चुकी है पर यह इतने शातिर है कि इन शिकायतों की भी वह जांच को प्रभावित कर बैठे, उनके विरुद्ध 2016 में फिर भी सिटी कोतवाली थाने में एफआईआर दर्ज हुआ था वह भी न्यायालय के आदेश पर,वहां पर भी नामजद दर्ज न करके अन्य के नाम से प्राथमिकी दर्ज हुआ उसमें भी आज तक विभागीय जांच नहीं हो पाई, इनके कारनामों की फेरहिस्त इतनी लंबी है की जो भी आईजी व एसपी आएंगे दो दिन तक इनके कारनामों की जानकारी लेने में ही निकल जाएगा।
प्रधान आरक्षक की फाइल लेकर कौन जाएगा आईजी साहब के पास,जो उनके कारनामों से उन्हें वाकिफ करवा सके?
प्रधान आरक्षक कोरिया जिले में रहते कितने कारनामे कर चुके हैं कितनी बार उन्होंने पुलिस के लिए विभाग के लिए विपरीत स्थिति उत्पन्न की है जब उनके कारण विभाग को बहुत कुछ सहना पड़ा है यह जिले के लोग जानते हैं विभाग के लोग जिले में ज्यादा जानते हैं,प्रधान आरक्षक की भी शिकायतें कई बार हुई हैं और यदि चाहा जाए उसकी भी फाइल लंबी फाइल बन सकती है, वैसे यदि फाइल बनाई जाए तो उसे आईजी साहब के पास कौन लेकर जाएगा और अवगत कराएगा? इनकी कार्यप्रणाली से यह भी बड़ा सवाल है। प्रधान आरक्षक सुर्खियों में रहने के आदि थे जिले में और वह अपनी दोषपूर्ण कार्यप्रणाली के लिए विख्यात थे यह जाना समझा विषय है जो केवल जरा सी जानकारी जुटाने पर सामने आने वाला विषय होगा।
गाड़ी खरीदने के अनुमति के दौरान जिस गाड़ी को बेचा गया उसके नंबर का क्यों नहीं हुआ जिक्र?
प्रधान आरक्षक ने वाहन नया खरीदा और सूचना अनुमति के लिए आवेदन विभाग में दिया,आवेदन में एक पुराने वाहन के विक्रय का जिक्र किया गया जिसे बेचकर नया वाहन लेना आवेदन का विषय है,अब वह वाहन जो बेचा गया वह कौन सा वाहन था? उसका नंबर क्या था? उसका पंजीयन क्या था? यह क्यों उल्लेखित नहीं है आवेदन में यह सोचने वाला विषय है, क्या यहां भी इस मामले में कोई झोलझाल है यह सवाल है?
आईजी साहब के पास घटती घटना की खबरों की फाइल भेजकर प्रधान आरक्षक के खास उन्हें भ्रमित करने का कर रहे थे प्रयास?
प्रधान आरक्षक अपनी शातिर बुद्धि का इस्तेमाल करके हर वह तरीका अपना रहे हैं जिससे वह एक साफ सुथरी छवि के व्यक्ति कर्मचारी साबित हो जाएं और अन्य जो उनके कार्यप्रलाणी के खिलाफ मुखर हैं उसका विरोध कर रहें हैं, वह आईजी साहब की नजर में दोषी साबित हो जाएं,सूत्रों की माने तो प्रधान आरक्षक ने दैनिक घटती-घटना की उन खबरों की एक फाइल बनाई है जिसमें दैनिक घटती-घटना ने सत्य का प्रकाशन किया है और जिन मामलों में कहीं न कहीं दोषपूर्ण कार्यप्रणालियों का उल्लेख किया गया है और जिसमें प्रधान आरक्षक के भी कार्यप्रणाली दोषपूर्ण की खबरें प्रकाशित हैं,इस फाइल को प्रधान आरक्षक अपने विश्वस्त लोगों से माध्यम से आईजी साहब के समक्ष प्रस्तुत कर यह साबित करना चाह रहे थे,उन्हें बरगलाना उनका प्रयास था कि खबरें द्वेष आधारित हैं और खबरों का सत्यता से कोई लेना देना नहीं है,वहीं यदि खबरों के विषय में बात की जाए तो खबरें सूत्रों द्वारा प्रदान की हुईं थीं और उनकी सत्यता की परख पश्चात ही प्रकाशित थीं जिस मामले में कभी समाचार पत्र दोषी नहीं करार दिया गया,क्योंकि सत्य से प्रेरित खबर प्रकाशन का अधिकार लोकतांत्रिक अधिकार वह मानकर अपना चलता है। प्रधान आरक्षक अपनी दोषपूर्ण कार्यप्रणाली को छिपाने सभी को दोषी बनाने में लगे हैं जिसमें पत्रकार और कुछ पुलिसकर्मी उनके निशाने पर हैं जिसे आईजी साहब को समझना होगा। वैसे केवल उक्त प्रधान आरक्षक की संपतियों की जांच उनके कार्यकाल की सूक्ष्मता से जांच ही यह साबित कर देगी कि कौन गलत है और समाचार कितना सत्य है।
क्या झूठ बोलकर वाहन खरीदी के लिए अनुमति ली है,पिता खरीद रहे हैं वाहन अपने लिए और पुत्र खुद ले रहे हैं उसका आनंद?
कोरिया जिले में प्रधान आरक्षक रहे अब जशपुर जा चुके प्रधान आरक्षक ने अभी हाल ही में नई गाड़ी खरीदी है,गाड़ी भी ऐसी वैसी नहीं गाड़ी कम से कम उनकी आय क्षमता से अधिक की है और वह भी बहुत अधिक की,इस मामले में चूंकि उनके विरुद्ध आय से अधिक संपत्ति की बात हो सकती थी और बिना अनुमति वाहन खरीदी की बात हो सकती थी इसलिए उन्होंने यहां भी विभाग को दिग्भ्रमित करने का प्रयास किया है, उन्होंने अनुमति के लिए लिखे पत्र में लिखा है कि उनके पिता को वाहन की जरूरत बढ़ती उम्र के कारण होने वाली दिक्कत की वजह से है और वह खुद वाहन खरीद रहे हैं और जो उनके नाम से ऋ ण पर लिया गया है जिसके संबंध में किस्त की राशि पिता के माध्यम से अदा की जाएगी। इस मामले में सोचने वाली बात ध्यान देने वाली बात यह है कि वाहन का उपयोग वह खुद कर रहे हैं और वाहन पिता की जगह उनके लिए उपयोग की जा रही है, हाल ही में उसी वाहन के साथ उनके नाबालिक पुत्र का भी एक सोशल मीडिया पोस्ट वायरल हुआ था जिसमें उनका नाबालिक पुत्र वाहन चला रहा था जिसपर भी कार्यवाही नहीं हुई,अब जब वाहन वह खुद के उपयोग में ला रहे हैं पिता की बढ़ती उम्र और उनको होने वाली आवागमन कठिनाई का विषय कहां से आया और क्यों लाया गया समझा जा सकता है। मामला चूंकि आय से अधिक या अन्य अवैध स्रोतों से आय का न बन जाए ऐसी शिकायत न हो जाए इसलिए यह ऐसी बातें विभाग को बतला रहे हैं और कहीं न कहीं झूठ बोलकर लिखकर अनुमति वाहन क्रय की ले रहे हैं या मात्र सूचना दे रहे हैं। इनके मामले में यदि इनकी संपत्तियों की सूक्ष्मता से जांच की जाए बड़े खुलासे की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता ऐसा कहना है सूत्रों का जो इन्होंने विभाग में आने उपरांत कम समय में अर्जित की है।
क्या वर्तमान आईजी इनकी कार्यप्रणाली की जानकारी नहीं ले पाए हैं?
सूत्रों से लगातार यह बात पता चल रही है कि कोरिया जिले से जशपुर भेजे गए प्रधान आरक्षक आईजी साहब के कार्यालय का या तो चक्कर लगा रहे हैं जहां जाकर वह पत्रकार और कोरिया जिले के पुलिस अधिकारियों-कर्मचारियों की शिकायत कर रहे हैं या वह नेताओं से अपने आकाओं से आईजी साहब पर अपनी वापसी के लिए या एमसीबी जिले में पदस्थापना के लिए दबाव बनवा रहे हैं,क्या आईजी साहब इनकी कार्यप्रणाली से अभी तक अवगत नहीं हुए हैं? किस तरह यह कोरिया जिले में लंबे कार्यकाल के दौरान सुर्खियों में रहते रहें हैं उन्हें इसकी जानकारी लेनी चाहिए तभी इनके विषय में इनकी वापसी के विषय में निर्णय लेना चाहिए। किस तरह इनके तबादले से जिले के अधिकांश लोग प्रसन्न हुए थे कुछ ने नारियल फोड़कर भगवान का और तत्कालीन आईजी साहब को धन्यवाद दिया था, यह इनकी छवि बताने काफी है। प्रधान आरक्षक पत्रकार और कुछ पुलिस के ही कर्मचारियों की शिकायत कर रहे हैं वहीं जिनकी भी यह शिकायत कर रहे हैं उनकी किसी कार्यप्रलाणी से आम लोगों को कभी कठिनाई नहीं हुई, जो गलत हैं उनके विरुद्ध लिखना ही जब पत्रकारिता का धर्म है और वह धर्म जब निभाया जा रहा है यह विषय शिकायत का कैसे हुआ यह आईजी साहब को भी समझना होगा।


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